याद किये गए हिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष आचार्य रामचंद्र शुक्ल और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद
Kavya Goshthi: झारखण्ड हिन्दी साहित्य संस्कृति मंच द्वारा मंच के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव की अध्यक्षता एवं अध्यक्ष कामेश्वर श्रीवास्तव ‘ निरंकुश’ के मार्ग-निर्देशन में हिन्दी साहित्य के समादृत आलोचक एवं अप्रतिम निबन्धकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की जयंती और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि एक साथ मनायी गई। इस अवसर पर मंच के सदस्यों द्वारा दोनों साहित्यिक विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मंच की ओर से आयोजित ऑनलाइन श्रद्धांजलि सभा एवं काव्य गोष्ठी का संचालन कवयित्री एवं कहानीकार अनिता रश्मि ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत पूनम वर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। काव्यगोष्ठी गजलकार हिमकर श्याम की गजल ‘कातिब न जाने कैसा मुकद्दर बना दिया’, डॉ सुरिन्दर कौर’ नीलम का दोहा, रामचन्द्र आचार्य के पड़े जगत में पाँव’, डॉ०
उर्मिला सिन्हा की ‘रामचंद्र शुक्ल हिन्दी साहित्य गद्यकार’, अनिता रश्मि की कविता, ‘अकेला गाछ एकाकीपन से लड़ता’, ‘ सुजाता प्रिय समृद्धि की कविता ‘वर्तमान में जी लो भाई, ‘ अर्पणा सिंह की कविता ‘वो गांव आज भी मेरा है’, सुनीता अग्रवाल की ‘देखकर जहाँ के खेल निराले’, गीता चौबे गूँज के गीत ‘हृदय में प्रेम जब होता अहं की भीत गिर जाती’, सुनीता श्रीवास्तव ‘जागृति’ की कविता ‘जो काम किया वो काम नहीं आएगा’, असीत कुमार की कविता ‘अंतिम इच्छा बस यही रही’, ‘पूनम वर्मा की कविता ‘भारत वर्ष की संस्कृति यही है, ‘ निराला पाठक की गजल ‘ सब झूठे ही ख्वाबों का कफ़न ओढ़े बैठे हैं, नेहाल हुसैन सरैयावी की गजल ‘बनके ख़ुशबू फजाओं में बिखर जाऊँगा’, बिनोद सिंह गहरवार का सवैया ‘ दांव प दांव चले हर दांव’ निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘जिसकी लेखनी से ज्योतिंत है हिन्दी साहित्य सदन ललाम’ से आप्लावित रही।
मंच के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोद्धन में आचार्य रामचंद्र शुक्ल और प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। आचार्य शुक्ल को आलोचना का शिखर पुरुष और अप्रतिम निबन्धकार, कुशल कोशकार और संपादक बताया तो मुंशी प्रेमचन्द को महान कहानीकार और उपन्यासकार तथा ‘कलम का सिपाही’ बतलाया। मंच के संरक्षक श्री विनय सरावगी द्वारा कार्यक्रम में भाग लेने वाले सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं। मौके पर कामेश्वर कुमार सिंह ‘कामेश’, विजय रंजन एवं डॉ अंजेश कुमार भी मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन कृष्णा विश्वकर्मा बादल के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
