Sawan : भगवान शंकर को सर्वाधिक प्रिय श्रावण मास का चौथा व अंतिम सोमवार चार अगस्त यानी आज है। सावन के सोमवार का बहुत अधिक महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन भोलेशंकर को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा- अर्चना की जाती है। सावन के अंतिम सोमवार पर कई तरह के शुभ संयोग बन रहे हैं। सुबह 7 बजकर 4 मिनट से सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक ऐन्द्र योग, रवि योग व सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। दोपहर से (प्रदोष काल एवं रात्रिकाल) में एकादशी तिथि भी लग जाएगी। आइए जानते हैं सावन के अंतिम सोमवार पर कैसै करें पूजा-अर्चना….
पूजा-विधि
इस पावन दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। दीप जलाने के बाद सभी देवी- देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें। शिवलिंग में गंगा जल और दूध चढ़ाएं। भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें। भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव की आरती करें और भोग भी लगाएं। इस दिन भगवान शिव का अधिक से अधिक ध्यान करें।
पूजा के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त 04:20 ए एम से 05:02 ए एम
- प्रातः सन्ध्या 04:41 ए एम से 05:44 ए एम
- अभिजित मुहूर्त 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
- विजय मुहूर्त 02:41 पी एम से 03:35 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त 07:10 पी एम से 07:31 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या 07:10 पी एम से 08:13 पी एम
- अमृत काल 01:47 ए एम, अगस्त 05 से 03:32 ए एम, अगस्त 05
- निशिता मुहूर्त 12:06 ए एम, अगस्त 05 से 12:48 ए एम, अगस्त 05
- सर्वार्थ सिद्धि योग 05:44 ए एम से 09:12 ए एम रवि योग पूरे दिन
पूजन सामग्री की लिस्ट
पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि।
कुंडली में दोष हैं तो करें ये उपाय
इस दिन जिसकी कुंडली में शनि-चन्द्र (विष) योग, शनि-मंगल (विस्फोटक) योग हैं वो मंत्रजप, पूजन कर शुभ फल प्राप्त कर सकते है।
भगवान शंकर के साथ करें भगवान विष्णु की पूजा
दोपहर से (प्रदोष काल एवं रात्रिकाल) में एकादशी तिथि भी प्राप्त होने से भगवान भोलेनाथ के साथ भगवान विष्णु की पूजा भी अवश्य करें। धर्मग्रंथो के अनुसार इस विशेष समय में दोनों स्थानों पर दीपक जलाएं तथा पायस (खीर) का भोग लगाकर ॐ नम: शिवाय एवं ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करने से मनोकामना पूर्ण होती है।
व्रत रखने वाली महिलाएं जरूर करें मां पार्वती की पूजा
श्रावण सोमवार का व्रत रखने वाली महिलाओं को सायंकाल में भगवान भोलेनाथ के साथ मां पार्वती का पूजन भी अवश्य करना चाहिए।
मंत्र
शिव मंत्र: ॐ नमः शिवाय ॥
महामृत्युंजय मंत्र : ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
शिव गायत्री मंत्र : ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
आरती
ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव…
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव…
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव…
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव…
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता,
जगकर्ता जगभर्ता जग संहारकर्ता॥ ॐ जय शिव…
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर में शोभित यह त्रिवेद का टीका॥ ॐ जय शिव…
शिव ओंकारा शिव ओंकारा हर ऊंकारा,
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…
