Political Review :आंदोलन की आड़ में परजीवियों की स्वार्थसिद्धि

Nishikant Thakur

Political Review : पिछले दिनों सबने देखा कि देश—दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए एक गुंडे ने किस तरह दिल्ली के जंतर मंतर पर हुई हिंसात्मक घटना को लेकर अपने नाम को सार्वजनिक किया। इसे या तो जेन जी की ख्याति या उसका डर कहा जाए जिससे बुद्धिजीवियों का तो आत्मबल बढ़ ही रहा है, वहीं सड़क छाप लोग देश को बांटने के चक्कर में आकाश-पाताल एक कर रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि प्रधानमंत्री को जेन जी के लिए खुलकर सामने आना पड़ा और उन्होंने दिल्ली में छात्रों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आनेवाले समय में भारत विनिर्माण का वैश्विक केंद्र होगा। अनुशासन और नवाचार का हब बनेगा। कृषि निर्यात में सुपर के साथ भारत का अपना स्पेस स्टेशन होगा। हम ऐसे ओलंपिक का आयोजन करेंगे जिसे दुनिया देखेगी। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि यह केवल बातें नहीं, हमारा संकल्प होगा। प्रधानमंत्री ने छात्रों में मन में उत्साह भरते हुए उनसे ग्लोबल लीडर बनने का आह्वान किया। आज का भारत सिर्फ छोटे लक्ष्य तय नहीं करता, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प के साथ रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट स्पेस में सुपर पावर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ओलंपिक की मेजबानी से लेकर भारत के अपने स्पेस स्टेशन तक के सपनों को उन्होंने देश के सामर्थ्य का संकल्प बताया।

नेता की जनता को जितनी आवश्यकता है , उससे कहीं अधिक नेता को जनता की आवश्यकता है । जनता उससे जितना सीखेगी , नेता उसकी अपेक्षा जनता से कहीं अधिक सीख सकता है । जैसे जिनकी नेता जनता पर विश्वास किए बिना अपनी योजनाएं बनाना शुरू करता है, वह अपनी विजय और उद्देश्य दोनों की सफलता को बर्बाद कर देता है। दरअसल, बाल्यकाल से ही भारत में बच्चों को आत्मविश्वासी और स्वतंत्र रहने की शिक्षा दी जाती है, लड़की को पराधीनता और सजग रहने की तालीम मिलती रहती है। लड़के को बतलाया जाता है कि तुम अपने इरादे को पूरा कर सकते हो। लड़कियों को कहा जाता है कि अपने इरादों को पूरा करने के लिए तुम्हें हर कदम पर एक मर्द पर आश्रित रहने की आवश्यकता होगी, इसके द्वारा ही तुम अपने मंसूबों में सफल हो सकती हो। लड़के के लिए ऐसे खिलौने मिलते हैं, जिससे वह अपनी बुद्धि विकसित कर सके। बेटियों के प्रति अब इस सोच को दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जा सकता है; क्योंकि आज देश का कोई भी उच्चपद ऐसा नहीं है, जिसे देश की बेटियों ने अपने गुणों से आगे न बढ़ाया हो, आबाद न किया हो। अब तो हमारे देश की प्रथम नागरिक महिला ही राष्ट्रपति जैसे गरिमायुक्त पद को सुशोभित कर रही हैं।

विश्व का इतिहास बताता है कि अधिकाररूढ़ होते ही पहला काम जो सत्तासीन शासकों द्वारा किया जाता हैं, वह है पिछले सरकार को बदनाम करने के लिए प्रोपगंडा चलाना।अब ऐसा क्यों होता है जबकि युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है, लेकिन कुछ अराजकतत्व इसके विपरीत उन्हीं को बदनाम करने में लगे रहते हैं। सीजेपी आंदोलन का उद्देश्य यदि देखें तो बहुत ही अच्छा है, इसलिए क्योंकि सच की सूचना सत्ता के उच्च शिखर पर बैठे राजनीतिज्ञों तक पहुंच ही नहीं पाती कि धरातल पर क्या हो रहा है। यदि उसका प्रदर्शन जनहित के लिए है, तो जनतंत्र में ऐसा होता आया है और आगे भी होता रहेगा, लेकिन उस भीड़ का हिस्सा बनकर कोई अधिकारी कार्य करने लगता है, अथवा प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजी जाने लगती है, पानी की बौछारें करते हैं तो यह करना भी अभी तक अनुचित नहीं माना जाता रहा है। लेकिन, यदि पैलेटगन से मारकर प्रदर्शनकारियों कि जिंदगी तबाह करने का प्रयास किया जाने लगता है, तो वह देश का अहित करता है। पर, उससे  यदि व्यक्तिगत यश लूटने अथवा कोई नामवीर बनाना चाहता है, तो उसे हिंसक प्रवृत्ति का कहा जाता है- फिर उसका उचित इलाज करना सरकार का ही काम होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जनांदोलन और प्रदर्शनों के मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणियां और निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि हर किसी को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए। अदालत ने विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना अंततः पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए छात्र आंदोलनों और जनांदोलनों के दौरान देश भर में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को बंद माना जाए और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को इन घटनाओं से जुड़े नए मामले दर्ज करने से रोक दिया गया है। हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे कुछ विशेष व्यक्तियों पर कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी गई है।

कॉकरोच जनता पार्टी, यानी सीजेपी का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करना, पारदर्शिता की मांग करना और युवाओं, बेरोजगारों तथा छात्रों की आवाज को उठाना है। यह मई 2026 में शुरू हुआ एक व्यंग्यात्मक और युवा-नेतृत्व वाला डिजिटल राजनीतिक आंदोलन है, जिसका प्रमुख उद्देश्य सरकारी खर्चों में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर प्रशासन की जवाबदेही तय करना है। न्यायिक सुधार (जैसे सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों को संसद/राज्यसभा में पद न मिलना), चुनावी अखंडता और दलबदल कानून को सख्त करना ,मुख्यधारा की राजनीति में बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली और आम जनता से जुड़े असली मुद्दों को केंद्र में लाने के साथ उन युवाओं को एक मंच देना है, जो मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों से खुद को कटा हुआ या निराश महसूस करते हैं।

यदि सहज भाव से देखें तो जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है सीजेपी का उद्देश्य पारदर्शी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पूर्व शिक्षामंत्री हैं, जिनके लिए सीजेपी का आंदोलन है, जो दिल्ली के जंतर मंतर से शुरू होकर पूरे देश में फैल गया और वह अपने पहले उद्देश्य में सफल भी रहा। उसी आंदोलन में कुछ उपद्रवी घुस गए थे जिसे पुलिस ने भी अपनी जांच में बताया है। उसी उपद्रवियों में शामिल स्वतंत्र भारद्वाज नामक युवक भी था जिसने मारपीट के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए भी आपमनजनक टिप्पणी के साथ साथ सरेआम इस बात को स्वीकार किया कि हां, उसने मारपीट की। अब इतने दिन बाद उसकी गिरफ्तारी हो गई है और वह अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में है। अब इसे कई गुटों के साथ साथ उसके परिवार वालों ने भी राजनीति से प्रेरित बताया है। लेकिन, अब तो जांच और भारतीय कानून के ही अनुसार ही कुछ होगा जिससे सच और झूठ का पर्दाफाश होगा । लेकिन, यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि व्यक्ति की एफआईआर करने व उसे गिरफ्तार करने के लिए इतना बड़ा हंगामा खड़ा हो गया, उसके बाद उसे दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा सका।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)

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