Trump : अमेरिका और भारत के रिश्तों में इस वक्त भूचाल सा आ गया है। वजह है अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित वह विवादास्पद कानून, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। वाशिंगटन के इस आक्रामक रुख और सीनेटरों की धमकियों के बीच, अमेरिका के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और कूटनीति के दिग्गज इवान ए. फीगेनबाम (Evan A. Feigenbaum) ने एक विस्फोटक बयान देकर अमेरिकी मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
1. ‘यह भारत को दोषी ठहराने की एक चालाक कोशिश है’
इवान फीगेनबाम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अमेरिकी नेताओं के बयानों की धज्जियां उड़ाते हुए साफ कहा कि यूक्रेन युद्ध के लिए भारत पर उंगली उठाना पूरी तरह बेतुका है।
* पश्चिम की नाकामी का ठीकरा: यह पश्चिमी देशों (और ट्रंप प्रशासन) की उस सामूहिक विफलता को छिपाने का हथकंडा है, जिसके तहत वे मॉस्को को युद्ध रोकने के लिए मनाने में नाकाम रहे।
* रणनीतिक भूल: भारत को चीन की श्रेणी में खड़ा करना अमेरिका की एक बड़ी कूटनीतिक चूक है। इससे दोनों देशों के बीच पिछले 25 सालों में बनी आपसी साख को गहरा धक्का लगा है।
2. ‘रूसी संबंधों को बलि नहीं चढ़ाएगा भारत’
इवान के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दबाव के आगे कभी नहीं झुकेंगे।
* ऐतिहासिक रिश्ते: रूस के साथ भारत के सदियों पुराने और गहरे रणनीतिक व भावनात्मक संबंध हैं। सिर्फ अमेरिकी धमकियों के दम पर नई दिल्ली मॉस्को से अपने रिश्ते नहीं तोड़ेगी।
* पुतिन-मोदी की केमिस्ट्री: ब्रिक्स समिट और हालिया मुलाकातों ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।
3. भारत सरकार का कड़ा रुख: ‘140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि’
वाशिंगटन के इस नए दबाव पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी बेहद कड़ा और दो टूक जवाब दिया है…..
* ऊर्जा सुरक्षा पर समझौता नहीं: भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से जहां से उचित लगेगा, वहां से तेल और गैस खरीदेगा।
* व्यापारिक हितों की रक्षा: नई दिल्ली ने यह भी चेतावनी दी है कि इस तरह के कानूनों से न केवल द्विपक्षीय रिश्तों पर बल्कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर बुरा असर पड़ेगा। भारत अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को पूरी तरह तैयार है।
4. क्या है अमेरिकी कांग्रेस का यह 100% टैरिफ बिल?
* बिल का नाम: ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’।
* पासिंग डिटेल्स: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इसे 262 बनाम 159 मतों से पारित कर दिया है, जबकि सीनेट से यह पहले ही मंजूर हो चुका है। अब यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा।
* लक्ष्य: रूस को मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को रोकना और उन देशों को निशाना बनाना जो रूसी ऊर्जा के आयात में मदद करते हैं। हालांकि, इस कानून में भारत का नाम विशेष रूप से लक्षित देश के रूप में नहीं है, लेकिन इसके प्रावधानों की आंच भारत जैसे बड़े खरीदारों तक जरूर पहुंच सकती है।
अमेरिकी कानून और ट्रंप प्रशासन के कड़े तेवर अपनी जगह हैं, लेकिन नई दिल्ली ने दुनिया को यह संदेश साफ दे दिया है कि भारत अब किसी भी बाहरी दबाव में झुकने वाला देश नहीं है—‘भारत कतई नहीं झुकेगा!’
