SEO Meeting : यूरेशिया के केंद्र बिश्केक से उठी एक भू-राजनीतिक हुंकार ने वाशिंगटन के कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच पर बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने वैश्विक शक्ति संतुलन (Power Shift) की एक नई लकीर खींचते हुए दुनिया की असली महाशक्तियों के रूप में तीन नाम लिए—भारत, चीन और रूस। सबसे आक्रामक पहलू यह रहा कि महाशक्ति होने का दावा करने वाले अमेरिका को इस समीकरण से पूरी तरह बेदखल कर दिया गया।
यह बयान केवल एक कूटनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति के पश्चिम से पूर्व की ओर खिसकने (West to East Power Shift) की खुली घोषणा है।
यूरेशियाई धुरी का उदय: वॉशिंगटन के एकाधिकार पर चोट
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कायम पश्चिमी आधिपत्य अब इतिहास बनने की कगार पर है। SCO के मंच से भारत को रूस और चीन के समकक्ष परमाणु और आर्थिक महाशक्ति बताना यह साबित करता है कि अब दुनिया के फैसले वाशिंगटन, लंदन या ब्रुसेल्स के बंद कमरों में नहीं होंगे।
* ट्राइपोलर वर्ल्ड ऑर्डर की शुरुआत: लुकाशेंको का यह बयान स्पष्ट करता है कि यूरेशिया अब अमेरिका-केंद्रित विश्व व्यवस्था को सीधे तौर पर नकार रहा है। भारत, चीन और रूस की संयुक्त आर्थिक और सैन्य शक्ति दुनिया के नए भू-राजनीतिक गुरुत्वाकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
* रणनीतिक स्वायत्तता की जीत: भारत ने किसी भी पश्चिमी गठबंधन का पिछलग्गू बने बिना, अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। जहां एक तरफ पश्चिम भारत को अपने पाले में खींचने की कोशिश करता है, वहीं यूरेशियाई ब्लॉक भी भारत की मौजूदगी के बिना खुद को अधूरा पाता है।
* अमेरिका का रणनीतिक अलगाव: सम्मेलन में ईरान पर अमेरिकी हमलों की निंदा और बिश्केक घोषणा-पत्र में पश्चिमी नीतियों के खिलाफ एकजुटता यह दर्शाती है कि ग्लोबल साउथ और यूरेशियाई देश अब अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव की राजनीति के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं।
शहबाज और जिनपिंग के सामने भारत का सुरक्षा एजेंडा
पावर शिफ्टिंग के इस बड़े खेल में भारत केवल दर्शक नहीं, बल्कि एजेंडा तय करने वाला मुख्य खिलाड़ी बनकर उभरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में आतंकवाद के ‘दोहरे मापदंड’ को तार-तार कर दिया।
भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि नई वैश्विक व्यवस्था केवल आर्थिक और सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि आतंकवाद के प्रायोजकों को बेनकाब करके ही सुरक्षित रह सकती है। सम्मेलन में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए ‘सार्वभौमिक केंद्र’ के नियमों पर मुहर लगना इस बात का सबूत है कि भारत ने इस मंच का इस्तेमाल अपनी संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए मजबूती से किया है।
वैश्विक मंच पर बेलारूस द्वारा अमेरिका को नजरअंदाज कर भारत को शीर्ष शक्ति के रूप में रेखांकित करना इस बात का प्रमाण है कि 21वीं सदी का नया भू-राजनीतिक नक्शा तैयार हो चुका है, और भारत इस नए वर्ल्ड ऑर्डर का अपरिहार्य स्तंभ है।
