* बेटे की जान के लिए उजाड़ दी बेटी की दुनिया”
Hazaribagh : रिश्तों को शर्मसार और मानवता को झकझोर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने आधुनिक समाज के दावों पर कालिख पोत दी है। हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में एक मां, जिसे बच्चों का सबसे सुरक्षित आश्रय माना जाता है, वही अपनी 13 वर्षीय मासूम बेटी की काल बन गई। अंधविश्वास के गहरे दलदल में फंसी एक मां ने अपने बेटे की सलामती की ‘मन्नत’ पूरी करने के लिए अपनी ही कोख से जन्मी बेटी को मौत के घाट उतार दिया।
साजिश: जब ममता पर भारी पड़ा ‘तंत्र-मंत्र’
मामले का खुलासा करते हुए हजारीबाग एसपी ने बताया कि यह कोई सामान्य हत्या नहीं, बल्कि एक सोची-समझी ‘नरबलि’ थी। आरोपी मां रेशमी देवी अपने बेटे सुधीर की शारीरिक और मानसिक बीमारी को लेकर लंबे समय से परेशान थी। इस परेशानी का फायदा उठाया गाँव की एक कथित तांत्रिक (भगतिनी) शांति देवी ने।
भगतिनी ने मां के दिमाग में यह जहर भर दिया कि यदि वह अपने बेटे को ठीक करना चाहती है, तो उसे किसी ‘कुंवारी कन्या’ की बलि देनी होगी। एक मां का दिल इस खौफनाक सुझाव पर कांपने के बजाय तैयार हो गया और उसने अपनी ही छोटी बेटी को इस खूनी खेल के लिए चुन लिया।
मंगला जुलूस की वह काली रात
24 मार्च की रात, जब पूरा इलाका भक्ति में डूबा था और ‘मंगला जुलूस’ की रौनक थी, तब रेशमी देवी अपनी बेटी को बहला-फूसला कर मौत के मुहाने पर ले गई।
* नक्षत्रों का खेल: तांत्रिक ने ‘शुभ नक्षत्र’ का इंतजार किया। रात करीब 9:30 बजे, मां रेशमी देवी और सहयोगी भीम राम बच्ची को लेकर मंदिर पहुंचे।
* अंतिम श्रृंगार: मासूम को क्या पता था कि उसकी अपनी मां उसे जो सिंदूर और काजल लगा रही है, वह उसकी विदाई का तिलक है। उसे इलायची दाना खिलाकर पूजा पर बैठाया गया।
रोंगटे खड़े कर देने वाली निर्ममता
पुलिसिया तफ्तीश में जो हकीकत सामने आई, वह रूह कंपा देने वाली है। बांस की झाड़ियों के पास ले जाकर बच्ची को जमीन पर लेटाया गया।
1. मां ने थामे पैर: जब सहयोगी भीम राम बच्ची का गला घोंट रहा था और मासूम अपनी आखिरी सांसों के लिए छटपटा रही थी, तब सगी मां ने अपनी बेटी के पैर कसकर पकड़ रखे थे ताकि वह हिल न सके।
2. वहशीपन की पराकाष्ठा: हत्या को बलात्कार का रूप देने और तंत्र-मंत्र की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मृत प्राय बच्ची के साथ अमानवीय कृत्य किए गए।
3. खून से अभिषेक: तांत्रिक के कहने पर पत्थर से बच्ची के सिर पर वार किया गया। बहते हुए गर्म खून को अंजुली में भरकर मंदिर के पूजा स्थल पर छिड़का गया।
न्याय की पुकार और जनाक्रोश
इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे झारखंड में उबाल है। 30 मार्च को हजारीबाग बंद का व्यापक असर दिखा और भाजपा सहित कई संगठनों ने 3 मार्च को झारखंड बंद का आह्वान कर दोषियों को फांसी देने की मांग की है। झारखंड हाईकोर्ट ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।
पुलिस की कार्रवाई: आईपीएस नागरगोजे शुभम भाउसाहेब के नेतृत्व में गठित SIT ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस गुत्थी को सुलझाया। पुलिस ने हत्यारी मां रेशमी देवी, तांत्रिक शांति देवी और सहयोगी भीम राम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
एक सवाल जो अनुत्तरित है…
आज के दौर में जब हम चांद पर पहुँचने की बात करते हैं, तब हजारीबाग की यह घटना हमें आईना दिखाती है। एक भाई की लंबी उम्र के लिए बहन का लहू बहाने वाली यह मानसिकता समाज के लिए एक बड़ा कलंक है। कानून अपना काम करेगा, लेकिन क्या समाज उन ‘अंधविश्वासों’ से कभी मुक्त हो पाएगा जो मां को अपनी ही संतान का कसाई बना देते हैं?
