* ऐतिहासिक फैसला: अब ‘वंदे मातरम’ का अपमान पड़ेगा भारी, राष्ट्रगान के बराबर मिला दर्जा
Vande Mataram : राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने वाले अमर गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार ने एक युगांतकारी निर्णय लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ (Prevention of Insults to National Honour Act) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब ‘वंदे मातरम’ को वही संवैधानिक गरिमा और सुरक्षा प्राप्त होगी, जो अब तक केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हासिल थी।
अपमान किया तो खानी होगी जेल की हवा
इस नए संशोधन के तहत अधिनियम की धारा-3 में बड़ा बदलाव किया गया है। अब ‘वंदे मातरम’ के अपमान या इसके गायन में किसी भी तरह का व्यवधान डालना एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।
* सजा का प्रावधान: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर इस राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है या इसका अपमान करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल, भारी जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
150वीं वर्षगांठ पर राष्ट्र का बड़ा सम्मान
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश ‘वंदे मातरम’ की रचना की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों के भीतर क्रांति की मशाल जलाई थी। सरकार के इस कदम को उसी विरासत को सहेजने और उसे उचित सम्मान देने की दिशा में एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।
“तुष्टीकरण की राजनीति के कारण लंबे समय तक इस कालजयी गीत की उपेक्षा की गई और इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हुई। लेकिन अब राष्ट्र की अस्मिता के साथ कोई समझौता नहीं होगा।”
— प्रधानमंत्री मोदी (संसद में संबोधन के दौरान)
सियासी गलियारों से संवैधानिक बदलाव तक
हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रवाद और बंगाली अस्मिता का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरा था। भाजपा ने बंकिम चंद्र चटर्जी की इस थाती को जन-जन तक पहुँचाने के लिए पदयात्राएं और सामूहिक गायन के कार्यक्रम आयोजित किए थे।
इसी साल जनवरी में गृह मंत्रालय ने सरकारी आयोजनों में इसके सभी छह अंतरों (Stanzas) के गायन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए थे, जिससे यह साफ हो गया था कि सरकार इसे केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि पूर्ण औपचारिक दर्जा देने की तैयारी में है।
मुख्य बिंदु जो आपको जानने चाहिए….
* समान दर्जा: ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ अब कानूनी रूप से एक ही पायदान पर होंगे।
* अनुशासन: इसके गायन के दौरान अब राष्ट्रगान की तरह ही निर्धारित नियमों और मर्यादा का पालन अनिवार्य होगा।
* इतिहास: 2005 में इसी तरह का बड़ा बदलाव राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) के अपमान को रोकने के लिए किया गया था।
सरकार का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान सर्वोपरि है। 150 सालों से भारतीय चेतना का हिस्सा रहा यह गीत अब कानून के कवच से सुरक्षित होकर और भी शान से गूंजेगा।