मनोज कुमार
Agni 6 : भारत सामरिक शक्ति में नई ऐतिहासिक छलांग लगाने की तैयारी में है। 20-21 अगस्त 2025 के लिए ओड़िशा तट से 4,795 किलोमीटर तक का नोटैम (नोटिस टू एयरमेन) जारी किया गया है। इतने व्यापक क्षेत्र में NOTAM संभावित रूप से अब्दुल कलाम आइलैंड से अग्नि-VI अंतरमहाद्वीपीय हाइपरसोनिक मिसाइल के परीक्षण का संकेत देता है।
नोटैम एक आधिकारिक सूचना होती है जो संबंधित देश के विमानन प्राधिकरण द्वारा जारी की जाती है। इसका उद्देश्य युद्धाभ्यास, मिसाइल परीक्षण या अन्य किसी प्रकार की गतिविधि से उड़ान मार्ग में होने वाले अस्थायी बदलाव,खतरे, के बारे में पायलटों,एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स और विमानन से जुड़ी एजेंसियों को समय से पूर्व सूचना देना होता है।
अग्नि-6 की अनुमानित रेंज 9,000 से 16,000km तक है। यह भारत की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल होगी, जिससे यह पूरा एशिया, यूरोप और उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकती है।
इसका मतलब है कि
अमेरिका के सभी प्रमुख शहर (न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन, लॉस एंजेलिस, मियामी, शिकागो, ह्यूस्टन आदि) इस रेंज के भीतर हैं।
सिर्फ रेंज की बात होती तो भी शायद इतनी दहशत ना होती… परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम यह मिसाइल सिर्फ एक लॉन्च से एक साथ 10-12 परमाणु वारहेड्स विभिन्न लक्ष्यों तक पहुंचा सकती है,अर्थात रास्ते में पड़ने वाले दुश्मन देशों को भी टाईमली डिलिवरी ना मिलने की शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा।
ऐसा विश्वास के साथ इसलिए कह पा रहा हूं क्यूंकि इसकी अधिकतम स्पीड Mach 24 (लगभग 29,400km/h) तक हो सकती है,जिससे यह मात्र 25 मिनट में भारत से वॉशिंग्टन डीसी पहुँच कर ट्रम्प अंकल को बिग ब्यूटीफुल हैलो बोल सकती है।
मैन्युवरेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक के चलते दुश्मन के एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम भी इसे रोक नहीं पाएंगे।
MIRV तकनीक का मतलब है कि— जब अग्नि-6 मिसाइल लक्ष्य की ओर बढ़ती है, तो उसका आखिरी हिस्सा (जिसे री-एंट्री व्हीकल कहते हैं) बड़ी तेज़ी और चालाकी से दिशा बदल सकता है।
यानी, अगर दुश्मन ने मिसाइल को गिराने के लिए कोई सुरक्षा सिस्टम लगा रखा है, तो ये मिसाइल हवाई रास्ते में अपना रास्ता बदलकर उस सुरक्षा को चकमा देती है।
यह इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS), सैटेलाइट गाइडेंस (GPS/NaVIC) एवं रडार-बेस्ड गाइडेंस से भी लैस के कारण सटीक निशाना लगाती है।
यह नेविगेशन तीन तरीके से काम करता है—
●अंदर लगे सेंसर से मिसाइल अपना रास्ता खुद पहचानती है, जिससे सैटेलाइट या जीपीएस सिग्नल ना होने पर भी यह लक्ष्य पर पिन पॉइन्ट निशाना साध सकती है।
●जैसे मोबाइल में जीपीएस लोकेशन बताता है, वैसे ही सैटेलाइट से भी मिसाइल को सही दिशा में जाने की जानकारी मिलेगी।
● उक्त दोनों के किसी वज़ह से काम ना कर पाने की वज़ह से यह मिसाइल जमीन पर या लक्ष्य के पास लगे रडार के लाइव अपडेट लेकर एकदम सटीक निशाना साधती है।
स्टील्थ फीचर्स से युक्त अग्नि-6 को बिना दुश्मन के रेडार के पकड़ में आये जमीन, समुद्र (युद्धपोतों और पनडुब्बी से) एवं भविष्य में हवाई प्लेटफार्म से भी लॉन्च किया जा सकेगा।
अग्नि-6 मिसाइल भारत की अब तक की सबसे आधुनिक, बहु-रेंज, बहु-वारहेड्स और हाइपरसोनिक क्षमता वाली मिसाइल होगी जो भारत की सामरिक शक्ति का नया सिरमौर बनकर,देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाएगी।”
