Global Economic Crisis : अमेरिका की आक्रामक नीतियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक रणनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने जल्दी से महान बनने की चाहत और
शक्ति प्रदर्शन की जल्दबाज़ी ने दुनिया को संभावित आर्थिक संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य पर हमले की आशंका ने वैश्विक समुद्री व्यापार को असुरक्षित बना दिया है। यह वही मार्ग है जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस सप्लाई प्राप्त करता है। ऐसे में अरबों डॉलर के माल से लदे जहाजों के लिए समुद्री रास्तों पर निकलना बेहद जोखिम भरा हो गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि जहाजों की आवाजाही बाधित रहती है तो तेल, गैस, उर्वरक और धातु उद्योगों की सप्लाई चेन गंभीर रूप से प्रभावित होगी। भले ही समुद्री मार्ग फिर खुल जाएँ, लेकिन ऊर्जा संयंत्रों और औद्योगिक ढाँचों को हुए नुकसान की भरपाई में वर्षों लग सकते हैं।
आर्थिक आकलनों के अनुसार, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर जारी रहा तो सिर्फ एक तिमाही में ही विश्व अर्थव्यवस्था को लगभग दो लाख करोड़ डॉलर तक का नुकसान झेलना पड़ सकता है। महंगाई, ईंधन संकट और उत्पादन गिरावट का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञ यह भी तर्क दे रहे हैं कि विश्व अर्थव्यवस्था को एक तिमाही में ही दो लाख करोड़ डॉलर का नुकसान होने का भय है। जिस तरह ट्रंप पूरी दुनिया से अपने व्यापार घाटे का और सुरक्षा कवच देने का मुआवज़ा माँगते रहते हैं वैसे ही अब दुनिया को एकजुट होकर अमरीका से अपने नुक़सान का हरजाना माँगना चाहिए!
