मनोज कुमार
Jeffrey Sachs : विश्व के सबसे प्रभावशाली अर्थशास्त्रियों में गिने जाने वाले प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ़री सैक्स ने हाल ही में कई मीडिया संस्थानों को दिये गये साक्षात्कारों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ और समग्र नीतियों की अत्यंत कठोर और तथ्यों पर आधारित आलोचना की है।
जेफ़री सैक्स ने स्पष्ट कहा कि ट्रम्प के भारत सहित अन्य देशों पर लगाए गए 50% तक के टैरिफ अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 1, सेक्शन 8 के अनुसार गैरकानूनी हैं, क्योंकि ऐसी शक्तियाँ अकेले राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि कांग्रेस को हैं। उनका दावा है कि अमेरिका में इस पर अब कानूनी चुनौती भी शुरू हो चुकी है, जो ट्रम्प के टैरिफ शासन को असंवैधानिक घोषित कर सकती है।
सैक्स ने भारत को यह चेतावनी दी कि अमेरिका का भारत के साथ व्यापार व सुरक्षा साझेदारी का दावा मिथ्या है। उन्होंने कहा, “अमेरिका की राजनीति में भारत की कोई चिंता नहीं है…भारत को दीर्घकालिक सुरक्षा अमेरिका के साथ खड़े होकर नहीं मिलेगी। यह कोरा धोखा है।”
उन्होंने भारत को आगाह किया कि वह अमेरिकी वादों पर निर्भर न रहे; अमेरिका चीन के स्थान पर भारत को सप्लाई-चेन केंद्र कभी नहीं बनने देगा। “यह कल्पना है कि अमेरिका भारत को चीन की जगह लेगा– हकीकत में वह भारतीय निर्यातों को भी चीन की तरह रोक देगा।”
सैक्स ने ट्रम्प को खुलेआम “आर्थिक रूप से अनपढ़” और “संरक्षणवादी” करार दिया। उनका मानना है कि ट्रम्प का असली एजेंडा अमेरिका को दुनिया से अलग-थलग करना और बहुपक्षीय नियमों को तोड़ना है, जिसका परिणाम अमेरिका की अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिति के लिए विनाशकारी होगा।
सैक्स ने सुझाव दिया कि भारत को किसी भी एक महाशक्ति के लिए काम करने की जरूरत नहीं है। “भारत को अपना स्वतंत्र विदेश नीति मार्ग अपनाना चाहिए। भारत, रूस, चीन और ब्राजील इसके असली वैश्विक साझेदार हैं।”
उनका मानना है कि ट्रम्प की नीति अमेरिकी प्रभुत्व को बनाए रखने का प्रयास है, लेकिन अब समय आ गया है कि भारत और चीन मिलकर संयुक्त राष्ट्र व वैश्विक व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वात्मक बनाएं।
सैक्स ने आरोप लगाया कि अमेरिका की सैन्य-औद्योगिक लॉबी, देश-विदेश में दखल और “हम दुनिया चलाते हैं” वाला भाव देश के लिए भी और विश्व व्यवस्था के लिए भी घातक हैं। BRICS जैसे समूहों का उभार यही इंगित करता है कि अमेरिका अकेला विश्व-नेता नहीं रह गया है।
जेफ़री सैक्स का विश्लेषण न केवल ट्रम्प की नीतियों की अभूतपूर्व आलोचना है, बल्कि यह भारत सहित सभी विकासशील देशों के लिए चेतावनी भी है कि वे अमेरिकी वादों व धमकियों के फेर में न फंसें। उनका संदेश सीधा है: “स्वतंत्र रहो, बहुपक्षीय साझेदारियाँ बढ़ाओ, और एक देश को अपने भाग्य का निर्धारक न बनने दो।”
