BRICS Summit 2026 : रामेश्वरम की गूंज से ग्लोबल साउथ की हुंकार: ब्रिक्स 2026 में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति

Bindash Bol

BRICS Summit 2026 : नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज एक बेहद खास और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पल के साथ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब वैश्विक नेताओं का स्वागत किया, तो बैकड्रॉप में तमिलनाडु के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र रामेश्वरम स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की भव्य तस्वीर आकर्षण का मुख्य केंद्र रही।


वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक कूटनीति

शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई बड़े नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मंदिर की भव्य पृष्ठभूमि और उसकी वास्तुकला के महत्व के बारे में संक्षेप में बताना कूटनीति के साथ सांस्कृतिक परिचय का एक अनूठा उदाहरण रहा।

रामनाथस्वामी मंदिर: आस्था और इतिहास का संगम

तमिलनाडु के पंबन द्वीप पर स्थित रामनाथस्वामी मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में शुमार है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। अपनी विशाल और भव्य गलियारे जैसी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध इस मंदिर का सीधा जुड़ाव रामायण काल से भी माना जाता है, जो इसे भारतीय सनातन संस्कृति में एक विशिष्ट पहचान दिलाता है।

‘मानवता प्रथम’ के विजन पर टिकी भारत की अध्यक्षता

भारत इस बार ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ की थीम के साथ 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत की अध्यक्षता पूरी तरह से जन-केंद्रित और ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ (मानवता प्रथम) की भावना पर आधारित है।

विकसित होती ब्रिक्स की भूमिका

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने साझा किया कि इस अध्यक्षता के तहत देश के लगभग 30 विभिन्न शहरों में 350 से अधिक बैठकों का सफल आयोजन किया गया, जिसमें ब्रिक्स देशों की टीमों ने हिस्सा लिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ब्रिक्स किसी भी देश के खिलाफ एक मंच नहीं है, बल्कि यह सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने और वैश्विक दक्षिण की आवाज को बुलंद करने वाला एक सहयोगात्मक समूह है। सम्मेलन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने ‘ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन’ तंत्र स्थापित करने का भी आह्वान किया।

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