* साहिबगंज केस में 5.39 करोड़ की संदिग्ध संपत्ति जब्त करने की तैयारी, कंपनी भी जांच के घेरे में
Jharkhand : झारखंड के साहिबगंज में अवैध पत्थर खनन और बिना चालान खनिज परिवहन के बहुचर्चित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जांच को निर्णायक मोड़ दे दिया है। रांची स्थित ईडी जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल कर दी है।
5.39 करोड़ की अवैध कमाई पर ईडी की नजर
ईडी ने अपनी शिकायत में सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, उसके निदेशकों और सहयोगी कंपनियों को आरोपी बनाया है। एजेंसी का दावा है कि अवैध खनन और परिवहन से करीब 5.39 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित संपत्ति बनाई गई, जिसे अब जब्त करने की मांग कोर्ट से की गई है।
सीबीआई एफआईआर से खुला पूरा नेटवर्क
इस मामले की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की एफआईआर से हुई थी, जो बिहार के भागलपुर स्थित पीरपैंती रेलवे साइडिंग से जुड़े अनियमित खनिज परिवहन को लेकर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान बिहार और झारखंड की तीन अन्य एफआईआर भी जोड़ी गईं, जिससे अवैध खनन का व्यापक नेटवर्क सामने आया।
ईडी जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2015 से साहिबगंज जिले के मौजा जोकमारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पत्थर खनन किया गया और बिना वैध चालान के खनिज रेलवे के माध्यम से बाहर भेजे जाते रहे।
251 रेलवे रेक भेजकर सरकार को करोड़ों का नुकसान
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने अनिवार्य JIMMS चालान के बिना 251 रेलवे रेक के जरिए पत्थर सामग्री की ढुलाई की। इससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
* लगभग 11.29 करोड़ रुपये के स्टोन चिप्स की रॉयल्टी चोरी
* करीब 5.94 करोड़ रुपये के बोल्डर पर भी रॉयल्टी नहीं दी गई
ईडी का आरोप है कि इस पूरे अवैध कारोबार को चलाने के लिए रेलवे अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मियों को रिश्वत भी दी गई।
फर्जी कंपनियों के जरिए ‘काले धन’ को सफेद बनाने की कोशिश
जांच में सामने आया कि अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए फर्जी कंपनियों और नकली इनवॉइस का इस्तेमाल किया गया। डीएस बिटुमिक्स और करण इंटरनेशनल जैसी गैर-मौजूद फर्मों के नाम पर करीब 4.87 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया, ताकि रकम को साफ निवेश के रूप में दिखाया जा सके।
2024 की छापेमारी बनी अहम सबूत
ईडी ने 24 अक्टूबर 2024 को सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साहिबगंज कार्यालय पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड बरामद किए गए।
बाद में पीएमएलए की निर्णायक प्राधिकरण ने 4 अप्रैल 2025 को जब्त सामग्री को एजेंसी की कस्टडी में रखने की मंजूरी भी दे दी।
कई अधिकारियों और गवाहों से पूछताछ
जांच के तहत कंपनी निदेशकों, रेलवे अधिकारियों और साहिबगंज के जिला खनन पदाधिकारी समेत कई अहम व्यक्तियों के बयान पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज किए जा चुके हैं।
अब नजर अदालत के फैसले पर है, क्योंकि ईडी अवैध खनन से जुड़े इस कथित आर्थिक नेटवर्क पर अंतिम कानूनी कार्रवाई की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
