Hindi Sahitya : फादर कामिल बुल्के जयंती… सजी ऑनलाइन साहित्य गोष्ठी, ‘दूसरी आवाज’ के हिंदी दिवस विशेषांक का भव्य लोकार्पण

Bindash Bol

Hindi Sahitya : झारखंड साहित्य संस्कृति मंच के तत्वावधान में मंगलवार को रामकथा के मूर्धन्य अध्येता और पद्मभूषण डॉ. फादर कामिल बुल्के की जयंती पर एक भव्य ऑनलाइन साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। मंच के संस्थापक सदस्य और प्रथम संरक्षक रहे फादर बुल्के को समर्पित इस संध्या में वैचारिक विमर्श, काव्य पाठ और पत्रिका लोकार्पण का सुंदर संगम देखने को मिला।
अर्पणा सिंह की सुमधुर सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुए इस आयोजन में मंच के मानद सदस्य हिमकर श्याम द्वारा संपादित पाक्षिक पत्रिका ‘दूसरी आवाज’ के ‘हिंदी दिवस विशेषांक’ का डिजिटल विमोचन मुख्य आकर्षण रहा।

संपादक हिमकर श्याम ने पत्रिका के ध्येय को रेखांकित करते हुए कहा कि यह प्रकाशन समकालीन हिंदी की साहित्यिक चेतना का जीवंत दस्तावेज है।

वैचारिक आलेख व शोधपरक दृष्टि

* व्यक्तित्व व कृतित्व: डॉ. गीता सिन्हा ‘गीतांजलि’ ने फादर बुल्के के भाषाई अवदान पर आलेख प्रस्तुत किया।

* छंदबद्ध वंदना: डॉ. सुरिन्दर कौर ‘नीलम’ ने मनहर घनाक्षरी छंद के जरिए बुल्के जी के भाषाविद् स्वरूप को जीवंत किया।

* संवैधानिक परिप्रेक्ष्य: राजीव शर्मा ने भारतीय संविधान के संदर्भ में ‘रामत्व की अवधारणा’ पर गंभीर विचार साझा किए।

काव्य धारा में गूंजी रामकथा और जनचेतना

गोष्ठी में देश-समाज और भक्ति रस से ओतप्रोत रचनाओं का जनचेतना…

* असित कुमार: ‘जीवन राममय हो’

* अनिता रश्मि: ‘उलटबांसी’

* ​अर्पणा सिंह: ‘अकथ कथा है राम की’

* ​हिमकर श्याम: ‘धर्मप्रचारक पादरी बहुभाषाविद् संत’ (दोहा)

* ​डॉ. वैद्यनाथ मिश्र: ‘पुस्तकें’

* ​राज रामगढ़ी: ‘राम नाम की जो अलख जगावै’

* ​सुजाता प्रिय ‘समृद्धि’: ‘नाम जपो श्रीराम का’

* ​रेणु झा: मैथिली गीत की प्रस्तुति

* ​गीता चौबे ‘गूँज’: ‘मौसम ने ली अंगड़ाई’

* ​डॉ. उर्मिला सिन्हा: ‘पूजनीय, वंदनीय, अभिनंदनीय हे संत महान’

* ​बिनोद सिंह ‘गहरवार’: ‘कलमकारों, देशहित में लेखनी को धार दो’

* ​पूनम वर्मा: ‘धीरे-धीरे पग रखना राम, अवध गलियाँ’

* ​अन्य रचनाकार: कृष्णा विश्वकर्मा ‘बादल’ एवं सुनीता अग्रवाल की कविताओं को भी खूब सराहना मिली।

​समारोह की अध्यक्षता करते हुए मंच के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि फादर बुल्के ने भारत की पावन भूमि को अपनी आत्मभूमि बनाकर हिंदी और भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित किया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन व संचालन पूनम वर्मा ने किया, स्वागत वक्तव्य सचिव बिनोद सिंह ‘गहरवार’ ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उर्मिला सिन्हा ने किया।

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