Ayodhya : प्रायः यह माना जाता है कि जो हमें दिखाई नहीं दे वह है ही नहीं, लेकिन हवा को हम देखते नहीं, पर हम सांस हवा ही लेते है, आवाज हम देखते नहीं सुनते हैं, इसलिए आवाज भी है । इसी तरह हम ईश्वर को भी कभी कभी मानने से इंकार कर देते हैं ; क्योंकि उन्हें हम देखते नहीं, लेकिन ईश्वर है । हम एक तीसरी शक्ति को भी नहीं मानते ,लेकिन तीसरी शक्ति भी है । यहां तक कि महान वैज्ञानिक आइस्टाइन भी कहते है ” मैं एक नियतिवादी हूं । हर चीज निर्धारित होती है , शुरुआत भी और अंत भी , इन ताकतों द्वारा जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है। वह कीड़े के साथ साथ तारे के लिए भी निर्धारित होता है । मनुष्य सब्जियां या ब्रह्माण्डीय धूल , हम सभी एक रहस्यमय धुन पर नाचते हैं , जिसे दूर से एक अदृश्य वादक द्वारा बजाया जाता है।” इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण भी अपने महान ग्रंथ गीता में अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं “सब कर्म प्रकृति के गुणों द्वारा किए हुए होते हैं , परंतु अहंकार से मूढ़ बना हुआ मनुष्य “मैं कर्ता ” यह मानता है”। जैसे श्वासोच्छवास आदि क्रियाएं अपने आप होती है , उनमें मनुष्य आसक्त नहीं होता और जब उन अंगों में व्याधि होती है , तभी मनुष्य को उसकी चिंता करनी होती है या उन्हें उन अंगों के अस्तित्व का भान होता है , वैसे ही स्वाभाविक कर्म अपने आप होते हों तो उनमें आसक्ति नहीं होती । जिसका स्वभाव उदार है वह स्वयं अपनी उदारता को जानता तक नहीं , पर उससे दान किए बिना रहा ही नहीं जाता । ऐसी अनासक्ति और अभ्यास ईश्वर कृपा से ही प्राप्त होती है । अतः ईश्वर सर्वत्र विद्यमान हैं, कण कण में है ।
अपार भारतीयों के आस्था का केंद्र अयोध्या और वहां स्थित मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम मंदिर में हुए घोटाले का मामला आज कल देश में शैलाब जैसा बन गया है । उसे भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए । श्री रामलाल के अस्तित्व को नकारने वाले यही तो सोच रहे थे कि इस चोरी को कौन देखा रहा है ; क्योंकि जिनके लिए करोड़ों का यह सब आ रहा है वे तो मात्र पत्थर की एक मूर्ति है, उसे कहां इतना भान की वह किसी से यह कह सके कि यहां अंधाधुन चोरी करके भक्तों की आस्था को चीरा लगाया जा रहा है , उसकी आँखों में धूल झोंका जा रहा है। जब राज खुला तो हमाम में सारे नंगे नजर आए । यह ठीक है कि अभी भी सारी स्थिति सामने नहीं आ सकी है, लेकिन जब अब सारे उलझे धागे सुलझे जाने लगे हैं तो और भी राज नजर आएंगे । और कितने इस चोरी, लुट या डकैती में जेल जाएंगे यह तो कहना मुश्किल है, बहुत कुछ होना अभी बांकी है । अभी तो केवल झांकी ही दिखाई जा रही है जिसके कारण जन समूह इतना उत्तेजित हो रहा है । कहीं ऐसा न हो जाए कि समाज में उबाल आ जाए और ऐसे चोरों को सजा देने के लिए जन सैलाब सड़क पर उतर जाए ।
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का खुलासा तब हुआ जब कम वेतन वाले कर्मचारियों (जैसे 14-15 हजार कमाने वाले) के पास महंगी संपत्तियां और भारी नकदी मिलने लगी। जांच में पाया गया कि महाकुंभ के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर कर्मचारियों ने बैंक कर्मियों और पूर्व अधिकारियों के ड्राइवर के साथ मिलकर संगठित तरीके से चंदा चुराया था। कई कर्मचारियों और चंदा गिनने वाले लोगों की आमदनी और उनके रहन-सहन में भारी अंतर देखा गया। सामान्य आय वाले लोग अचानक महंगी गाड़ियों और संपत्ति के मालिक बन गए थे। जांच एजेंसियों (SIT) ने जब आरोपियों के बैंक खातों की पड़ताल की, तो पता चला कि उनके खातों में उनकी ज्ञात आय से कई गुना ज्यादा संदिग्ध लेनदेन हुए थे। पुलिस जांच में सामने आया कि मंदिर के दान-गणना कक्ष की चाबियों में हेराफेरी की गई थी। पूर्व ट्रस्ट सचिव के ड्राइवर के पास एक चाबी थी और दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास रहती थी। दोनों की मिलीभगत से नकदी निकाली जाती थी। