रेहान अहमद
Heinrich Klaasen : गांव देहात में जितने भी कच्चे मकान पक्के होते थे,तो ज्यादातर में सारे भाई मिलकर हाथ लगाते थें। जिससे जितना बन पड़ता था, देते थे। पर जो जितना ज्यादा दे, उसका उतना मान होता था। पर ऐसे परिवारों में कुछ भाई ऐसे होते थे, जिनकी कमाई कम होती थी, वो किसी काम में कोई बड़ी रकम नहीं देते थे,पर उन भाइयों की खासियत होती थी,कंसिस्टेंसी, थोड़ा थोड़ा कमाते थे,पर पूरी ताकत पूरी जान लगाकर।ऐसे भाइयों का उतना नाम नहीं होता था,न उतना शोर मचता था,पर नए घर की हर दीवार में थोड़ा ही सही, उनका भी खून पसीना शामिल रहता था।
हेनरिक क्लासेन हैदराबाद के लिए उसी कम लेकिन लगातार कमाने देने वाले भाई की तरह है,जिसके कारनामे शोर नहीं मचाते,जिसने IPL का सबसे तेज शतक नहीं मारा है, जिसमें इस IPL में सबसे ज्यादा छक्के,सबसे ज्यादा,सबसे तेज रन नहीं बनाए है, शायद season के end में भाई के पास orange cap भी न रहे,शायद दस बीस साल बाद उसके आंकड़े देखकर,भाई के कंट्रीब्यूशन का weight न समझ आए,पर आज हैदराबाद की इस टूर्नामेंट में कोई हैसियत है, तो उसकी वजह अभिषेक हेड या किशन नहीं,क्लासेन है।
और क्लासेन भाई जैसे प्लेयर,भाई, जिस टीम जिस घर में होंगे,वो घर धीरे धीरे ही सही,पर अपनी शक्ल अपना मुकाम हासिल कर ही लेता है। इसलिए अगर आप अपने घर अपनी टीम के लिए कोई बड़ा या significant contribution नहीं कर पा रहे है तो खुद को कोसिए मत, छोटा कंट्रीब्यूशन हो,पर अगर कंसिस्टेंट हो,तो बहुत crucial बहुत important होता है,कोई नहीं समझ रहा इस बात को तो उसकी बेवकूफी,पर आप खुद के साथ तो जुल्म न ही करे। जितना आप कर रहे है, जितना आपने किया है, वो बहुत मायने रखता है, आप बहुत मायने रखते है