India Defense : मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप ने दुनिया की सेनाओं को नई रणनीति अपनाने पर मजबूर कर दिया है। ड्रोन अब युद्ध का सबसे निर्णायक हथियार बन चुके हैं और इसी बदलती हकीकत को देखते हुए भारतीय सेना ने भी अपनी सैन्य तैयारी में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है।
यूक्रेन-रूस युद्ध से लेकर ईरान द्वारा मिडिल ईस्ट में ड्रोन हमलों तक मिले अनुभवों ने साफ कर दिया है कि भविष्य का युद्ध तकनीक आधारित होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमता को तेजी से मजबूत करने का फैसला किया है।
पाकिस्तान सीमा पर ‘अश्नि’ ड्रोन प्लाटून की तैनाती
सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने पाकिस्तान से सटी सीमा पर ‘अश्नि’ ड्रोन प्लाटून की तैनाती शुरू कर दी है। अगले तीन महीनों में कश्मीर से गुजरात तक लगभग 3323 किलोमीटर लंबी सीमा पर इन विशेष ड्रोन यूनिटों की तैनाती पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
अश्नि प्लाटून को अत्याधुनिक ड्रोन, निगरानी सिस्टम, जासूसी तकनीक और एंटी-ड्रोन हथियारों से लैस किया जा रहा है। हर इंफेंट्री बटालियन में 25 से 30 प्रशिक्षित जवानों की यह यूनिट शामिल होगी, जो निगरानी, लक्ष्य पहचान और सटीक हमले करने में सक्षम होगी।
ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव से बदली रणनीति
रक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन की मिसाइलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया, लेकिन ड्रोन खतरे से निपटने के लिए अतिरिक्त तैयारी की जरूरत महसूस हुई।
इसी अनुभव के आधार पर पहले ‘भैरव फोर्स’ का गठन किया गया और अब सेना बड़े स्तर पर ड्रोन वॉरफेयर यूनिट्स विकसित कर रही है। सरकार ने इस योजना को पहले ही हरी झंडी दे दी थी, लेकिन ईरान-इजरायल तनाव के बाद इसकी गति और तेज कर दी गई है।
चीन सीमा पर भी बढ़ेगी ड्रोन ताकत
पहले चरण में पाकिस्तान सीमा पर तैनाती के बाद दूसरे चरण में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भी अश्नि प्लाटून को तैनात किया जाएगा। तीसरे चरण में देशभर की इंफेंट्री बटालियनों को ड्रोन क्षमताओं से लैस करने की योजना है।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन बने गेम-चेंजर
आज का युद्ध केवल टैंक और मिसाइलों तक सीमित नहीं रहा। रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संघर्ष और हालिया सैन्य अभियानों ने साबित किया है कि ड्रोन निगरानी, सटीक हमला और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।
भारतीय सेना ने भी अपने जवानों को ‘ड्रोन वॉरियर’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार सेना का बेसिक ड्रोन प्रशिक्षण चरण पूरा हो चुका है और अब हर इंफेंट्री सैनिक को ड्रोन संचालन की बुनियादी ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
भविष्य की लड़ाई के लिए तैयार भारत
ड्रोन वॉरफेयर पर बढ़ता फोकस साफ संकेत देता है कि भारत अब पारंपरिक युद्ध रणनीति से आगे बढ़कर तकनीक आधारित युद्ध क्षमता विकसित कर रहा है। अश्नि ड्रोन प्लाटून की तैनाती से न केवल सीमाओं की निगरानी मजबूत होगी, बल्कि चीन और पाकिस्तान के लिए नई सामरिक चुनौती भी खड़ी होगी।
नई रणनीति साफ है — भविष्य का युद्ध आसमान से लड़ा जाएगा, और भारत अब उसके लिए पूरी तरह तैयार है।