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारियों को नकदी के बंडल छिपाते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने विभिन्न आरोपियों के घरों से भारी मात्रा में कैश और विदेशी मुद्राएं बरामद कीं। इस संगठित गबन के खुलासे के बाद एक विशेष जांच दल का गठन किया गया, और ट्रस्ट के सदस्यों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कई आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चोरी का स्वर्णिम काल महाकुंभ 2025 (प्रयागराज) के समापन के बाद अयोध्या में भारी उमड़ी भीड़ को माना जा रहा है । बताया जा रहा है कि उस दौरान लगभग 1.5 लाख से 2.5 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन रामलला के दर्शन करने पहुंच रहे थे। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक (2026 में) अयोध्या में 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं। महाकुंभ के बाद जब भारी संख्या में तीर्थयात्री प्रयागराज से अयोध्या पहुँचे थे, तो व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा दर्शनार्थियों के लिए विशेष गाइडलाइंस जारी की गई इस गाइडलाइन को भी मंदिर से चोरी करने वालों का स्वर्णिम अवसर माना गया । बेहिसाब दर्शनार्थियों का आना और उन्हें तत्काल दर्शन कराना, जगह जगह घुमाने, रात्रि में विश्राम के नाम पर चोरों ने कहर बरपा दिया था । अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी चोरी जिसमें सैकड़ों की संख्या में चोर लगे हुए थे , उनके पीछे ऐसा करने के लिए कोई न कोई तो जरूर रहा होगा। अभी जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है क्या यही चोरों के सरगना थे ? जांच के बाद सब कुछ दूध पानी अलग हो जाएगा , लेकिन कितना समय लगेगा और तब तक कितने भूमिगत हो चुके होंगे। वैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यह दावा किया है कि इस संगठित गिरोह का कोई सदस्य बच नहीं पाएगा और कानून के आधार पर उन्हें जेल के भीतर भेजना में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी । इन आरोपियों की मजाल तो यह भी देखिए, वे चोरी का धन बैंक खातों में जमा करने के साथ अन्यत्र भी निवेश कर रहे थे , कोई चल अचल संपत्ति में लगा रहा था पूंजी, तो कोई खरीद रहा था अचल संपत्तियां, कई तो शौक पूरा करने के लिए आईफोन, टैब खरीद रहे थे । चढ़ावा चोरी के कई मामले धीरे धीरे खुलने लगे हैं । उसी क्रम में बद्रीनाथ धाम से भी चढ़ावा चोरी का मामला सामने आ रहा है ।
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हुओं का कहना है कि महासचिव चम्पत राय बंसल बेदाग हैं, लेकिन इस बात से कोई कैसे इंकार कर सकता है कि उनकी आंखों के नीचे चढ़ावों की इतनी बड़ी चोरी होती रही और उन्हें भनक तक नहीं लगी? अयोध्या के स्थानीय निवासियों की माने तो वे कहते हैं कि बाह्य रूप से तो महासचिव तुनकमिजाज अवश्य थे , लेकिन यह कोई सोच भी नहीं सकता कि इस निष्कलंक तथाकथित झक सफेद वस्त्र के नीचे इतना दुर्लभ चरित्र का व्यक्तित्व छुपा हुआ है । वैसे तो महासचिव चम्पत राय बंसल और अनिल मिश्रा त्यागपत्र दे चुके हैं, लेकिन सोमवार(6 जुलाई) की बैठक में निर्णय लिया गया वही सर्वमान्य होगा । फिर अंत में भारी जद्दोजहद के बाद राम मंदिर में हुए चढ़ावा/दान चोरी विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चंपत राय बंसल का इस्तीफा स्वीकार कर उन्हें महासचिव पद से हटा दिया है। उनके साथ ही ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का भी इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। पूर्व मंदिर व्यवस्थापक गोपाल राव को भी पद से हटा दिया गया । ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है । 22 जुलाई को मंदिर ट्रस्ट की अगली बैठक होगी जिसमें रिक्त पदों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, महासचिव चम्पत राय बंसल ने विदा होने के बाद एक पत्र लिखकर कहा है मेरे ऊपर लगाए गए आरोप अनर्गल हैं । एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आरोपों का उत्तर दूंगा फिर सच सामने आ जाएगा ।
(लेखक वरिष्ट पत्रकार और स्तंभकार हैं)।