Smart Border : भारत में “स्मार्ट बॉर्डर”

Bindash Bol

* अब सीमा पर नहीं चलेगी घुसपैठ की चाल! AI, एंटी-ड्रोन और स्मार्ट सेंसर से बनेगा ‘स्मार्ट बॉर्डर’

Smart Border : भारत अब अपनी सीमाओं की सुरक्षा को नए दौर में ले जाने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि देश की सीमा सुरक्षा अब सिर्फ जवानों के भरोसे नहीं रहेगी, बल्कि AI, डिजिटल सर्विलांस, एंटी-ड्रोन सिस्टम, स्मार्ट सेंसर और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस एक “स्मार्ट बॉर्डर” तैयार किया जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट एसपी कॉन्फ्रेंस-2026 में अमित शाह ने कहा कि सरकार ऐसा सुरक्षा तंत्र बना रही है, जिसमें केंद्र, राज्य, जिला प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां और सीमावर्ती नागरिक मिलकर देश की सीमाओं को अभेद्य बनाएंगे। लक्ष्य सिर्फ घुसपैठियों को पकड़ना नहीं, बल्कि घुसपैठ की हर कोशिश को सीमा पर ही नाकाम करना है।
सरकार “क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी ग्रिड” विकसित कर रही है, जिसके जरिए सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा होगी। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी। सरकार अब “घटना के बाद कार्रवाई” नहीं, बल्कि “खतरे से पहले रोकथाम” की रणनीति पर काम कर रही है।
गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा की नई नीति तीन मजबूत स्तंभों—सुरक्षित सीमाएं, समृद्ध सीमांत क्षेत्र और जागरूक समाज—पर आधारित है। सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल, सुरंग, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, ताकि पलायन रुके और स्थानीय लोग भी सुरक्षा व्यवस्था के मजबूत साझेदार बनें।
अमित शाह ने यह भी कहा कि अगले तीन वर्षों में अवैध घुसपैठ, ड्रग्स तस्करी, हथियारों की सप्लाई और संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाया जाएगा। सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे सीमा पार से होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
उन्होंने बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में सीमा क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे पर निवेश में करीब 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों को विकास से जोड़ा जा रहा है। भारत-म्यांमार सीमा पर करीब 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग का काम भी तेज़ी से चल रहा है। लगभग 31,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर में अवैध घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी तथा संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

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