Indore Dirty Water Death : देश का सबसे स्वच्छतम शहर इंदौर आज पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी वजह एक सरकारी विभाग की घोर लापरवाही और उसके मंत्री की दादागिरी है, जिसके कारण वहां आज दर्जनों निर्दोष काल के गाल में समा गए और सैकड़ों अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। देश पूरी तरह से जब शोक में डूबा हुआ हो, तब जब एक पत्रकार ने उस विभाग के मंत्री से इस हादसे के विषय में उनके द्वारा की गई कार्यवाही के विषय में जानना चाहा, तो विभागीय मंत्री विजय वर्गीस ने जिस तरह अशिष्ट शब्दों का प्रयोग किया, वह बेहद शर्मसार करने वाला था। बाद में दबाव पड़ने के कारण उन्होंने अपने द्वारा कहे गए शब्दों के लिए माफी तो मांग ली, लेकिन उनकी इस प्रतिक्रिया से ऐसे तथाकथित राजनेताओं की मानसिकता स्पष्ट झलकती है। निश्चित रूप ने उन मृतात्माओं और उनके परिजनों को मध्यप्रदेश के मंत्री के विचार ने कितना असहज किया होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। उधर, केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कहते हैं कि नेताओं के कथन और आचरण में अंतर के कारण उनके प्रति विश्वास का संकट पैदा हो गया है, जिसे एक बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार करना होगा। रक्षामंत्री देश के जानेमाने ही नहीं, एक कद्दावर राजनीतिज्ञ हैं। उनकी यह बात शत प्रतिशत सत्य है। देश में राजनीति से ताल्लुक रखने वाले और आम जनता के लिए भी राजनीतिज्ञों द्वारा अशिष्ट भाषा के कारण उनके प्रति विश्वास का बड़ा संकट पैदा हो गया है। आज के राजनेता और राजनीतिज्ञ रक्षामंत्री की इस बात को ऐसा कहां मानते हैं! वे देश की जनता के साथ ऐसी बात करते हैं जिसकी कल्पना अपने भारतीय समाज में कोई नहीं करता। हम अपने संविधान में उल्लखित और भारतीय संस्कारों में सराबोर होने के कारण राजनीति और राजनीतिज्ञों को विशेष महत्व देते हैं।
उदाहरण के लिए यदि संक्षेप में कहा जाए तो राजनीति सामूहिक जीवन को व्यवस्थित करने तथा शक्ति और संसाधनों के बंटवारे से जुड़ी सभी गतिविधियां की प्रक्रिया का नाम है। राजनीति वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा समूह में रहने वाले लोग मिलकर निर्धारित करते हैं जिसके शक्ति का प्रयोग शासन का संचालन , कानून बनाना, सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना शामिल है और राजनीतिज्ञ वह व्यक्ति होता है, जो राजनीति और सरकार में सक्रिय रूप से शामिल होता है, जो नीति निर्माण में भाग लेता है, जनता का प्रतिनिधित्व करता और हमेशा चुनावी पद को धारण करता है। उदाहरण के लिए विधायक, सांसद या मंत्री ही देश—राज्य का कानून बनाते हैं और जनता के हितों के लिए सरकार चलाते हैं। यहां राजनीतिक और कूटनीतिक ज्ञान के लिए प्रसिद्ध चाणक्य को उदाहरण के रूप में पेश किया जा सकता है, जिन्होंने तत्कालीन मगध के नंदवंश को अपनी नीति से परास्त करके सम्राट चंद्रगुप्त को सत्ता सौंप दी थी।
देश की जनता में यह विश्वास फैला दिया गया था कि भारतीय जनता पार्टी संस्कारों वाली पार्टी है और उसे सत्ता सौंपने से देश का विकास होगा, काला धन जो विदेशों में छुपाकर रखा गया है उसे वापस लाकर देश की जनता को बांटा जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ क्या? सच तो यह दिखाई देने लगा है कि जबसे ऐसे लोगों के हाथ सत्ता आई है, उसके कुछ ऐसे व्यक्ति भी सत्ता के शीर्ष पर पहुंच गए, जो समाज के वांछित अपराधी रहे हैं। जब देश के शीर्ष पंचायत में ऐसे सदस्य बैठकर अल्पसंख्यकों के लिए अमर्यादित शब्दों/भाषा का प्रयोग करते हैं, तो सामान्य नागरिक का मन उद्वेलित हो जाता है। कहा भी जाता है कि