- 3 साल के लिए सस्पेंड हो चुका था कैप्टन सुमित
- शराब टेस्ट में फेल पायलट और VIP उड़ान का सवाल
- सस्पेंड पायलट, फिर भी VIP फ्लाइट?
- सिस्टम की चूक या बड़ी लापरवाही?
- हादसा या अनदेखी का नतीजा?
- सवाल सिर्फ पायलट पर नहीं, सिस्टम पर है
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में हुए दर्दनाक विमान हादसे के बाद देशभर में शोक की लहर है। इस हादसे ने न सिर्फ एक बड़े राजनीतिक चेहरे की जान ली, बल्कि भारत की एविएशन सेफ्टी व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर पायलट कैप्टन सुमित कपूर का पुराना रिकॉर्ड सामने आने के बाद बहस और तेज हो गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैप्टन सुमित कपूर दो बार उड़ान से पहले ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में शराब पॉजिटिव पाए गए थे। पहली घटना 13 मार्च 2010 की है, जब वह दिल्ली एयरपोर्ट पर दिल्ली-बेंगलुरु फ्लाइट (S2-231) उड़ाने वाले थे। दूसरी घटना 7 अप्रैल 2017 को सामने आई, जब दिल्ली-गुवाहाटी उड़ान (S2-4721) के दौरान उनका अल्कोहल टेस्ट पॉजिटिव निकला। दोनों ही मामलों में यह सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर उल्लंघन माना गया।
इन घटनाओं के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 24 अप्रैल 2017 को कैप्टन सुमित कपूर को तीन साल के लिए सस्पेंड कर दिया था। इसके साथ ही उन्हें तीन महीने तक बिना वेतन उड़ान ड्यूटी से भी हटा दिया गया। यह जानकारी खुद सरकार ने राज्यसभा में तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री पीयूष गोयल के लिखित जवाब में दी थी। नियमों के मुताबिक, यह सजा बेहद कड़ी मानी जाती है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
हालांकि, सस्पेंशन पीरियड पूरा होने के बाद सुमित कपूर ने प्राइवेट ऑपरेटर ‘VSR Ventures’ के साथ काम करना शुरू कर दिया। उनके पास 15,000 से ज्यादा उड़ान घंटों का अनुभव था, जिसे आधार बनाकर उन्हें VIP और चार्टर्ड फ्लाइट्स की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी अनुभव के चलते उन्हें अजित पवार की Learjet 45 (VT-SSK) विमान की कमान दी गई, जो हादसे का शिकार हुआ।
हादसे के दिन, यानी 28 जनवरी 2026 को यह विमान सुबह 8:10 बजे मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुआ था। विमान में अजित पवार समेत कुल छह लोग सवार थे। बारामती एयरस्ट्रिप पर लैंडिंग के दौरान पहली कोशिश में पायलट को रनवे स्पष्ट दिखाई नहीं दिया, जिसके बाद ATC से संपर्क कर मिस्ड अप्रोच लिया गया। दूसरी कोशिश के दौरान सुबह 8:43 बजे विमान क्रैश हो गया। बताया जा रहा है कि यह पूरा हादसा महज 6 सेकंड के भीतर हुआ।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने शुरुआती बयान में लो विजिबिलिटी और कोहरे को मुख्य कारण बताया है, लेकिन फिलहाल जांच जारी है। DGCA और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) दोनों ही इस मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं। इसमें पायलट का पिछला रिकॉर्ड, मौसम की स्थिति, तकनीकी खराबी और प्राइवेट ऑपरेटर की भूमिका—सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन साल तक सस्पेंड रह चुका पायलट VIP फ्लाइट कैसे उड़ा रहा था। क्या प्राइवेट ऑपरेटरों पर DGCA की निगरानी पर्याप्त है? या फिर अनुभव के नाम पर सेफ्टी से समझौता किया जा रहा है? अजित पवार की मौत ने यह साफ कर दिया है कि एविएशन में छोटी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। जांच के नतीजे न सिर्फ इस हादसे की सच्चाई सामने लाएंगे, बल्कि भविष्य की उड़ानों की सुरक्षा तय करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
