Sharad Pawar : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से ‘आधी रात की हलचल’ ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. मंगलवार रात करीब 11 बजे मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ पर एक ऐसी बैठक हुई, जिसने राजनीतिक पंडितों को कान खड़े करने पर मजबूर कर दिया. एनसीपी (शरद पवार) के कद्दावर नेता जयंत पाटिल, एनसीपी (अजित पवार) के रणनीतिकार प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में मैराथन बैठक चली.
अभी मुंबई की इस हलचल की कड़ियां जोड़ी ही जा रही थीं कि दूसरी तरफ उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो गए और देर रात गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी गोपनीय बैठक हुई. हालांकि, दोनों ही बैठकों के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सियासी गलियारों में यह सन्नाटा किसी बड़े तूफान की आहट माना जा रहा है.
इनसाइड स्टोरी: क्या महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर बदलेगा शरद पवार का रुख?
सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इस पूरी हलचल के केंद्र में केंद्र सरकार का महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक है.
* बजट सत्र का यू-टर्न: याद दिला दें कि पिछले बजट सत्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने इस विधेयक के खिलाफ वोट किया था, जिसके चलते आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह बिल लोकसभा में गिर गया था.
* मानसून सत्र में नया समीकरण: अब चर्चा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ पर्दे के पीछे हुई बातचीत के बाद पवार गुट के रुख में बड़ा बदलाव आया है. 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र में एनसीपी (शरद पवार) इस बेहद महत्वपूर्ण बिल पर मोदी सरकार को वॉकओवर या सीधा समर्थन दे सकती है.
‘एक तीर से दो निशाने’: टूट से बचने की मजबूरी या रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार का यह संभावित कदम सिर्फ एक बिल को समर्थन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी बिसात बिछी है…..
पार्टी में बड़ी टूट को रोकने की कवायद
हाल के दिनों में यह अटकलें तेज थीं कि पवार गुट के कुछ सांसद भाजपा या शिवसेना (शिंदे गुट) के पाले में जा सकते हैं. इस कदम को पार्टी के भीतर मची इसी छटपटाहट को शांत करने और सांसदों को पाला बदलने से रोकने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
फडणवीस की ‘बैकचैनल डिप्लोमेसी’ लाई रंग?
दावा किया जा रहा है कि इस पूरे ड्रामे की स्क्रिप्ट लिखने में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने बड़ी भूमिका निभाई है. फडणवीस ने खुद शरद पवार गुट से बैकचैनल संपर्क साधा था, जिसके बाद ही इस सहमति की जमीन तैयार हुई है.
दिलचस्प बात यह भी है कि इस गुप्त बैठक से कुछ ही दिन पहले शरद पवार ने खुद मुख्यमंत्री फडणवीस और उप मुख्मंत्री शिंदे से मुलाकात की थी, जिससे साफ है कि खिचड़ी काफी दिनों से पक रही थी.
सस्पेंस बरकरार: संसद में खुलेगा पत्ता
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर एनसीपी (शरद पवार) ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है और किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार के असली पत्ते 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में ही खुलेंगे, जब यह विधेयक पटल पर रखा जाएगा. लेकिन एक बात तय है—महाराष्ट्र की राजनीति में शह-मात का खेल एक बार फिर बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है.