Dhanteras 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस का पावन पर्व आज 6 नवंबर को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. इस खास दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने का बहुत ही विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली हमेशा के लिए बनी रहती है. हर कोई चाहता है कि उसके घर में कभी भी धन-धान्य की कोई कमी न हो और इसके लिए लोग पूरी तैयारी करते हैं. आइए जानते हैं कि इस पवित्र अवसर पर आपको पूजा की तैयारी कैसे करनी चाहिए और इसका सही तरीका क्या है ताकि आपके जीवन में भी मां की कृपा बनी रहे.
धनतेरस 2026 का शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
* धनतेरस पूजा तिथि: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
* धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक
* कुल अवधि: 01 घंटा 56 मिनट
* प्रदोष काल: शाम 05:32 बजे से 08:09 बजे तक
* वृषभ काल: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक
भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर जी का पूजन विधान
दीपक प्रज्वलित करने के बाद आपको भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, धन्वंतरि जी और कुबेर जी का पूजन पूरे मन से शुरू करना चाहिए. इन सभी देवी-देवताओं का स्मरण करने से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और वातावरण बहुत पवित्र बन जाता है. इसके बाद आपको पूरी श्रद्धा के साथ भगवान को फूल, मीठी मिठाई और ताजे फल अर्पित करने चाहिए जो पूजा का अहम हिस्सा हैं. जब आप अपनी पूरी आस्था के साथ इन चीजों को भगवान को अर्पित करते हैं, तो वे आपकी हर मनोकामना को बहुत जल्दी पूरा कर देते हैं. इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी जल्दबाजी के बहुत ही शांत भाव से करना चाहिए ताकि आपको इस पावन दिन की पूजा का पूरा फल मिल सके.
पूजा के लिए जरूरी सामग्री और सही तैयारी
* सामग्री एकत्र करना: इस खास दिन पर पूजा की पूरी सामग्री पहले से ही तैयार करके रखनी चाहिए ताकि विधि में किसी भी प्रकार की कोई रुकावट न आए.
* पवित्र वस्तुओं का संयोजन: पूजा के लिए आपको दीपक, फूल, रोली, अक्षत, मिठाई, फल और धूप-बत्ती जैसी सभी पवित्र चीजों को एक साथ व्यवस्थित करना होगा.
* स्थान की स्वच्छता और दीपक जलाना: सबसे पहले आपको अपने घर के पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करनी चाहिए और फिर वहां पर घी का एक सुंदर दीपक जलाना चाहिए.
धनतेरस की सरल और संपूर्ण पूजा विधि
* स्थान की सफाई और दीपक जलाना: सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें और उसके बाद वहां पर घी या तेल का एक सुंदर दीपक जलाएं.
* देवी-देवताओं को याद करना: इसके बाद प्रथम पूज्य भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, धन्वंतरि जी और भगवान कुबेर का ध्यान करें और उनका आह्वान करें.
* तिलक और वस्त्र अर्पण: सभी देवों को जल अर्पित करने के बाद रोली और अक्षत से तिलक करें तथा उन्हें वस्त्र स्वरूप कलावा या मौली अर्पित करें.
* पुष्प और भोग अर्पण: भगवान को ताजे फूल, धूप-बत्ती, मौसमी फल और मिठाई का भोग पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित करें.
* कथा और आरती: पूजा के दौरान धनतेरस की कथा का श्रवण करें और अंत में सभी देवी-देवताओं की आरती करके पूजा संपन्न करें.
* मुख्य द्वार पर दीपक रखना: शाम के समय अपने घर के मुख्य द्वार पर एक मुखी या चार मुखी दीपक जलाकर जरूर रखें.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. बिंदास बोल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है.