Asha Bhosle : दोनों बहनों के नाम के साथ “राइवलरी” का टैग दशकों तक चिपका रहा। मीडिया और गॉसिप कॉलम्स ने इसे बार-बार उछाला, लेकिन आशा भोंसले और लता मंगेशकर ने हमेशा साफ कहा – “खून का रिश्ता सबसे ऊपर है।” अफवाहें तो लोगों ने फैलाईं, लेकिन दोनों बहनों ने कभी एक-दूसरे के खिलाफ कुछ नहीं बोला।
शुरुआती डर और अपनी पहचान की तलाश
आशा जी ने खुद कई इंटरव्यू में कबूला कि शुरुआती दिनों में उन्हें डर लगता था। उनकी आवाज़ शुरू में लता दीदी जैसी ही लगती थी। उन्होंने कहा था..
“दिदी के होते मुझे काम नहीं मिलेगा।”
इसलिए उन्होंने अपनी स्टाइल बदलने की कोशिश की – कैबरे, पॉप, बोल्ड और एक्सपेरिमेंटल गाने गाए। लता दीदी soulful, classical और मीठे गानों की रानी रहीं, तो आशा जी ने अलग रास्ता चुना। यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा थी, जो दोनों को बेहतर बनाने वाली थी।
आशा ने कहा: “हमारे बीच कॉम्पिटिशन जरूर था, लेकिन वो स्वस्थ था। इससे हमारे गाने और बेहतर होते थे।”
“राइवलरी” की अफवाहें और सच्चाई
लोग कहते थे कि लता दीदी की वजह से आशा को कम काम मिलता था। लेकिन दोनों बहनों ने इसे सिरे से खारिज किया।
आशा जी ने कहा..
“People did carry tales and try to create trouble, but blood is thicker than water. कभी फंक्शन में लोग मुझे इग्नोर करके सिर्फ दिदी से बात करते, तो बाद में हम दोनों हंसते थे।”
लता दीदी ने भी कहा…
“There never was any professional rivalry between us. Asha evolved a completely different style. What she could do, I couldn’t do.”
उन्होंने आशा को “बहुत बड़ी गायिका” बताया और कहा कि वो उनकी सबसे बड़ी प्राइड हैं।
रोचक फैक्ट: डुएट्स की कहानी
लोग सोचते थे कि दोनों ने कभी डुएट नहीं गाया, लेकिन यह गलत है। दोनों ने लगभग 70-80 डुएट्स गाए हैं।
कुछ यादगार डुएट्स:
“मैं चली मैं चली” (पड़ोसन, 1968)
“मैं भवन के घर आए गोरी” (चोरी चोरी)
“छप तिलक सब” (मैं तुलसी तेरे आंगन की)
हालाँकि बाद के सालों में डुएट्स कम हो गए, क्योंकि दोनों की अपनी-अलग जगह बन चुकी थी।
आरडी बर्मन की वजह से तनाव?
आरडी बर्मन (पंचम) से आशा की शादी (1980) के समय परिवार में कुछ नाराजगी जरूर थी। लता दीदी ने इस रिश्ते पर खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि उन्हें यह पसंद नहीं था। आशा ने बताया कि शादी के बाद कुछ समय दोनों बहनों के बीच बातचीत कम हो गई थी।
फिर भी, दोनों ने कभी इसे मुद्दा नहीं बनाया। पंचम दोनों के लिए अलग-अलग तरह के गाने देते थे – लता दीदी को मीठे-रोमांटिक, आशा जी को एक्सपेरिमेंटल।
अंत में प्यार ही जीता
लता दीदी ने आशा को “मेरी पसंदीदा सिंगर” और “मेरी सबसे बड़ी प्राइड” कहा। आशा ने लता दीदी को गुरु और माँ जैसी बताया।
दोनों पड़ोस में रहती थीं, बीच में कनेक्टिंग दरवाज़ा था। लता जी के निधन के बाद आशा जी ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया।
बहनें थीं, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा थी, कभी-कभी तनाव भी आया… लेकिन प्यार और खून का रिश्ता हमेशा जीता। मीडिया ने राइवलरी बेची, लेकिन दोनों ने साबित किया कि सच्ची बहनें एक-दूसरे का सम्मान करती हैं।
यह रिश्ता सिर्फ संगीत जगत की नहीं, बल्कि हर बहन-बहन के रिश्ते की मिसाल है – जहाँ अंतर हो, लेकिन प्यार कभी कम नहीं होता।