रवि अग्रहरि
TrumpTariffs : डोनाल्ड ट्रंप कुछ भी कर रहें हैं लेकिन भारत का जवाब सधा और शांत है। इससे ट्रम्प की खिसियाहट बढ़ती जा रही है। एक दम बारात में फूफा टाइप स्थिति हो गई है। भारत मजे लेने के मूड में है।
ट्रम्प ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाकर 50% टैरीफ की घोषणा करने के बाद अब नई धमकी दी है कि भारत के खिलाफ अतिरिक्त 25 प्रतिशत की घोषणा के तुरंत बाद सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
वजह वही इस फैसले के पीछे भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखना बताया है। और यहाँ तो भारत रूस के साथ युद्धाभ्यास कर रहा है, साथ ही विदेशमंत्री जयशंकर और NSA अजीत डोभाल रूस पहुँच कर रक्षा सौदे के साथ तमाम पेंडिंग डील्स निपटा रहे हैं।
पता नहीं मोदी क्या चाहते हैं। गलबहियाँ की तो वह भी प्यार से और औकात दिखाने की बारी आई तो भी उतनी ही सहजता और शांत भाव से। हालाँकि, डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक प्रेस वार्ता के दौरान संवाददाताओं से कहा, “देखते हैं क्या होता है। आपको और भी बहुत कुछ देखने को मिलेगा। आपको कई अतिरिक्त प्रतिबंध देखने को मिलेंगे।”
और यहाँ भारत भाव ही नहीं दे रहा है। ट्रम्प चचा देखते जाइए खुद ही ऊपर-नीचे, आगे-पीछे होते रहेंगे।
एक ज़माना था जब अमरीका की छींक से आधी दुनिया बुखार में पड़ जाती थी। व्हाइट हाउस से कोई फूंक भी निकले, संयुक्त राष्ट्र से लेकर संयुक्त अरब तक सब अपनी अपनी नाक ढक कर खड़े हो जाते थे। पर अब दौर बदल गया है। अब जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प हर सुबह भारत को धमकी देने उठते हैं, तो भारत उतने ही ठंडेपन से उन्हें अनदेखा करता है जैसे किसी बरात में दूल्हे का फूफा, जो खुद को सेंटर ऑफ ग्रैविटी समझता है, लेकिन लड़की वाले चाय तक नहीं पूछते।
ट्रम्प रोज़ ट्वीट करते हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, आरोप लगाते हैं, धमकी देते हैं लेकिन भारत सरकार की तरफ से कोई बड़ा मंत्री तो छोड़ो, विदेश मंत्रालय का एक एडिशनल जॉइंट सेक्रेटरी फाइल से गर्द झाड़ते हुए जवाब दे देता है।
“हमें खेद है राष्ट्रपति महोदय को गलतफहमी हुई है, लेकिन हम अपनी नीति पर कायम हैं।”
इतना सुनते ही ट्रम्प का चेहरा वैसा हो जाता है जैसा किसी पंचायत चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार का, ना कोई पहचानता है, ना कोई भाव देता है, और जब वो अपने पोस्टर खुद लगाते हुए पकड़े जाते हैं, तो खुद ही चिल्लाते हैं मुझे जनता का साथ चाहिए!
ट्रम्प की तिलमिलाहट अब वही है जो भारत में पिछले दस साल से राहुल गांधी, अखिलेश, केजरीवाल और उनकी बारात में घूम रहे हर छोटे-बड़े जोकर की रही है। दिन-रात टीवी डिबेट में उछल-उछल कर यही पूछा गया मोदी चुप क्यों हैं? मोदी जवाब क्यों नहीं देते? मोदी बहस से भागते क्यों हैं?
और मोदी शांत, सधा, रणनीति में डूबा हुआ हर हमले जवाब चुपचाप अपनी टीम से दिलवाते रहे।
आज वही अपमान ट्रम्प झेल रहे हैं। भारत उन्हें जवाब नहीं दे रहा, बल्कि रूस के साथ सैन्य अभ्यास कर रहा है, तेल की डील साइन कर रहा है, और BRICS में नई मुद्रा लाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका बौखलाया हुआ है जैसे कोई आशिक लड़की के इनबॉक्स में “Hi” के बाद 69 मैसेज भेज दे और उधर सीन तक ना आए।
ट्रम्प ने कहा, “भारत को इस व्यवहार की कीमत चुकानी होगी।”
भारत ने ट्रम्प की धमकी पर वही रिएक्शन दिया जो भारतीय बाप अपनी महाबिगड़ी औलाद के कॉलेज से सस्पेंशन लेटर पर देता है, “अच्छा? और?”
ट्रम्प के लिए भारत अब वो एक्स बन चुका है जो अपने नए रिश्ते में इतना खुश है कि पुराने वाले के ब्लॉक किए हुए नंबर पर भी मुस्कुरा देता है। व्हाइट हाउस में बैठे-बैठे ट्रम्प अब कागज़ फाड़ते हैं, दीवारों से सिर मारते हैं और प्रेस ब्रीफिंग में हकलाते हैं, “इंडिया… इंडिया को… हम सबक सिखाएँगे!”
उधर भारत लद्दाख में इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है, रूस से सुपरसोनिक मिसाइलें ले रहा है, S-400 की डिलीवरी ले चुका है और अमेरिका के हर प्रतिबंध पर गज भर की मुस्कान से जवाब दे रहा है।
भारतीय विपक्ष की दुर्दशा इस पूरे मसले में और भी शर्मनाक है। उन्हें ट्रम्प की चिंता तो है, लेकिन देश की प्रतिष्ठा की नहीं। वे बार-बार यही रट लगाए बैठे हैं मोदी बताएँ, वो क्यों चुप हैं? मोदी जवाब दें!
यही लोग एक वक्त पर मोदी को कहते थे विदेशों में जा कर देश की छवि खराब करते हैं। और अब जबकि मोदी चुप हैं, मजबूती से खड़े हैं, तब इन्हें फिर परेशानी है- “क्यों खड़े हैं?”
असल में ये सब उसी तरह की कंफ्यूज़्ड विपक्षी राजनीति है जैसी किसी गाँव की शराबी बारात में डीजे बंद होते ही दूल्हे के मौसेरे भाइयों को लगता है कोई साजिश हुई है।
आज ट्रम्प की हालत भारत के सामने वैसी ही है जैसी पाकिस्तान की IMF के सामने रोज़ कुछ नया माँगो, बदले में बकरी गिरवी रखो।
पर भारत की हालत? भारत आज वो गबरू जवान है जिसे अब चप्पल फेंक कर कोई रोक नहीं सकता। और ट्रम्प? वो अब गली का वही पुराना गुंडा हो चला है, जिसकी दहाड़ सुन कर अब सिर्फ उसका खुद का कुत्ता ही डरता है।
