Budget 2026 : लोकलुभावन से आगे, लॉन्ग टर्म विज़न की ओर बढ़ता भारत

Madhukar Srivastava
  • तात्कालिक लाभ नहीं, मजबूत भविष्य की नींव
  • राजनीति से नहीं, ज़रूरतों से लिखा गया बजट
  • शॉर्ट टर्म पॉलिटिक्स से लॉन्ग टर्म पॉलिसी की ओर कदम
  • चुनावी बजट नहीं, देश बनाने वाला बजट

Budget 2026 : भारत का आम बजट 2026-27 कई मायनों में ऐतिहासिक है। सिर्फ इसलिए नहीं कि इसे पहली बार 1 फरवरी को रविवार के दिन पेश किया गया, बल्कि इसलिए कि यह बजट उस सोच का प्रतिनिधित्व करता है जो भारत को तात्कालिक लाभ से निकालकर दीर्घकालिक स्थिरता और वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाती है।

पहले बजट 28 फरवरी को पेश होते थे और प्रभावी रूप से अप्रैल से लागू माने जाते थे। इसका नुकसान यह होता था कि वित्तीय वर्ष के शुरुआती दो-तीन महीने व्यर्थ चले जाते थे। मानसून के आगमन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और टेंडर सिस्टम के कारण बजट का वास्तविक क्रियान्वयन देर से शुरू होता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस परंपरा को बदला गया और बजट को फरवरी की शुरुआत में लाया गया ताकि पूरा वित्तीय वर्ष योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए उपलब्ध हो सके। यह बदलाव अपने आप में शासन की व्यावहारिक सोच को दर्शाता है।

अब सवाल उठता है — बजट कैसा है?

इसका जवाब सामान्य राजनीतिक बहस से अलग है। सत्ता पक्ष इसे अच्छा बताएगा, विपक्ष आलोचना करेगा — यह स्वाभाविक है। लेकिन यदि शोर से हटकर तथ्यों और दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि यह बजट पहले जैसे नहीं है। यह न तो बड़े टैक्स गिफ्ट देता है, न ही लोकसभा या विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर लोकलुभावन घोषणाओं की बारिश करता है।

यह बजट उस सोच से बाहर निकलता दिखता है जिसमें “सबको कुछ देने” की मजबूरी होती है। पहली बार सरकार ने स्वीकार किया है कि संसाधन सीमित हैं और प्राथमिकता तय करना ज़रूरी है। यही कारण है कि यह बजट रियलिस्टिक है, भावनात्मक नहीं।

वैश्विक परिदृश्य को देखें तो दुनिया आज आर्थिक अस्थिरता, युद्ध, सप्लाई चेन डिसरप्शन, महंगाई और मंदी के खतरे से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत ने फिजिकल डिसिप्लिन का रास्ता चुना है। यह बजट अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने, महंगाई को नियंत्रित रखने और सतत विकास सुनिश्चित करने की कोशिश करता है।
इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता है — राजनीति और बजट को अलग रखने का प्रयास। शायद पहली बार ऐसा महसूस होता है कि बजट भाषण में नारे कम हैं और नीति ज्यादा है। घोषणाएं वोट के लिए नहीं, विकास के लिए हैं।

सरकार का फोकस साफ है — इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और निवेश।

सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, 20 नए हाईवे, रियल इकोनॉमिक कॉरिडोर, और बड़े पैमाने पर कैपिटल एक्सपेंडिचर यह दर्शाता है कि सरकार देश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहती है। बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा अर्थ है — तेज व्यापार, कम लॉजिस्टिक लागत, नए उद्योग और बड़े पैमाने पर रोजगार।

एमएसएमई सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि यही सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। एमएसएमई में निवेश का मतलब है — छोटे शहरों और कस्बों में रोजगार, माइग्रेशन में कमी और लोकल इकॉनमी को मजबूती।

शहरों के संतुलित विकास के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड और 50 शहरों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सुविधाओं से लैस करने की योजना इस बात का संकेत है कि अब विकास सिर्फ मेट्रो सिटीज़ तक सीमित नहीं रहेगा। छोटे और मझोले शहर भी विकास की धुरी बनेंगे।

यह बजट क्वालिटी के साथ विकास की बात करता है। केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि ऐसी सड़क जो ग्लोबल स्टैंडर्ड की हो। केवल फैक्ट्री खोलना नहीं, बल्कि ऐसा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम जो विदेशी निवेशकों को आकर्षित करे।

भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में यह बजट एक मजबूत कदम है। इतिहास गवाह है कि जिस देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ती है, वहां रोजगार बढ़ता है। रोजगार बढ़ता है तो आम आदमी की जेब में पैसा आता है। और जब आम आदमी मजबूत होता है, तो देश की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता भी मजबूत होती है।

इस बजट की सबसे दूरदर्शी और रणनीतिक घोषणा है — डेटा सेंटर पॉलिसी।

2047 तक टैक्स फ्री डेटा सेंटर, लेकिन शर्त साफ है —

  • डेटा सेंटर भारत में रहेगा
  • इंफ्रास्ट्रक्चर भारत में बनेगा
  • काम भारतीय कंपनियों को मिलेगा

यह सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम है। आने वाला समय डेटा का है और जिसने डेटा को नियंत्रित किया, वही दुनिया को दिशा देगा। इस एक फैसले में भारत के भविष्य की सुरक्षा, रोजगार और तकनीकी नेतृत्व छिपा हुआ है।

यह बजट तत्काल राहत नहीं देता, बल्कि स्थायी मजबूती देता है। इसका असर आज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में दिखेगा। यह वही बजट है जिसका मूल्यांकन इतिहास करेगा, न कि हेडलाइंस।

अगर इन फैसलों पर ईमानदारी और क्षमता के साथ काम हुआ, तो यह बजट भारत को 2047 तक एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक शक्ति बनाने की नींव साबित होगा।

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