Ram Temple Ceremony : भगवान राम की पवित्र नगरी अयोध्या एक बार फिर भव्य कार्यक्रम के लिए पूरी तरह सज चुकी है. 25 नवंबर को मंदिर में धर्म ध्वजा समारोह का खास आयोजन किया गया है. यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि वह संदेश भी है, जिसे भगवान राम ने अपने जीवन में व्यवहार से समझाया. उन्होंने निषादराज को गले लगाया, शबरी के बेर खाए और केवट के पैर धोकर समाज को यह बताया कि हर व्यक्ति समान है.
इस समारोह में उसी भावना को सम्मान दिया जा रहा है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि इस बार ऐसे लोगों को बुलाया गया है, जिन्हें पहले कभी किसी बड़े आयोजन में आमंत्रण नहीं मिला.
कौन होंगे समारोह के विशेष अतिथि?
इस कार्यक्रम में VIP कहलाने वाले नेता या अधिकारी नहीं, बल्कि वे लोग शामिल किए गए हैं, जिनका नाम हम बचपन से रामायण में सुनते आए हैं. निषादराज के समुदाय से जुड़े लोग, शबरी माता के समुदाय से जुड़े लोग और वे सभी जिनका भगवान राम की कथा में विशेष स्थान है, उन्हें इस समारोह में सम्मान के साथ आमंत्रित किया गया है. कुल 6,000 से 8,000 लोगों की सूची तैयार की गई है. यह कदम सामाजिक समरसता और सबको साथ लेकर चलने की भावना को दर्शाता है, जैसा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने जीवन में दिखाया था.
प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ध्वज फहराने की शुरुआत
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. वह राम मंदिर के शिखर पर भगवा धर्म ध्वज फहराकर इस समारोह का शुभारंभ करेंगे. एयरपोर्ट से वे हेलीकॉप्टर के माध्यम से साकेत महाविद्यालय पहुंचेंगे और वहां से श्रीराम जन्मभूमि तक एक भव्य रोड शो किया जाएगा. रामपथ को विशेष रूप से आठ जोनों में बांटा गया है. हर जोन में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं थाली, आरती और पुष्पों से प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगी. यह दृश्य बेहद आकर्षक और सांस्कृतिक माहौल से भरपूर होगा.
राम मंदिर की धर्म ध्वजा क्यों है विशेष?
राम मंदिर के शिखर पर जो केसरिया ध्वज फहराया जाने वाला है, वह सामान्य ध्वज नहीं है. इस ध्वज पर ॐ, सूर्यदेव, और कोविदार वृक्ष के चित्र बने हैं. इनके पीछे गहरी धार्मिक मान्यता है.
भगवान राम सूर्यवंश में जन्मे :
ध्वज पर बने सूर्य देव भगवान राम के वंश का प्रतीक हैं. माना जाता है कि राम सूर्यवंशी थे और सूर्य देव की पूजा उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थी. कथा के अनुसार, रावण पर विजय पाने से पहले भगवान राम ने महर्षि अगस्त्य की सलाह पर सूर्य देव की आराधना की थी. इसलिए धर्म ध्वजा पर सूर्य का चिन्ह उनके वंश और परंपरा का सम्मान है.
ॐ- ईश्वर का पवित्र स्वरूप
ॐ को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और शुभ माना गया है. इसे ब्रह्मांड की ध्वनि कहा जाता है. हर पूजा और मंत्र की शुरुआत ॐ से होती है. यह मन को शांति देता है और ईश्वर से जुड़ाव का माध्यम माना जाता है. इसलिए यह चिन्ह धर्म ध्वजा में शामिल है ताकि मंदिर परिसर में सकारात्मकता और आस्था बनी रहे.
कोविदार वृक्ष- अयोध्या की पहचान
ध्वज पर बना कोविदार वृक्ष अयोध्या का प्राचीन राजचिन्ह है. रामायण में इसका उल्लेख मिलता है. कहा जाता है कि जब भरत भगवान राम को मनाने वन में पहुंचे थे, तब उनकी सेना के ध्वज पर भी इसी कोविदार वृक्ष का चिन्ह था.
देवरहा बाबा आश्रम से 550 मन लड्डू भेजा जाएगा
मिर्जापुर स्थित देवरहा बाबा आश्रम से 550 मन यानी लगभग 205 कुंतल लड्डू अयोध्या भेजे जा रहे हैं. ये सभी लड्डू शुद्ध देसी घी से तैयार किए जा रहे हैं और प्रत्येक स्टील के डब्बे में 11 लड्डू पैक किए जा रहे हैं. यह लड्डू भगवान राम को भोग लगाने के बाद भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किए जाएंगे. लड्डू बनाने में देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्त अपनी सेवा दे रहे हैं. यह अपनी भक्ति और प्रेम का अनोखा प्रतीक है.
देश-विदेश से आएंगे विशेष मेहमान
इस कार्यक्रम में फिल्म, खेल और कला जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल होने की संभावना है. बताया जा रहा है कि सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सहित कई दिग्गज इस समारोह का हिस्सा बन सकते हैं. महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 60-80 चार्टर्ड प्लेन उतर सकते हैं. सुरक्षा व्यवस्था के लिए 100 से अधिक CISF जवान तैनात किए जा रहे हैं. हर व्यवस्था को सर्वोत्तम तरीके से तैयार किया जा रहा है ताकि यह कार्यक्रम ऐतिहासिक बन सके.
