PM Modi Mauritius Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय यात्रा के तहत मॉरीशस पहुंचे हैं. यह उनकी 2015 के बाद मॉरीशस की दूसरी यात्रा है. इस दौरान PM मोदी मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह के चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल होंगे, जो भारत और मॉरीशस के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने का काम करेगा. इतना ही नहीं मॉरीशस के साथ बढ़ते संबंधों से चीन को भी एक बड़ा झटका लग सकता है.
मॉरीशस की कुल 1.2 मिलियन आबादी में लगभग 70% लोग भारतीय मूल के हैं. ऐसे में यह ऐतिहासिक संबंध दोनों देशों के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करता है. मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस 12 मार्च की तारीख का संबंध भारत से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि 1901 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटते समय यहां रुके थे. उन्होंने भारतीय प्रवासी कामगारों को शिक्षा, राजनीतिक सशक्तिकरण और भारत से जुड़े रहने का संदेश दिया था. इसी के सम्मान में मॉरीशस 12 मार्च को राष्ट्रीय दिवस मनाता है.
चीन के बढ़ते प्रभाव पर लगेगी लगाम
भारत और मॉरीशस के संबंध कई दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं. हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के चलते भारत मॉरीशस जैसे द्वीप देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है. चीन के अलावा यूरोप, खाड़ी देश, रूस, ईरान और तुर्की भी इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे हिंद महासागर एक जियो पॉलिटिकल कंप्टीशन का सेंटर बन गया है. ऐसे में भारत के लिए मॉरीशस के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है.
सुरक्षा और व्यापार सहयोग में बढ़ोतरी
इस यात्रा के दौरान भारत और मॉरीशस समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक तकनीकी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जिससे व्हाइट-शिपिंग सूचना साझा करने की प्रणाली लागू होगी. यह समझौता हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाएगा और मॉरीशस के व्यापार मार्गों की रक्षा करने में मदद करेगा. व्यापारिक दृष्टिकोण से भी दोनों देशों के बीच गहरे संबंध हैं. वित्त वर्ष 2023-24 में मॉरीशस भारत में फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट (FDI) का दूसरा सबसे बड़ा सोर्स रहा है.
मॉरीशस को ऐसे किया मजबूत
2015 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान अगालेगा द्वीप के परिवहन ढांचे को मजबूत करने के लिए समझौता (MoU) किया गया था. यह द्वीप मॉरीशस के उत्तर में 1,100 किलोमीटर दूर है और अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण बेहद महत्वपूर्ण भी है. फरवरी 2024 में भारत और मॉरीशस ने अगालेगा द्वीप पर हवाई पट्टी और जेटी परियोजना का उद्घाटन किया, जिससे वहां के निवासियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और मॉरीशस की रक्षा क्षमताएं भी मजबूत होंगी. हालांकि, मॉरीशस सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना का कोई सैन्य उद्देश्य नहीं है और यह पूरी तरह से आर्थिक व बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है.
मॉरीशस की मदद के भारत हमेशा आगे
भारत ने पिछले एक दशक में मॉरीशस में लगभग 1.1 बिलियन डॉलर की विकास सहायता दी है, जिसमें मेट्रो एक्सप्रेस, छोटे जन-हितकारी परियोजनाएं सहायता शामिल हैं. इसके अलावा, कोविड-19 महामारी, वाकाशियो तेल रिसाव संकट और साइक्लोन चिडो जैसी आपदाओं के दौरान भी भारत मॉरीशस की मदद के लिए सबसे पहले आगे आया.
व्यापार और सुरक्षा के अलावा, भारत और मॉरीशस स्पेस सेक्टर में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं. साल नवंबर 2023 में दोनों देशों ने ज्वाइंट सैटेलाइट डेवलप्मेंट के लिए एक समझौता किया. इसके अलावा, भारत मॉरीशस के छात्रों को तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के तहत ट्रेनिंग भी देता है. साल 2002-03 के बाद से लगभग 4,940 मॉरीशस नागरिकों को इस कार्यक्रम के तहत ट्रेन किया गया है.
अगालेगा द्वीप क्या अहम है?
मॉरीशस से 1,100 किलोमीटर उत्तर में स्थित अगालेगा द्वीप भारतीय दक्षिणी तट से निकटता के कारण सामरिक महत्व रखता है. फरवरी 2024 में, भारत और मॉरीशस ने संयुक्त रूप से द्वीप पर हवाई पट्टी और जेटी परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिससे उनके द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती मिली. अगालेगा द्वीप का विकास सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं है. इसके बजाय, द्वीप के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. इस परियोजना के तहत, भारत की ओर से आर्थिक रूप से समर्थित छह अन्य परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया गया, जिससे अगालेगा द्वीप में बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक विकास को और बढ़ावा मिला.
हिंद महासागर क्षेत्र भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है, जहां विभिन्न देश प्रभाव के लिए होड़ कर रहे हैं. यूरोप, खाड़ी देश, रूस, ईरान और तुर्की सभी इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं, जिससे भारत के लिए पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाना जरूरी हो गया है.