Manisha Bhanwala: भारतीय पहलवान मनीषा भनवाला ने शुक्रवार 30 अक्टूबर को इतिहास रच दिया। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।
कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में खेले गए फाइनल मुकाबले में 29 वर्षीय मनीषा ने अमेरिका की ए. एलिजाबेथ नेट को 8-6 से हराकर खिताब अपने नाम किया। यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा, क्योंकि पहले राउंड में मनीषा पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए जीत हासिल की।
हालांकि, मनीषा ने 59 किलोग्राम भार वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की है, जो ओलिंपिक की भार श्रेणी में शामिल नहीं है। इसके बावजूद उनकी यह जीत भारतीय कुश्ती के लिए बेहद खास है। इससे पहले किसी भी भारतीय महिला पहलवान ने विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल नहीं जीता था।
विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला
* मनीषा की इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय महिला कुश्ती ने एक नया मुकाम हासिल किया है।
* 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उन्होंने अमेरिका की ए. एलिजाबेथ नेट को 8-6 से हराया।
* वे अमेरिकन चैंपियन हैं और उनके खिलाफ मुकाबला आसान नहीं था। फाइनल के पहले राउंड के अंत तक मनीषा 1-6 से पीछे चल रही थीं।
* ऐसा लग रहा था कि मुकाबला उनके हाथ से निकल सकता है, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
* दूसरे चरण में उन्होंने लगातार हमले किए और मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरकार मनीषा ने 8-6 से जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल हासिल किया।
नीलम और काजल ने भी जीते सिल्वर मेडल
* इस विश्व चैंपियनशिप में भारतीय महिला पहलवानों का प्रदर्शन शानदार रहा। मनीषा भनवाला के अलावा दो अन्य भारतीय पहलवानों ने भी फाइनल तक का सफर तय किया।
* नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम भार वर्ग में और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम भार वर्ग में फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, दोनों को खिताबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।
* खास बात यह है कि नीलम और काजल दोनों ने ओलंपिक भार श्रेणियों में पदक जीते। इस तरह भारतीय महिला पहलवानों ने प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन किया।
भारतीय महिला कुश्ती का पुराना रिकॉर्ड
* इस टूर्नामेंट से पहले अंशु मलिक विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली इकलौती भारतीय महिला पहलवान थीं। उन्होंने 2021 में 57 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था।
* भारत की दिग्गज पहलवान विनेश फोगाट ने विश्व चैंपियनशिप में दो ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। वहीं, अंतिम पंघाल भी दो ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। खास बात यह है कि विनेश और अंतिम के दोनों पदक ओलंपिक भार श्रेणियों में आए हैं।
* पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती की बात करें तो दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार भारत के इकलौते विश्व चैंपियन हैं। उन्होंने 2010 में मॉस्को में आयोजित विश्व चैंपियनशिप के 66 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था।
* बजरंग पुनिया भी 2018 में बुडापेस्ट में हुई विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सिल्वर मेडल मिला था।
Asian Games के बाद मनीषा भनवाला की शानदार वापसी
* मनीषा की यह जीत भारतीय महिला कुश्ती के लिए बड़े बदलाव का संकेत है। इससे पहले एशियाई खेलों में भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। उस प्रतियोगिता में केवल अंतिम पंघाल ही पदक जीत पाई थीं। उन्होंने 53 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल हासिल किया था।
* एशियाई खेलों में मनीषा ने 57 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया था। यह ओलंपिक की भार श्रेणी है। हालांकि, क्वार्टर फाइनल में उन्हें जापान की अकारी फुजिनामी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।
* इसके बाद विश्व चैंपियनशिप के लिए मनीषा ने 59 किलोग्राम भार वर्ग में उतरने का फैसला किया। उनका यह फैसला सही साबित हुआ और उन्होंने इसी वर्ग में विश्व खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।
फाइनल तक का सफर रहा शानदार
* मनीषा ने फाइनल तक पहुंचने के रास्ते में कई मजबूत पहलवानों को हराया। उन्होंने सबसे पहले विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को शिकस्त दी।
* इसके बाद उन्होंने मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखू को हराया। वहीं, कजाकिस्तान की अल्तिन शागायेवा को पिन करके उन्होंने खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की की।
* फाइनल में उनका सामना अमेरिका की पैन अमेरिकन चैंपियन ए. एलिजाबेथ नेट से हुआ। शुरुआती पिछड़ने के बावजूद मनीषा ने शानदार खेल दिखाया और 8-6 से मुकाबला जीत लिया।
कौन हैं मनीषा भनवाला? हरियाणा के जींद से रखती हैं ताल्लुक
* 29 वर्षीय मनीषा भनवाला हरियाणा के जींद की रहने वाली हैं। वह लंबे समय से कुश्ती में सक्रिय हैं और एक अनुभवी पहलवान मानी जाती हैं।
* अपने करियर में उन्होंने 57 किलोग्राम से लेकर 65 किलोग्राम तक के अलग-अलग भार वर्गों में हिस्सा लिया है।
* वह अब तक तीन विश्व चैंपियनशिप में भी हिस्सा ले चुकी हैं। अपने इस अनुभव का फायदा उठाते हुए उन्होंने शुक्रवार को करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की।
* मनीषा की यह जीत न सिर्फ उनके व्यक्तिगत करियर के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में भी एक नया अध्याय है।