Mallikarjuna Jyotirlinga: मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में एक साथ विराजित हैं शिव-पार्वती

Sanat Kumar Dwivedi

गणेश जी की वजह से शिव-पार्वती से नाराज होकर कार्तिकेय स्वामी ने श्रीशैल पर्वत पर बनाया अपना निवास

Mallikarjuna Jyotirlinga: 12 ज्योतिर्लिंगों में दूसरा है मल्लिकार्जुन। ये मंदिर आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के किनारे श्रीशैल (श्रीपर्वत) पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर को दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है। माना जाता है कि जो भक्त इस मंदिर में शिव पूजा करता है, उसे अश्वमेघ यज्ञ से मिलने वाले पुण्य के बराबर पुण्य मिलता है। जानिए मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से जुड़ी खास बातें…

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का स्थान

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर स्थित है, जो नल्लामला पर्वतमाला का एक हिस्सा है। यह स्थान कृष्णा नदी के तट पर स्थित है और प्रकृति की गोद में बसा हुआ है। श्रीशैलम का यह मंदिर एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है और इसकी प्राकृतिक सुंदरता भक्तों को आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करती है। यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी विशेष माना जाता है।

पुराणों में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का महत्व

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इसे भगवान शिव और देवी पार्वती का स्थायी निवास स्थान माना गया है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यहां शिव और शक्ति, दोनों की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा करने से भक्तों के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान साधना, ध्यान और आत्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

गणेश जी की वजह से शिव-पार्वती से नाराज हो गए थे कार्तिकेय

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा शिव-पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय स्वामी से जुड़ी है। जब गणेश जी और कार्तिकेय स्वामी विवाह योग्य हुए तो एक दिन शिव जी और देवी पार्वती ने सोचा कि अब इन दोनों पुत्रों का विवाह करा देना चाहिए।

दोनों पुत्रों के विवाह का विचार आने के बाद शिव-पार्वती ने कार्तिकेय स्वामी और गणेश जी को बुलाया। शिव जी ने दोनों पुत्रों से कहा कि आप दोनों में से जो इस संसार की परिक्रमा करके पहले लौट आएगा, हम उसका विवाह पहले कराएंगे।

शिव जी शर्त सुनते ही कार्तिकेय स्वामी अपने वाहन मोर पर बैठकर तुरंत उड़ गए। गणेश जी अपने वाहन चूहे पर बैठे और कुछ सोचने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर ली। गणेश जी ने शिव-पार्वती से कहा कि मेरे लिए तो आप दोनों ही पूरा संसार हैं।

गणेश जी की इस बात से शिव-पार्वती बहुत प्रसन्न हो गए। उन्होंने गणेश जी का विवाह करा दिया। इसके कुछ समय बाद कार्तिकेय स्वामी संसार की परिक्रमा करके लौट आए। उन्होंने देखा कि गणेश जी का तो विवाह हो गया है।

कार्तिकेय स्वामी को पूरी बात मालूम हुई तो वे क्रोधित हो गए। उन्हें लगा कि माता-पिता यानी शिव-पार्वती ने उनके साथ सही नहीं किया है। इस बात क्रोधित होकर कार्तिकेय स्वामी ने कैलाश पर्वत छोड़ दिया और क्रौंच पर्वत पर चले गए। ये क्रौंच पर्वत दक्षिण भारत में कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है, इसे श्रीशैल और श्रीपर्वत भी कहा जाता है।

कार्तिकेय स्वामी से मिलने श्रीशैल पर्वत आते हैं शिव-पार्वती

नाराज कार्तिकेय को मनाने की शिव जी और देवी पार्वती ने बहुत कोशिश की, लेकिन कार्तिकेय नहीं माने। जब शिव-पार्वती को ये लगा कि कार्तिकेय अब कैलाश लौटकर नहीं आएंगे तो उन्होंने तय कि अब से वे ही समय-समय पर कार्तिकेय से मिलने जाएंगे। माना जाता है कि इसके बाद से शिव-पार्वती वेष बदलकर कार्तिकेय को देखने पहुंचते थे। जब ये बात कार्तिकेय को मालूम हुई तो उन्होंने वहां एक शिवलिंग स्थापित किया, जिसमें शिव-पार्वती ज्योति रूप में विराजित हो गए। एक मान्यता ये भी है कि हर अमावस्या पर शिव जी और पूर्णिमा पर देवी पार्वती कार्तिकेय से मिलने श्रीपर्वत पर आती हैं। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में मल्लिका का अर्थ है पार्वती और अर्जुन का अर्थ है शिव।

ऐसे पहुंच सकते हैं मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना चाहते हैं तो देशभर से कृष्णा जिले कि लिए आवागमन के कई साधन आसानी से मिल जाते हैं। यहां का करीबी एयरपोर्ट हैदराबाद का राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यहां से बस, टैक्सी की मदद से मंदिर पहुंच सकते हैं। कृष्णा जिले का करीबी स्टेशन मार्कापुर है, यहां के लिए देशभर के सभी बड़े शहरों से ट्रेन मिल सकती है। सड़क मार्ग से भी आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है।

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