Gyanesh Kumar : ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का ‘जन महाभियोग’ आज, अमित शाह बोले- ‘हिम्मत है तो संसद में बहस करें’

Bindash Bol

* SIR पर संग्राम… संसद में आर-पार की जंग के लिए तैयार सरकार! अमित शाह ने राहुल गांधी को दी खुली चुनौती

Gyanesh Kumar : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पहले से तय विपक्षी दलों का जन महाभियोग कार्यक्रम शुक्रवार को बारिश की तेज बूंदों से धुल गया. कार्यक्रम को आज तक के लिए पोस्टपोन करना पड़ा. इंडिया ब्लॉक के सांसदों के साथ नेता विपक्ष राहुल गांधी ने खुद इसकी जानकारी दी. हालांकि जन महाभियोग और 1 नवंबर को होने वाली इंडिया (INDIA) गठबंधन की महारैली को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी तकरार अपने चरम पर पहुंच गई है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जहां विपक्ष को वोट चोरी के आरोपों पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर खुली बहस करने का चैलेंज दिया है, वहीं विपक्ष ने रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन के लिए विस्तृत रोडमैप का ऐलान कर दिया है.

लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को इस सांकेतिक कार्यवाही की अध्यक्षता करनी थी और खरगे को प्रस्ताव पेश करना था. रुक-रुक कर हुई तेज बारिश के बावजूद राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता खरगे के घर पहुंचे और एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला. वहीं, लखनऊ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को खुली चुनौती देते हुए ‘विशेष संसद सत्र’ बुलाने का दांव चल दिया है.

बारिश से टला महाभियोग, राहुल बोले- ‘हम एकजुट’
कार्यक्रम स्थगित होने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पूरा विपक्ष एक साथ खड़ा है क्योंकि हम वोट चोरी के खिलाफ संविधान की रक्षा कर रहे हैं. यह कोई अलग-अलग प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत के विचार और जनता के वोट की रक्षा की साझा लड़ाई है. दोनों कार्यक्रम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार और बीजेपी द्वारा भारतीय लोकतंत्र को नष्ट किए जाने के विरोध में हैं.

राहुल गांधी ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि बीजेपी की राज्य सरकारें कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली विपक्ष की महारैली में शामिल होने से जबरन रोक रही हैं. बीजेपी ने इसे पूरी तरह झूठा बताते हुए राहुल से इसके सबूत मांगे हैं.

हिम्मत है तो संसद में चर्चा करें: अमित शाह

विपक्ष के इस कदम पर गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ से करारा पलटवार किया. उन्होंने विपक्ष को ‘मॉक संसद’ की नौटंकी छोड़कर असली संसद में आने की चुनौती दी. उन्होंने कहा कि वो कहते हैं कि वोट चोरी हुई है. मैं आज यहां से अखिलेश यादव और राहुल गांधी को चुनौती देकर जाता हूं कि बीजेपी संसद में इसकी चर्चा करने के लिए तैयार है, हमें कुछ नहीं छिपाना है. एक बार आ जाइए, स्पेशल संसद सत्र बुलाते हैं. मगर वो संसद में बोलना नहीं चाहते हैं. संसद चलने ही नहीं देते हैं, हो-हल्ला करते हैं.

शाह ने तंज कसते हुए आगे कहा कि जब कोई टीम मैच हार जाती है तो ज्यादा प्रैक्टिस करती है, लेकिन राहुल बाबा और अखिलेश यादव अलग मिट्टी के बने हैं. ये मैच हारने के बाद अंपायर (चुनाव आयोग) पर ही चीटिंग का आरोप लगाने लगते हैं. शाह ने यह भी कहा कि राहुल गांधी अगले 20 वर्षों तक देश के पीएम नहीं बन पाएंगे, जिस पर कांग्रेस ने जवाब दिया कि 2029 में बीजेपी की विदाई तय है.

1 नवंबर को मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च

भले ही शुक्रवार का कार्यक्रम टल गया हो, लेकिन विपक्ष ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली महारैली के लिए अपना पूरा रोडमैप सामने रख दिया है. राहुल गांधी ने बताया कि दोपहर 12 बजे विपक्षी सांसद और दिग्गज नेता मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के जंक्शन पर इकट्ठा होकर मार्च शुरू करेंगे. इसी जंक्शन से सभी विपक्षी नेता विशेष बसों में सवार होकर एक साथ रामलीला मैदान के लिए रवाना होंगे.

दिल्ली के व्यापारियों की बढ़ी टेंशन

एक तरफ जहां दिल्ली का सियासी पारा गर्म है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के कारोबारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) इस महारैली को टालने के लिए राहुल गांधी को पहले ही तीन पत्र लिख चुका है. कोई जवाब न मिलने पर अब CTI ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भेजा है.

कारोबार पर असर की आशंका

CTI का कहना है कि सेंट्रल दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बाजारों में त्योहारों (दीपावली सीजन) के कारण भारी भीड़ है. इस रैली और मार्च से ट्रैफिक पूरी तरह बाधित होगा, जिससे व्यापारियों के व्यापार और आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा.

तारीख बदलने की मांग

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने साफ किया कि उनका संगठन विपक्ष की रैली का विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि वे सिर्फ त्योहारों के मद्देनजर इसे दीपावली के बाद आयोजित करने की अपील कर रहे हैं. हालांकि, सोनिया गांधी की ओर से अभी इस पत्र का कोई जवाब नहीं आया है.

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