Agni 6 : भारत अपनी सबसे घातक और बहुप्रतीक्षित इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-6’ के संभावित परीक्षण की तैयारी कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 16,000 किमी तक बताई जा रही है। मतलब, एशिया से अमेरिका तक के किसी भी कोने को निशाना बनाना अब भारत के लिए नामुमकिन नहीं रहेगा।। इसी वजह से कई वैश्विक शक्तियों की नींद उड़ गई है।
भारत के परमाणु शक्ति से लैस अग्नि-6 मिसाइल के संभावित परीक्षण ने पूरे अमेरिकी खेमे में हड़कंप मचा दिया है! विश्व शक्ति अमेरिका ने आनन-फानन में अपना अत्याधुनिक जासूसी व युद्धपोत USS Santa Barbara श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह में तैनात कर दिया है। यह उन्नत निगरानी और ट्रैकिंग प्रणाली से लैस है, जिससे यह भारतीय क्षेत्र में होने वाली मिसाइल गतिविधियों पर नजर रख सकता है।
चीन ने भी अपने निगरानी जहाजों की गतिविधि बढ़ा दी है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और ट्रैकिंग की सक्रियता बढ़ गई है।
अब सवाल यह उठता है कि श्रीलंका तो भारत का पारंपरिक मित्र है, फिर उसने अमेरिकी युद्धपोत को इजाजत क्यों दी?
श्रीलंका की विदेश नीति “संतुलन” और “राष्ट्रीय हित” के सिद्धांत पर आधारित है—वह अपने सामरिक भूगोल का लाभ उठाकर कई देशों से सहयोग लेता है। श्रीलंका हिंद महासागर के रणनीतिक केंद्र में स्थित है, जिससे भारत, चीन, अमेरिका,रूस,ब्रिटेन आदि सभी की इसमें रुचि है।
श्रीलंका हर प्रमुख देश को अपने बंदरगाहों के उपयोग की अनुमति देता है—इसी कारण से अमेरिका,चीन रूस ब्रिटेन सभी के शोध/निगरानी/नौसैनिक पोत आते जाते रहते हैं।
श्रीलंका की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है; विदेशी मुद्रा, निवेश और कूटनीतिक संतुलन के लिए वह अमेरिका, चीन, भारत—सबकी मदद चाहता है।
श्रीलंका का यह फैसला जरुरी तौर पर भारत के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसकी “बैलेंसिंग” विदेश नीति और समुद्री नीति का परिणाम है। वह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अपने हितों के हिसाब से यह अनुमति देता है, जिससे कूटनीतिक दबाव भी संतुलित रहे।
