Cyber Crime : नाम अब्दुल है मेरा …19 रुपया डालो, नहीं तो काट देंगे पानी का कनेक्शन… पैसे भेजते ही साफ हो गए 8.6 लाख

Bindash Bol

Cyber Crime : आपने भी सुना होगा शान पिक्चर का एक गाना था नाम अब्दुल है मेरा सब की खबर रखता हूं. यही हाल और इसी तर्ज पर साइबर अपराधी काम कर रहे हैं. साइबर अपराध पिछले तीन-चार वर्षों में वैश्विक समस्या बन चुका है. भय, लालच व अज्ञानतावश बड़ी संख्या में लोग इसका शिकार हो रहे हैं. ठगी के शिकार लोगों की फेहरिस्त में उद्यमी-कारोबारी, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी से लेकर सरकारी कर्मचारी, पुलिस महकमे के लोग और बैंक अधिकारी तक हैं. ऐसा ही एक मामला आज झारखंड की राजधानी रांची में सामने आया.

‘सुनो! तुम्हारा पानी का कनेक्शन काट रहे हैं, जल्दी से पानी का बिल भुगतान करो नहीं तो तुम्हारे घर का पानी बंद कर रहे हैं…’ फोन पर इतनी बात सुनने के बाद युवक के पास एक मैसेज आया और उस पर क्लिक करते ही खाते से 8.6 लाख रुपये साफ हो गए. पानी बिल के नाम पर साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए एक नायाब तरीका निकाला. उन्होंने इसे अपनाते हुए रांची के लालपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले अंकुर महेश्वरी से 8.60 लाख रुपए की ठगी की.

इस संबंध में पीड़ित अंकुर महेश्वरी ने रांची के साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. ठगी के शिकार पीड़ित ने पुलिस को बताया कि 12 जुलाई को उन्हें उनके मोबाइल फोन के व्हाट्सएप एप्लीकेशन पर एक मैसेज प्राप्त हुआ था. इस मैसेज में रांची नगर निगम का लोगो लगा हुआ था. उसमें लिखा गया था कि आपका पानी का बिल बकाया है. अगर समय रहते पानी के बिल का भुगतान नहीं किया गया तो रात 9:00 के बाद पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा.

साथ ही उस मैसेज में एक मोबाइल नंबर भी दिया गया था, जिस पर अधिक जानकारी के लिए संपर्क करने की बात लिखी गई थी. रांची नगर निगम के नाम से पानी का कनेक्शन काटने से संबंधित मैसेज देख अंकुर महेश्वरी परेशान हो गए. वो साइबर अपराधियों के झांसे में आ गए. उन्होंने मोबाइल के व्हाट्सएप पर भेजे गए मैसेज में दिए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया.

मोबाइल पर फोन करते ही सामने वाले युवक ने खुद को रांची नगर निगम का प्रतिनिधि बताया. उसने अंकुर महेश्वरी को झांसे में लेते हुए कहा कि आपके फोन पर एक लिंक भेजा जा रहा है. उस एप्लीकेशन को डाउनलोड कर लीजिए और केवल 19 रुपए का भुगतान कर दीजिए. इससे आपका प्रोफाइल अपडेट हो जाएगा.

अपराधियों के कहे में आकर पीड़ित से एप्लीकेशन से पहले 19 रुपए का भुगतान किया. कुछ देर के बाद अलग-अलग किस्तों में उनके खाते से 8.60 लाख रुपए गायब हो गए. इधर जैसे ही खाते से एक के बाद एक पैसे निकलने के मैसेज आने लगे तो पीड़ित अंकुर महेश्वरी को शक हुआ.

उन्हें खुद के साइबर ठगी के शिकार होने की जानकारी मिली. उन्होंने तत्काल रांची के साइबर थाना में पहुंचकर पानी बिल के नाम पर 8.60 लाख की साइबर ठगी की एफआईआर दर्ज कराई. साइबर थाने की पुलिस पूरे मामले की तहकीकात में जुट गई. फिलहाल मामले में आरोपियों की तलाश की जा रही है.

सावधान ! ये हैं ठगी के माध्यम

  • सेक्सटार्शन
  • ओएलएक्स
  • कस्टमर केयर
  • डिजिटल मीडिया
  • ओटीपी स्कैम
  • केवाईसी
  • बिजली बिल
  • कौन बनेगा करोड़पति के नाम पर
  • लोन एप
  • मैट्रीमोनियल साइट आदि

साइबर ठगी से बचने के लिए विशेषज्ञ के टिप्स

विशेषज्ञों ने साइबर क्राइम से बचने के लिए निम्न उपाय सुझाए हैं. ..

  • वेबसाइट का यूआरएल एचटीटीपीएस से शुरू हो रहा हो। प्राइमरी की जगह सेकेंडरी ई-मेल का उपयोग करें।
  • पासवर्ड में अपर व लोअर केस, नंबर व स्पेशल कैरेक्टर हों, 45 दिन में बदलें।
  • फ्री सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने से पूर्व वेबसाइट होस्टिंग का पता लगा लें।
  • ऑनलाइन बैंकिंग का यूआरएल मैनुअली टाइप करें। अज्ञात ईमेल में आया अटैचमेंट या लिंक क्लिक न करें।
  • आधिकारिक एप स्टोर से ही किसी एप को डाउनलोड करें।
  • अनजान व्यक्ति के कहने पर रिमोट एक्सेस एप का प्रयोग न करें।
  • शॉपिंग और बैंकिंग के लिए फ्री या असुरक्षित वाईफाई का प्रयोग न करें।
  • अनजान नंबरों से प्राप्त वीडियो कॉल रिसीव न करें।

साइबर ठगी के टॉप-10 केंद्र

भरतपुर (राजस्थान), मथुरा (उत्तर प्रदेश), नूंह (हरियाणा), देवघर (झारखंड), जामताड़ा (झारखंड), गुरुग्राम (हरियाणा), अलवर (राजस्थान), बोकारो (झारखंड), कर्म तंड (झारखंड), गिरिडीह (झारखंड)।

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