समाज के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति जैसा आचरण करता है, तो उसकी देखा-देखी समाज तो करेगा ही। लोग आज की राजनीति में ऐसे हो गए हैं, जिनकी सोच यह है कि उनका कद उनके पद से बड़ा है, इसलिए अपने को बड़ा और जिन्होंने उन्हें उस पद तक पहुंचाया है, उन्हें छोटा समझने लगते हैं। उन्हें उनके कद का पता तो तब चलता है जब चुनाव होता है, लेकिन तब तक तो इसी तरह के अमर्यादित भाषा बोलते रहते हैं। सत्ता से हटने के बाद उन्हें उनके कद और पद का अंतर समझ में तब आता है जब उनके तथाकथित खास बगल से जानबूझकर निकल जाते हैं और उन्हें दुआ सलाम भी नहीं करते।
आज तक इंदौर के हालात जो सार्वजनिक हो रहे हैं, उसमें पेयजल में मानव मल मूत्र होने से 20(लेख लिखे जाने तक) मौतें हो चुकी हैं और उल्टी—दस्त के कारण बीमारों का अस्पतालों में भर्ती होने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। इसे अब सरकार द्वारा महामारी घोषित कर दिया गया है । इस मामले की जांच होगी और फिर किसी को निलंबित किया जाएगा, किसी को नौकरी से निकाला जाएगा, लेकिन यहां वही प्रश्न पूर्ववत खड़ा रहेगा कि आखिर इस तरह की लापरवाही हुई क्यों? क्या उन मृतकों को फिर से जीवित किया जा सकेगा? उनके परिवार के आश्रितों का क्या होगा? अभी तो ढेरों प्रश्न सामने आएंगे और देश ही नहीं दुनिया को हिलाएंगे, दहलाएंगे। अब तो इस पर राजनीति भी गर्म होगी, लेकिन क्या मध्य प्रदेश सरकार और उसके मंत्री सुरक्षित जिंदगी जीते रहेंगे? लोकसभा में विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहते हैं कि इंदौर में पानी नहीं, जहर बांटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोता रहा। उस परिवार की मनोदशा की कल्पना कीजिए जहां दस साल की मन्नत के बाद जन्मे बच्चे को दूषित पानी ने असमय लील लिया। दूषित पेयजल ने एक दो नहीं, कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल हो गया है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को सरकार की लापरवाही बताया है। उनका कहना है कि यह घटना सरकारी लापरवाही और नाकामी का जीता जागता उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने कहा था कि गंगा को साफ करेंगे। उनका कहना था कि अगर कोई आज गंगा का भी पानी पी ले, तो वह बीमार हो जाएगा और यदि कोई दिल्ली में यमुना के पानी में नहा ले, तो वह चर्मरोग का शिकार हो जाएगा। इंदौर के उस इलाके की स्थिति यह हो गई है कि डिस्चार्ज होने के बाद करीब बीस प्रतिशत लोगों को दोबारा अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ रहा है। उनके परिवार के लोगों का कहना है कि उनका पूरी तरह से ख्याल रखा जाता है, लेकिन दूषित पानी के कारण लोग फिर भी जीवन और मृत्यु के बीच जूझने लगते हैं इसलिए उन्हें अस्पताल में फिर से भर्ती कराना पड़ रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि भागीरथपुरा से जो मरीज आ रहे हैं, उनमें उल्टी—दस्त की शिकायत सामान्य मरीजों से अलग है। मरीजों को दोगुनी एंटीबायोटिक देनी पड़ रही है। डॉक्टरों को मरीजों के जीवन की रक्षा की जाए, इसका पूरा ध्यान तो वह रखेंगे ही, लेकिन जब तक अपराधियों को सलाखों के पीछे नहीं पहुंचाया जाएगा, उन मृतात्माओं की आत्मा को शांति कैसे मिलेगी? सजा तो उन अपराधियों को कठोर से कठोर मिलनी ही चाहिए, ताकि भविष्य में कोई इस तरह के अपराध या लापरवाही करने का साहस न कर सके। वैसे मामले की भयावहता को देखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बेहद गंभीरता से लिया है और जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी टिप्पणी की है ।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)
