मनोज कुमार मिश्रा
West Bengal : सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या को सिर्फ साधारण राजनीतिक हत्या मानना बड़ी भूल हो सकती है। जांच रिपोर्टों में सामने आ रहा है कि हमलावरों ने ऑस्ट्रियन ग्लॉक जी-43 एक्स पिस्तौल का इस्तेमाल किया, और पश्चिम बंगाल पुलिस भी इसी दिशा में जांच कर रही है।
ग्लॉक जी-43 एक्स कोई साधारण देसी कट्टा या स्थानीय गिरोहों का रोज़मर्रा का हथियार नहीं है। ग्लॉक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह एक पतली 9 एमएम पिस्तौल है, जिसमें 10 गोलियों की मैगजीन क्षमता होती है, और इसमें ग्लॉक मार्क्समैन बैरल भी होता है, जो बेहतर निशानेबाज़ी के लिए बनाया गया है।
यही बात इस हत्या को और गंभीर बनाती है। जब किसी बड़े व्यक्ति की हत्या में ऐसा हथियार सामने आता है, तो सवाल सिर्फ गोली चलाने वालों पर ही नहीं, बल्कि हथियार की आपूर्ति, नेटवर्क, ट्रेनिंग और योजना पर भी उठते हैं।
कुछ रिपोर्टों में सामने आया है कि पुलिस साधारण अपराधियों से आगे बढ़कर पेशेवर निशानेबाज़ों या ठेके पर हत्या कराने वालों के एंगल की भी जांच कर रही है।
टाइम्स ऑफ इंडिया और बिज़नेस टुडे की रिपोर्टों में शुरुआती फॉरेंसिक जानकारी के आधार पर उन्नत हथियार और सोची-समझी हत्या की बात कही गई है।
संदेह को और गहरा करने वाला नया तथ्य – अभी एक बांग्लादेशी जमात नेता मोहम्मद नुरुल हुदा का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल को भारत से स्वतंत्र घोषित करने की सलाह दे रहा है।
उसने कहा कि ममता इस्तीफा न दें, बल्कि दिल्ली के खिलाफ युद्ध घोषित करें। दावा किया कि बांग्लादेश के 17 करोड़ मुसलमान उनका साथ देंगे। यह वीडियो मई 2026 के बंगाल चुनाव नतीजों के तुरंत बाद का है। किन्तु राजनीतिक कोण को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
जैसा कि पहले की पोस्ट में कहा गया कि डोनाल्ड ट्रंप ने नरेंद्र मोदी को पश्चिम बंगाल में भाजपा की “ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत” पर बधाई दी थी।
यहीं से संदेह और गहरा होता है – क्या यह हत्या तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी साठगांठ का नतीजा हो सकती है?
विदेशी एजेंसियों (जैसे पाकिस्तान आईएसआई या बांग्लादेशी तत्वों) के साथ मिलकर सुपारी हत्या या राजनीतिक सफाई का प्लान?
ग्लॉक जी-43 एक्स जैसे महंगे हथियार और जमात नेता का अलगाववादी बयान इस संभावना को खारिज नहीं होने देते। हालांकि अभी कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन यह एंगल पूरी तरह असंभव भी नहीं।
चुनावी नतीजे + राजनीतिक हिंसा + महंगा विदेशी हथियार + बांग्लादेशी जमात नेता का बयान – इन चारों का एक साथ दिखना संदेह को बहुत गहरा करता है।
विदेशी हाथ,तृणमूल या सीमा अस्थिर करने जैसी बातें अभी तक सार्वजनिक रूप से सिद्ध नहीं हुई हैं, इसलिए उन्हें अंतिम सत्य की तरह पेश करना जल्दबाज़ी होगी।
लेकिन यह ज़रूर कहा जा सकता है कि अगर जी-43 एक्स जैसा हथियार वास्तव में इस्तेमाल हुआ है और जमात नेता का ऐसा बयान आया है, तो मामला स्थानीय गुंडागर्दी से बहुत बड़ा, ज्यादा संगठित और कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है।
भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी समझदारी यही होगी कि गुस्से में किसी जाल में न फँसें। इस तरह की हत्या का जवाब सड़क पर हंगामा नहीं, बल्कि सख्त पुलिस कार्रवाई, फॉरेंसिक जांच, हथियारों के नेटवर्क की पहचान और साजिश के सरगना तक पहुँचने से दिया जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल इस समय सिर्फ सत्ता बदलने का राज्य नहीं, बल्कि कहानी बनाने, सुरक्षा और सीमा की राजनीति का मैदान बन चुका है। इसलिए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच में असली सवाल यह नहीं है कि ट्रिगर किसने दबाया, बल्कि यह है कि इतना खास हथियार किसने उपलब्ध कराया, क्यों कराया और किसे संदेश देना था।
अंत में: यह राजनैतिक साठगांठ या विदेशी एजेंसी का प्लान हो सकता है, लेकिन पुलिस जांच ही सच्चाई बताएगी। बिना प्रमाण के आरोप लगाना ठीक नहीं।