Hemant Soren : सीएम हेमंत सोरेन का हिमंता बिस्वा शर्मा पर तीखा हमला.. ‘गुनाहगार कभी गुनाह थोड़े स्वीकार करता है’

Sushmita Mukherjee
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* असम चुनाव 2026 में ‘बदला’ की सियासत का नया अध्याय

Hemant Soren : असम विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार का शोर थमते ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा पर सीधा निशाना साध दिया। असम से रांची लौटते वक्त हेमंत ने कहा, “गुनाहगार कभी गुनाह थोड़े स्वीकार करता है।” यह बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि असम की सियासत में ‘बदला’ की आग को और भड़काने वाला है।

क्या था पूरा मामला?

असम चुनाव के आखिरी प्रचार दिवस (7 अप्रैल) पर हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन 10 दिनों के लंबे कैंपेन के बाद असम से लौटे। जेएमएम ने असम की 126 सीटों में से 18 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं – खासतौर पर चाय बागान क्षेत्रों और आदिवासी बेल्ट में। हेमंत ने इन सीटों पर जमकर रैलियां कीं, आदिवासियों के हक, एसटी स्टेटस और न्यूनतम मजदूरी जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना भी की और सोशल मीडिया पर लिखा – “असम की वीर और क्रांतिकारी भूमि के मेरे भाइयों-बहनों से मिला स्नेह हमारी ताकत है।”


लेकिन प्रचार के दौरान कुछ विवाद भी हुए। हेमंत और कल्पना की कुछ रैलियों की अनुमति नहीं मिली, हेलीकॉप्टर लैंडिंग में दिक्कत आई – जिसे जेएमएम ने ‘हिमंता का डर’ बताया।

तीन पासपोर्ट’ विवाद – हमले का असली ट्रिगर

बयान का सीधा संदर्भ हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिंकी भुईयां शर्मा (रिनिकी भुइयां) से जुड़ा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रिंकी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं…
UAE (जारी: 14 मार्च 2022, वैध: 13 मार्च 2027)
एंटीगुआ-बारबुडा (जारी: 26 अगस्त 2021)
मिस्र (इजिप्ट) (जारी: 13 फरवरी 2022)
इसके अलावा उनकी कंपनी ‘प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट’ पर सरकारी सब्सिडी (PM Kisan Sampada Yojana) के 10 करोड़ रुपये के कथित दुरुपयोग का भी मामला उठाया गया।

जब हेमंत से इस पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने संक्षिप्त लेकिन तीखा जवाब दिया… “गुनाहगार कभी गुनाह थोड़े स्वीकार करता है। ये जांच का विषय है।” उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा, “वोट में चोरी करो, वोट में डाका डालो… हमारा पैरामीटर जनता के हाथ में है।”

क्यों महत्वपूर्ण है यह हमला?

1.बदला की सियासत: 2024 के झारखंड चुनाव में हिमंता बिस्वा शर्मा तीन महीने तक झारखंड में डेरा जमाए रहे थे। अब हेमंत उसी ‘रास्ते’ पर चलकर असम में जेएमएम को मजबूत कर रहे हैं। यह स्पष्ट ‘टाइट-फॉर-टैट’ है।
2.राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा: जेएमएम पहली बार किसी दूसरे राज्य में इतनी बड़ी संख्या में सीटें लड़ रहा है। अगर 8-10 सीटें मिल गईं तो JMM असम में ‘किंगमेकर’ बन सकता है। हेमंत खुद को पूर्वोत्तर के आदिवासी चेहरे के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
3.जनता vs पावर: हेमंत ने बार-बार कहा – “ग्राउंड रियलिटी बताएगी।” उनका फोकस आदिवासी-चाय मजदूर वोट बैंक पर है, जबकि हिमंता की बीजेपी विकास और हिंदुत्व कार्ड खेल रही है।

दोनों तरफ की तस्वीर

जेएमएम का दावा: हेमंत-कल्पना ने ‘शोषित-वंचित’ समाज को जोड़ा, तीर-धनुष प्रतीक के साथ हक दिलाने का संकल्प लिया।

बीजेपी का पक्ष: पासपोर्ट विवाद को ‘फर्जी’ और ‘मालिशियस’ बताया गया। हिमंता खेमे ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी।

असम चुनाव 2026 में यह जुबानी जंग अब और तेज होने वाली है। हेमंत सोरेन का यह ‘जाते-जाते’ हमला सिर्फ एक बयान नहीं – यह पूर्वोत्तर की सियासत में नई रणनीति का संकेत है। जनता का फैसला क्या होगा, यह 2026 के नतीजों में साफ हो जाएगा।

जेएमएम का संदेश स्पष्ट है…”असम की मिट्टी पर भी हमारा हक है।”
और हिमंता का जवाब? – इंतजार कीजिए, सियासी मैदान अभी गर्म है!

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