Baidyanath Jyotirlinga : कैसे रावण की भक्ति ने जन्म दिया बैद्यनाथ धाम को

Sanat Kumar Dwivedi

Baidyanath Jyotirlinga : भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग नौवां ज्योतिर्लिंग है। यहां पर शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रावण मास में लाखों कांवड़िए यहां जल चढ़ाने आते हैं। बैद्यनाथ भूमि को चिताभूमि और यहाँ के ज्योतिर्लिंग को कामना लिंग भी कहा जाता है यानि यहाँ की पूजा से विशेष इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना से जुड़ी एक दिलचस्प कथा है। कथा के अनुसार, एक बार रावण के मन में इच्छा हुई कि वो अपने प्रिय भगवान् शिवजी को अपने राज्य लंका में स्थापित करे। इसके लिए उसने घोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया। रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अपने नौ सिर काटकर यज्ञ में अर्पित कर दिए। जब वह दसवां सिर काटने जा रहा था, तभी भगवान शिव प्रकट हो गए और रावण को वरदान में अपना आत्मलिंग (शिवलिंग) दिया। साथ ही यह शर्त रखी कि यह शिवलिंग जहाँ एक बार जमीन पर रखा जाएगा, वहीं स्थायी रूप से स्थापित हो जाएगा।

विष्णुजी की लीला और लिंग की स्थापना

अगर रावण वो शिवलिंग लंका में स्थापित कर लेता, तो अनर्थ हो जाता। रावण की इसके पीछे मंशा भी ठीक नहीं थी। जब भगवान विष्णु रावण की चाल को समझ गए, तो उन्होंने देवताओं के हित के लिए एक योजना बनाई। जब रावण आत्मलिंग को लेकर लंका जा रहा था, तब देवताओं ने वरुण देव को कहा कि रावण को लघुशंका की आवश्यकता हो। रावण जब लघुशंका के लिए जाने लगा, तो उसे एक ग्वाला दिखा। वो ग्वाला भगवान विष्णु थे। रावण ने उस ग्वाले से शिवलिंग पकड़ने की विनती की और लघुशंका के लिए चला गया। उसके जाते ही विष्णु जी ने शिवलिंग वहीं जमीन पर रख दिया, जिससे वो वहीं स्थापित हो गया।

रावण थोड़ी देर में लौटा, लेकिन तब तक ग्वाला लिंग को ज़मीन पर रख चुका था। रावण ने लाख कोशिशें कीं, पर वह शिवलिंग ज़मीन से हिला नहीं सका। क्रोध में आकर उसने उसे दबाने की कोशिश की, जिससे लिंग का कुछ हिस्सा ज़मीन में धँस गया। लेकिन तब से यहां बैद्यनाथ के रूप में शिवजी वास करने लगे और इसी रूप में उन्हें पूजा जाने लगा।

इस स्थान का नाम बैद्यनाथ क्यों पड़ा?

जब रावण के कटे हुए सिरों की पीड़ा को भगवान शिव ने ठीक किया, तब वे वैद्य (चिकित्सक) रूप में प्रकट हुए थे। इस कारण से इस स्थान को “बैद्यनाथ” कहा गया। यहाँ जो भी श्रद्धापूर्वक भगवान श्री वैद्यनाथ का अभिषेक करता है, उसका शारीरिक और मानसिक रोग अतिशीघ्र नष्ट हो जाता है। इसलिए वैद्यनाथधाम में रोगियों व दर्शनार्थियों की विशेष भीड़ दिखाई पड़ती है।

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