Bheemashankar Jyotirlinga : जहां सूर्योदय के बाद पूजा करने से मिलती है हर पाप से मुक्ति

Sanat Kumar Dwivedi

Bheemashankar Jyotirlinga : महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग. यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे से 110 किलोमीटर दूर स्थित है. यहां के स्थानीय लोग इस मंदिर को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जानते हैं. इस मंदिर का ये नाम पड़ने के पीछे इस मंदिर के ज्योतिर्लिंग का काफी बड़ा और मोटा होना है. भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों में से भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग छटा ज्योतिर्लिंग माना गया है. मान्यता के अनुसार इन 12 जगहों पर भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर दर्शन दिए थे. इस विषय में हमें अधिक जानकारी दे रहे हैं छत्तीसगढ़ रायपुर निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित सनत कुमार द्विवेदी.

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले से 110 किलोमीटर दूर स्थित है. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के बारे में 1 रोचक तथ्य है कि भारतवर्ष में भीमाशंकर नाम के दो प्रसिद्ध मंदिर थे. एक महाराष्ट्र के पुणे में दूसरा आसाम के कामरूप जिले में स्थित है. मान्यताओं के अनुसार महाराष्ट्र के भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के मंदिर का निर्माण छत्रपति महाराज शिवाजी ने करवाया था.

शिव पुराण में उल्लेख मिलता है कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में सूर्योदय के बाद जो भी सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा अर्चना करता है उसे उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है. इसके अलावा पुराणों में यह भी उल्लेख है कि राक्षस भीमा और भगवान शंकर के बीच हुई लड़ाई से भगवान शिव के शरीर से निकले पसीने की बूंद से ही भीमारथी नदी का निर्माण हुआ है.

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग पर्वत पर स्थित है रोचक बात यह है कि यहां इन पहाड़ियों के आसपास जंगलों में जो वनस्पतियां पाई जाती हैं वह भारतवर्ष में अन्य कहीं पर भी नहीं मिलती और यहां कई प्रकार के प्राणियों की दुर्लभ प्रजातियां भी है.

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग वर्षा ऋतु में पूरी तरह से जल में डूब जाता है. इस मंदिर के पास ही कमलजा मंदिर भी है जो कि भारत वर्ष में बहुत प्रसिद्ध मंदिर माना गया है. कमलजा माता को माता पार्वती का अवतार ही माना जाता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. बिंदास बोल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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