Agni 5 : रहस्य, शक्ति और रिकॉर्ड: क्या ‘अग्नि 5’ के पीछे छुपी थी भारत की अग्नि 6 सुपरमिसाइल?

Bindash Bol

मनोज कुमार

Agni 5 : बीते अगस्त 2025 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से जिस मिसाइल का परीक्षण हुआ, उसे भारत सरकार ने ‘अग्नि 5’ इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के तौर पर घोषित किया। सभी तकनीकी और ऑपरेशनल मानकों की पुष्टि भी आधिकारिक रूप से ‘अग्नि 5’ के नाम से ही की गई। किंतु रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों का बड़ा वर्ग मानता है कि यह परीक्षण वास्तव में भारत की अगली पीढ़ी की ‘अग्नि 6’ इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का था, जिसे अंतरराष्ट्रीय दबावों के कारण, फिलहाल “classified project” के रूप में ही माना जा रहा है, यानी इसकी तकनीकी जानकारी, परीक्षण विवरण और तैनाती पूरी तरह से गोपनीय रखी गई है।

यह मिसाइल ठोस ईंधन आधारित तीन-चरणीय रॉकेट प्रणाली पर काम करती है। दागने के बाद पहला चरण मिसाइल को करीब 36किमी की ऊंचाई तक ले जाता है, दूसरा चरण 110किमी, और तीसरा 220किमी ऊपर पहुंचाता है। उड़ान के शिखर पर यह लगभग 600किमी तक ऊपर जाती है, अर्थात पृथ्वी के वातावरण (एटमॉस्फियर) से बाहर निकल कर अंतरिक्ष की सीमा तक पहुंचती है। इसके बाद ‘री-एंट्री’ फेज होता है—जहां मिसाइल 80किमी की ऊंचाई पर पुनः वायुमंडल में प्रवेश करती है और लक्ष्य की तरफ गिरती है। मिसाइल की उड़ान ‘पैराबोलिक ट्राजेक्टरी’ पर होती है—यानी पहले ऊपर जाती है, फिर दूरस्थ लक्ष्य पर उतरती है।

मिसाइल का मार्गदर्शन अत्याधुनिक कंप्यूटर, रिंग लेज़र गाइरोस्कोप-बेस्ड इनर्शियल नेविगेशन, GPS/NavIC और thrust vector control द्वारा होता है।
जिसका अभिप्राय है — मिसाइल के इंजन से निकलने वाले जोर (thrust) की दिशा को नियंत्रित करना। इसका उद्देश्य उड़ान के दौरान मिसाइल की दिशा, मार्ग और कोण (attitude) बदलना या नियंत्रित करना होता है।

इसमें MIRV तकनीक का इस्तेमाल हुआ है: यानी एक ही मिसाइल से एक साथ दस अलग-अलग लक्ष्य साधे जा सकते हैं।

इसकी टर्मिनल गति लगभग Mach 24 (ध्वनि से 24 गुना ज्यादा) है—यह किसी भी इंटरसेप्ट या डिफेंस सिस्टम को भ्रमित करने के लिए काफी है। इसके रोड-मोबाइल, कैनिस्टराइज़्ड डिज़ाइन से इसे कहीं भी और कभी भी लॉन्च किया जा सकता है, जिससे दुश्मन उसकी लोकेशन को ट्रैक नहीं कर सकता।

मिसाइल में रिंग लेज़र गाइरोस्कोप-बेस्ड इनर्शियल नेविगेशन, GPS/NavIC, एवं Thrust Vector Control जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी है, जिससे यह पूरे उड़ान में वास्तविक समय में मार्ग बदलने, ऊंचाई एडजस्ट करने और छलावा (डिकॉय) फेंकने में सक्षम है। इसकी डेढ़ टन वारहेड क्षमता भारत को “सुपर-पावर” के समीप पहुंचाती है होती है—दिल्ली से न्यूयॉर्क 12,000किमी की दूरी को यह 20-22 मिनट में तय कर सकती है, जबकि दिल्ली से इस्लामाबाद के लिए दो मिनट ही पर्याप्त हैं। इतना अतिवेग और रेंज विश्व की गिनी-चुनी मिसाइलों में ही है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह परीक्षण अग्नि 6 का ही हुआ तो इसकी वास्तविक रेंज 12,000–16,000किमी तक है। इसमें मल्टिपल वारहेड्स (MIRV), सबमरीन लॉन्च, स्टील्थ तकनीक, और इलेक्टॉनिक काउंटरमेजर्स जैसी विशेषताएं शामिल हो सकती हैं। इसकी क्षमता लगभग पूरी पृथ्वी के किसी भी हिस्से को टारगेट करने की है—इंटरकॉन्टिनेंटल मापदंडों पर। ऐसे परीक्षण को अंतरराष्ट्रीय दबावों के कारण गोपनीय रखा गया है और केवल ‘अग्नि 5’ के नाम से सार्वजनिक किया गया।

भारत की असली क्षमता आज भी दुनिया के लिए रहस्य बनी हुई है, जैसा कि हालिया ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में भारत ने अपनी अद्वितीय सामरिक क्षमताओं का ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई—अमरीका जैसे महाशक्तियां तो इस ऑपरेशन की गूंज को भूल नहीं पा रही हैं। भारत ने जिस सूझ-बूझ, गति और तकनीक से शक्ति का परिचय दिया, उसने वैश्विक मंच पर कई देशों की रणनीतिक सोच को झकझोर कर रख दिया है।

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