Sarhul : सरहुल महापर्व: प्रकृति संग संस्कृति का महाउत्सव

Sushmita Mukherjee

मुख्यमंत्री Hemant Soren ने पत्नी Kalpana Soren संग रांची के सरना स्थल पर की पूजा, मांदर की थाप पर झूमी परंपरा

Sarhul : राज्यभर में प्रकृति पर्व सरहुल की धूम है. यह पर्व जनजाति समाज में प्रकृति के प्रति समर्पण को दर्शाता है. इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पत्नी विधायक कल्पना सोरेन और पुत्र के साथ राजधानी रांची के आदिवासी हॉस्टल और सिरमटोली केंद्रीय सरना समिति प्रांगण पहुंच कर पूजा-अर्चना की.इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पारंपरिक परिधान में नजर आए.

वहीं आदिवासी हॉस्टल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और अन्य गणमान्य लोगों के साथ मांदर की थाप पर थिरकते नजर आए. इस मौके पर कल्पना सोरेन ने सरहुल की बधाई देते हुए कहा कि जिस तरह से आज लाल और सफेद रंग से चारों तरफ सजावट की गई है इसी तरह से आपके जीवन में भी यह रंग भरा रहे और आपके भविष्य का निर्माण हो, क्योंकि हमारे भविष्य की आंख आप हैं.

सीएम हेमंत सोरेन ने दी सरहुल की शुभकामनाएं

इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यवासियों को सरहुल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिस तरह से हमारे पूर्वजों ने इस परंपरा को हमारे कंधे पर दिया है उसे हम निभाते हुए अपनी पीढ़ी को आगे देंगे. उन्होंने कहा कि प्रकृति पूजा से बढ़कर और कोई पूजा नहीं हो सकती है, क्योंकि इसी प्रकृति से सभी चीजों का सृजन होता है और इसी में सभी का विलय होता है. इससे बड़ा ताकतवर और इससे बड़ा दयालु कुछ भी नहीं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि प्रकृति यदि नहीं रहती तो मनुष्य भी नहीं रहता या मानव जीवन भी नहीं रहता, ना ही यहां कोई जीव-जंतु रहते, ना प्रकृति रहती ना ही हम प्यार-मोहब्बत करते और कोई लड़ाई-झगड़ा करते या सभी चीज प्रकृति के द्वारा रचाई-बसाई गई है. इस व्यवस्था के प्रति जो आदिवासी समूह की आस्था है और जिस तरीके से छोटे-बड़े गली-मोहल्ले और घरों में इस दिन का स्वागत होता है और मनाया जाता है निश्चित रूप से इस दुनिया के लिए यह बहुत बड़ा संदेश है.

आदिवासी हॉस्टल के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सिरमटोली स्थित केंद्रीय सरना समिति प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव हमारे मानव जीवन और प्रत्येक जीव-जंतु चाहे जितने भी जीव हो इसके लिए ऐसी व्यवस्था है, जहां से हम अपनी यात्रा शुरू करते हैं और वहीं खत्म करते हैं. आज उसके उपासक के रूप में हमारा संकल्प लेने का दिन है जो हमेशा इससे जुड़े रहें.

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