Teachers’ Day : कवियों ने गुरुओं की महिमा का किया बखान

Bindash Bol

Teachers’ Day : झारखंड साहित्य संस्कृति मंच के द्वारा शिक्षक दिवस पर आनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कवियों ने गुरुओं की महिमा का वर्णन किया। शुरुआत सुनीता कुमारी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। डॉ उर्मिला सिन्हा ने आगत कवि-कवयित्रियों का स्वागत किया। गोष्ठी का शानदार संचालन मंच संयोजिका ममता मनीष सिन्हा ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मंच के उपाध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने ऋग्वेद की ऋचाओं, छांदोग्य उपनिषद के श्लोकों, कबीर के दोहों और तुलसी की चौपाईओं के माध्यम से गुरु शब्द की महिमा का वर्णन किया। साथ ही अपने अध्यापकीय जीवन के संस्मरणों को भी साझा किया। मुख्य वक्ता डॉ जंग बहादुर पाण्डेय ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि गुरु दो अक्षरों का मेल है। ‘गु’ का अर्थ है अंधकार और ‘रु’ का अर्थ है अंधकार निरोधक। गुरु वह है जो अपने शिष्य में अंधकार का प्रवेश न करने दे।
मंच सचिव विनोद सिंह गहरवार ने भी मनुष्य जीवन में गुरु महिमा का महत्वत्ता पर प्रकाश डाला।

काव्य गोष्ठी में कवियों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरु-महिमा पर आधारित गीत दोहे आदि छंदबद्ध व छंदमुक्त कविताएँ सुनाई। काव्य पाठ करनेवालों में निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव, बिनोद सिंह गहरवार, हिमकर श्याम, ममता मनीष सिन्हा, ऋतुराज वर्षा, उर्मिला सिन्हा, रेणु बाला धार, अर्पणा सिंह, सुनीता श्रीवास्तव जागृति, राज रामगढ़ी, रश्मि सिन्हा, प्रतिभा सिंह, पूनम वर्मा, सुनीता कुमारी शामिल थे। कवियों ने अपनी रचनाओं में गुरु वंदना और शिक्षकों की महिमा का बखान किया। कृष्णा विश्वकर्मा के धन्यवाद ज्ञापन से गोष्ठी का समापन हुआ।

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