Sriram : लंका जाते समय श्री राम ने बालू से शिवलिंग बनाकर की थी महादेव की पूजा

Sanat Kumar Dwivedi

Sriram : देशभर में भगवान शिव के 12 ज्‍योतिर्लिंग स्‍थापित हैं और सभी से कोई न कोई पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। आज हम बात करने जा रहे हैं हिंदुओं की आस्‍था के केंद्र रामेश्वरम धाम के बारे में। भगवान शिव के ज्‍योतिर्लिंग के साथ ही यह हिंदू धर्म के प्रसिद्ध चार धाम में से एक है। रामेश्वरम के बारे में कहा जाता है कि भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले खुद अपने हाथों से इस शिवलिंग की स्‍थापना की थी। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने नल और नील के माध्‍यम से विश्‍व का पहला सेतु बनवाया था। राम ने पहले शिवलिंग पर पूजा-अर्चना की और फिर नल-नील के बनाए पुल से होते हुए लंका पर आक्रमण किया।

लंका पर विजय प्राप्‍त करने के लिए भगवान राम ने समुद्र किनारे शिवलिंग बनाकर शिवजी की पूजा की थी। रामायण के अनुसार, भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान शिव की पूजा करने का संकल्प लिया था। चूकिं वहां कोई शिवलिंग स्थापित नहीं था, इसलिए उन्होंने बालू से एक शिवलिंग बनाया और विधि-विधान से उसकी पूजा की।
इससे प्रसन्‍न होकर भगवान शिव ने उन्‍हें विजयश्री का आशीर्वाद दिया था। आशीर्वाद के साथ ही श्रीराम ने शिवजी से अनुरोध किया कि जनकल्‍याण कि लिए वे सदैव ज्‍योतिर्लिंग के रूप में यहां निवास करें। उनकी इस प्रार्थना को भोले बाबा ने सहर्ष स्‍वीकार किया और तब से रामेश्वरम में इस शिवलिंग की पूजा हो रही है। यानी यह शिवलिंग त्रेतायुग में स्थापित किया गया। इस घटना के बाद, यह स्थान रामेश्वरम के रूप में प्रसिद्ध हुआ और यहां स्थापित शिवलिंग को रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है।

सावन के महीने में रामेश्वरम में जलाभिषेक करने का बहुत महत्‍व है। मान्‍यता तो यह भी है कि रामेश्‍वरम में शिव की पूजा विधिवत करने से ब्रह्महत्‍या जैसे दोष से भी मुक्ति मिल जाती है। रामेश्‍वरम को दक्षिण भारत का काशी कहा जाता है। यहां की धरती को भी भोलेबाबा और मर्यादा पुरुषोत्‍तम श्रीराम की कृपा से मोक्ष देने का आशीर्वाद प्राप्‍त है।

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