Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने सिर्फ परेड नहीं दिखाई, बल्कि यह साफ संदेश दिया कि देश तकनीक, ताकत और आत्मनिर्भरता के मामले में कितनी दूर आ चुका है। कर्तव्य पथ पर जो नजारा दिखा, उसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
शहीदों को नमन से शुरुआत
गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर की। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख और CDS जनरल अनिल चौहान मौजूद रहे। यह पल याद दिलाने वाला था कि आजादी और गणतंत्र की कीमत क्या होती है।

जब टैंकों ने दिखाई भारत की असली ताकत
परेड में सबसे आगे नजर आया T-90 भीष्म टैंक, जिसने अपनी ताकत से सबका ध्यान खींच लिया। यह टैंक दूर से दुश्मन को पहचान कर उस पर सटीक वार कर सकता है। इसकी मारक क्षमता कई किलोमीटर तक है और यह कठिन पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से चलता है। इसके साथ ही अर्जुन मार्क-1 टैंक ने भी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। यह पूरी तरह भारत में बना टैंक है, जो दिखाता है कि देश अब रक्षा क्षेत्र में किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
पैदल सेना की ताकत भी दिखी
BMP-II लड़ाकू वाहन ने यह साबित किया कि भारतीय सेना हर हाल में लड़ने के लिए तैयार है। यह वाहन रात में भी दुश्मन को निशाना बना सकता है और रेगिस्तान से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक हर जगह काम करता है। इसमें ड्रोन और आधुनिक हथियार लगे हैं, जो सेना को रियल-टाइम जानकारी देते हैं। कर्तव्य पथ पर जब स्पेशल फोर्सेस आगे बढ़ीं, तो हर कोई रोमांचित हो गया। ये वो जवान हैं जो दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर मिशन पूरा करते हैं। चाहे पैराशूट से उतरना हो या हेलीकॉप्टर से, ये हर हालात में लड़ने को तैयार रहते हैं।

ड्रोन, रोबोट और भविष्य की जंग
इस बार परेड में रोबोटिक डॉग्स, बिना चालक वाले वाहन और आधुनिक ड्रोन भी दिखे। ये तकनीकें घायल सैनिकों को निकालने, निगरानी रखने और दुश्मन पर दूर से हमला करने में मदद करती हैं। यह साफ संकेत है कि भारत अब भविष्य की जंग के लिए पूरी तरह तैयार है। MI-17 हेलीकॉप्टरों ने आसमान से फूलों की बारिश की। इसके साथ ही तिरंगे और तीनों सेनाओं के झंडों के साथ बनी ध्वज फॉर्मेशन ने पूरे माहौल को देशभक्ति से भर दिया।
इतिहास रचने वाले को मिला अशोक चक्र
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। वे अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय बने और देश का नाम अंतरिक्ष में रोशन किया। यह पल हर भारतीय के लिए गर्व का था।