India-US Trade Deal: ट्रंप का बड़ा बयान, “भारत किसी को घुसने नहीं देता..मगर हम “काफी कम टैरिफ” पर समझौता करने जा रहे हैं”

Bindash Bol

India-US Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में जल्द ही एक व्यापार समझौता होने जा रहा है, जिसमें “काफी कम टैरिफ” (शुल्क) होंगे, जिससे दोनों देशों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा।

ट्रंप ने कहा, भारत के साथ अलग तरह का समझौता

ट्रंप ने दावा करते कहा, “मुझे लगता है कि हमारा भारत के साथ समझौता होने जा रहा है… और यह एक अलग तरह का समझौता होगा। यह ऐसा समझौता होगा, जिसमें हम वहां जाकर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। फिलहाल, भारत किसी को भी अंदर नहीं घुसने देता। मुझे लगता है कि भारत अब ऐसा करेगा और अगर ऐसा हुआ तो हमारा कम टैरिफ वाला समझौता हो जाएगा।” बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, जिसकी समयसीमा 9 जुलाई को समाप्त हो रही है। अब यह डील 90-दिवसीय टैरिफ-वृद्धि रोक के कारण बेहद अहम मानी जा रही है।

ट्रेड डील को लेकर भारत भी अलर्ट

अमेरिका के साथ बेहद अहम मानी जा रही इस ट्रेड डील को लेकर भारत भी बहुत अलर्ट है। भारत ने कृषि मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत के मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन में अपनी उपस्थिति बढ़ा चुका है। पहले यह बैठकें गुरुवार और शुक्रवार को तय थीं, लेकिन अब दोनों देश जल्दबाज़ी में एक अंतरिम व्यापार समझौता अंतिम रूप देने के लिए इन वार्ताओं को बढ़ा रहे हैं। इसकी वजह यह भी है कि यदि 9 जुलाई तक कोई समझौता नहीं होता, तो दोनों देशों के बीच निलंबित 26% रिटैलिएट्री टैरिफ स्वतः लागू हो जाएंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ऐसे में “इन व्यापार वार्ताओं की विफलता 26% टैरिफ ढांचे की तुरंत बहाली को ट्रिगर करेगी।”

भारत का यह सख्त रुख उसकी कृषि प्रणाली की राजनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाता है। देश का खेतीबारी सिस्टम मुख्य रूप से छोटे किसानों पर आधारित है, जिनके पास सीमित ज़मीन होती है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में कोई भी रियायत आर्थिक और राजनीतिक रूप से मुश्किल फैसला होता है।

क्या चाहता है अमेरिका

अमेरिका चाहता है कि भारत कृषि उत्पादों-जैसे सेब, ट्री नट्स और जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों व डेयरी उत्पादों पर भी शुल्क कम करे। हालांकि भारत ने आज तक किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में अपने डेयरी क्षेत्र को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं खोला है और वह अमेरिका के दबाव में आकर इस नीति को बदलने को अब भी तैयार नहीं लगता। वहीं भारत की मांग है कि उसके श्रम-प्रधान निर्यात उत्पादों — जैसे वस्त्र, परिधान, रत्न-आभूषण, चमड़े के सामान और कृषि उत्पाद (जैसे झींगे, तिलहन, अंगूर और केले) — को अमेरिका में प्राथमिकता प्राप्त पहुंच दी जाए।

500 बिलियन डॉलर तक व्यापार को बढ़ाने का लक्ष्य


भारत और अमेरिका अपने मौजूदा व्यापार को 191 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकार 500 बिलियन यूएस डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। इन तात्कालिक वार्ताओं से आगे, दोनों देश एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसका पहला चरण 2024 की शरद ऋतु तक पूरा करने का लक्ष्य है। ऐसे में दोनों देशों के बीच होने वाले इस बड़े समझौते पर दुनिया के अन्य देशों की भी बड़ी नजर है।

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