Indian Democracy : कबूतर चाचा की ‘जिडीपी’ और स्वरा का जौहर….जब लोकतंत्र में ज्ञान मुफ्त और अक्ल दुर्लभ हो जाए!

Bindash Bol

* “लोकतंत्र की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि यहाँ कबूतर चाचा का वोट भी उतना ही वजन रखता है जितना किसी अर्थशास्त्री का, और ज्ञान देने की छूट दोनों को बराबर है!”

सर्वेश कुमार श्रीमुख
Indian Democracy : मुझे इस “सारे जहां से अच्छे” लोकतंत्र में कुल मिला कर केवल और केवल यही एक कमी दिखाई देती है कि यहाँ कोई भी व्यक्ति किसी भी विषय पर ज्ञान दे सकता है। अभी आज दोपहर की ही बात है, जीवन भर तिरहुतिया नाच में राजा का नौकर बनने वाले कबूतर चाचा चौपाल में बैठे कह रहे थे, “आप नहीं जानते तिवारी जी, देश के विकास दर वाले सारे आंकड़े झूठे हैं। जिडीपी गिर कर पाताल में चली गयी हैं।” मैंने चुपचाप सुन लिया। और करता भी क्या? उनके कुल ग्यारह लड़के लड़कियां हैं, और इस हिसाब से लोकतंत्र में उनकी बात मुझसे अधिक प्रभावी है।
     अभी कितने दिन हुए जब राखी सावंत ने कहा था कि उन्हें ऐश्वर्या राय सुंदर नहीं लगतीं।एक कोई प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पंजाब के किसानों को ज्ञान दिया था कि जब लाल मिर्च महंगी बिकती है तो वे सीधे लालमिर्च की ही खेती क्यों नहीं करते। अभी कल की ही तो बात है, अपनी अश्लील टिप्पणीयों के कारण कुख्यात हुई एक डेढ़फुटिया कह रही थी कि प्रधानमंत्री मेरे पीछे पड़े हैं। जैसे प्रधान जी को अब विपक्ष के बड़े बड़े नेताओं से कोई खतरा नहीं है, सारा खतरा उसी से है जिसके पास कुल मिला कर एक मुंह है और कुछ गंदी गलियाँ… मतलब कुछ भी… और तो और, अब दत्तात्रेय गोत्र वाले परम विद्वान पंडितजी भी मनुस्मृति की व्याख्या कर रहे हैं।
पिछले दिनों मेरे पड़ोस के गाँव के एक युवक ने फेसबुक पोस्ट किया कि यदि हम बावनो को भीख न दें तो वे खाने बगैर मर जायेंगे। मित्रों दस साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना से बने उसके डेढ़ कमरे के मकान की छत फट गयी है। खेतों में मजदूरी करने वाला उसका गरीब किन्तु सज्जन पिता इस लड़के के निकम्मेपन से दुखी हो कर रोता रहता है कि यदि यह थोड़ा भी काम धंधा करता तो कम से कम सर पर छत तो आ जाती… पर लड़के का दावा यह है कि देश के बावन उसके रहमों करम पर जीते हैं।
      अरे हाँ, याद आया। देश में हिन्दू हितों की रक्षा के लिए एक नया संगठन बना है, “हिंदूस फॉर ह्युमन राइट”। जानते हैं इसकी सलाहकार समीति में कौन लोग हैं? तिस्ता शीतलवाड़, फादर आनंद मैथु, सईदा हमीद, फैसल खान, खालिद हमीद अंसारी, लिंडा हेस, मार्टिन मैकवान और स्वरा भाष्कर… मतलब ये लोग सलाह देंगे कि इस देश में हिन्दुओं के हितों की रक्षा किस प्रकार की जा सकती है। वाह…
      वैसे ताजा मामला यह है कि स्वरा भाष्कर जी कह रही हैं कि जौहर करने वाली स्त्रियां कायर थीं। मतलब स्वरायें भी जौहर करने वाली देवियों पर ज्ञान दे सकती हैं। कमाल है… ठीक है भाई, कल करण जौहर भी साका करने वाले योद्धाओं पर बोल सकते हैं। यही हमारा देश है… वैसे स्वरा अभी भी अनारकली ऑफ आरा मोड में ही हैं क्या? मतलब अभी भी स्वयं को स्टार समझती हैं क्या?

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