रेहान
Abhimanyu : क्या लगता है आपको? संसार अभिमन्यु का सम्मान क्यों करता है? क्यूंकि उन्हें मा के पेट से ही पिता से चक्रव्यूह भेदने का ज्ञान मिल गया था? बिल्कुल नहीं, आपको अपने कुल से क्या कुछ मिला है,उसके बल पर आपको सहानुभूति तो मिल सकती है, सपोर्ट भी मिल सकता है, पर सम्मान कभी नहीं। सम्मान मिलता है, साहस से, संघर्ष से। अभिमन्यु को ये बात मालूम थी कि जिस चक्रव्यूह में वो घुसने जा रहे है,उससे निकल पाना नामुमकिन है।अभिमन्यु को पता था कि जिस चक्रव्यूह में वो घुसने जा रहे है,वहा उनका सामना ऐसे योद्धाओं से होगा,जिनकी शक्ति सामर्थ्य,और की वो बराबरी कभी नहीं कर पाएंगे।अभिमन्यु जानते थे कि दुर्योधन के योद्धाओं को युद्ध के नियम नहीं बल्कि सिर्फ नतीजे से मतलब है,और वो उस नतीजे के लिए न तो नैतिकता देखेंगे न मानवता। फिर भी अभिमन्यु के पैर नहीं डगमगाए चक्रव्यूह में घुसते हुए।यही वो पल था जब अभिमन्यु ने महाभारत के दूसरे योद्धाओं से खुद को बहुत ऊपर उठा दिया था, यही वो पल था जब अभिमन्यु ने साहस और संघर्ष के दम पर संसार का सम्मान अर्जित कर लिया,इस पल में ही इतिहास में अभिमन्यु की शौर्य गाथा जीत और हार से भी ऊपर उठ गई। यही वो पल था जब वीर अभिमन्यु अपने पिता के शौर्य और कीर्ति की छाया से निकल कर,अर्जुन पुत्र अभिमन्यु से,वीर अभिमन्यु कहलाने लगे,और संसार की आंखों में,रथ का पहिया उठाकर लड़ते हुए अभिमन्यु का चित्र सृष्टि के विनाशकाल तक के लिए,चित्रित हो गया।
