* क्या एक रोबोटिक डॉग पूरे भारत की तकनीकी क्षमता को तय करेगा?
* एक स्टॉल की गलती से भारत की वैज्ञानिक ताकत कम नहीं होती।
* जब देश 644 नई टेक्नोलॉजी दिखा रहा हो, तब एक विवाद पर अटकना दूरदृष्टि नहीं, विचलन है।
कुमार पद्मनाभ
Galgotias : गलगोटिया प्रकरण में आप सभी लोगों का प्रतिक्रिया मैं पढ़ा। अधिकतम प्रतिक्रिया देखकर यही लगता है कि कौवा कान लेकर भाग गया है। या एक और प्रिंस गड्ढे में गिर गया और मीडिया २४ x ७ लगा पड़ा है भाई आपलोग इस प्रकरण को इतना अहमियत क्यों दे रहे हैं?
1. गलगोटिया क्या है? क्या भारत के प्रसिद्द तकनीकी संसथान है ? जी नही, किसी भी रूप में यह भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करता। लगता है क्रिकेट का विश्वकप में बाल ब्याय को देखकर आप भारतीय क्रिकेट टीम का मजाक बना रहे है।
2. क्या गलगोटिया का अस्तित्व भारत में होना चाहिए ? भारत में सॉफ्टवेयर एवं कंप्यूटर से जुड़े १ करोड़ प्रोफेशनल है। इसका ९०% तक भारत के गलगोटिया जैसे कालेज के पढ़े हुए है। १९९६ तक यूपी में मात्र १०५६ सीट था इंजीनियरिंग का. ध्यान दीजिए कि यूपी पाकिस्तान से बड़ा है और इतने बड़े देश में सिर्फ एक हजार इंजिनियर प्रति वर्ष पैदा हो रहे थे। बिहार में मात्र ४०० . गलगोटिया जैसे संस्थान की वजह से यह एक करोड़ सॉफ्टवेयर इंजिनियर पिछले २५ वर्ष में पैदा हुए। अब भारत का कोई भी व्यक्ति इंजिनियर बनाने का सपना देख सकता है . गलगोटिया जैसे संस्थान ने करोड़ों लोगों को अवसर प्रदान किया।
3. क्या प्राइवेट कालेज की वजह से ऐसा हुआ ? अरे कम से कम गलगोटिया ने चीन से आयात करके उसके सॉफ्टवेयर में फेर बदलकर कुछ तो भविष्य के बारे में सोचा? बिहार यूपी के गोरखपुर इंजीनियरिंग कालेज, मुजफ्फर पुर इंजीनियरिंग कालेज कहाँ है ? यकीन मानिए ये सब सो रहे है। गलगोटिया जगा हुआ है ध्यान दीजिए।
4. गलगोटिया जैसा किसी और कालेज का नडेला विश्व के सबसे प्रसिद्द सॉफ्टवेयर कंपनी का सीईओ है। यदि गलगोटिया नहीं होता तो नडेला पैदा नहीं होत।
5. आपका यह प्रश्न भी उचित है कि चीन अपने अनुसंधान पर इतना खर्च करता है भारत क्यों नही। भाई भारत में अभी भी भूख पर काबू करना है। सरकार पहले भूखे को खिलाए अथवा रोबोटिक कुत्ता विकसित करे? ध्यान दीजिए कि जब हम मंगल पर पहुँच सकते हैं तो क्या कुत्ता नहीं बना सकते सवाल प्राथमिकता का है ।
6. क्या आपको पता है कि २०१२ की अपेक्षा २०२५ में सरकार अनुसंधान पर १० गुना ज्यादा खर्च कर रही है। हमारा अनुसंधान बजट पाकिस्तान के डिफेन्स बजट से भी ज्यादा है। फिर भी हम चीन अमेरका के आसपास नहीं है। क्योंकि चीन और अमेरिका हमसे इतना ज्यादा अमीर है कि हम तुलना ही नहीं कर सकते।
गलगोटिया का प्रकरण वैसे ही है जैसे प्रिंस बोरिंग वाले गड्ढे में गिर गया था, या रानू मंडल बॉलीवुड में पहुँच गयी, बनजारन मोना लिसा हीरोइन बन गयी. ठीक है भाई रानू मंडल अच्छा गाती है , लेकिन वह भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करती, वह लता मंगेशकर नहीं है.
ध्यान दीजिए – इसमें ६४४ नई टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन हो रहा है। विश्व के ४१ सीईओ हिस्सा ले रहे है। तीन लाख बुद्धिजीवी इसको विजिट कर रहे है। ३७ देश के ३२६ एग्जिवीटर अपने तकनीक का प्रदर्शन कर रहे है और भारत से कोलैबोरेट करने के लिए तैयार है। भारत का अपना एल एल एम (चैट जीपीटी ) प्रदर्शित हो रहा है। इस बीच गलगोटिया को लेकर आपका प्रतिक्रिया उचित है?
दुश्मन होने के नाते भाई चीन और पाकिस्तान का तो बनाता है, थोड़ी देर के लिए माने तो कांग्रेस का भी बनता है विरोध करने का लेकिन आप और हम ?
