Atmanirbhar Bharat : मोदी सरकार का बड़ा रक्षा मास्टरस्ट्रोक.. भारतीय वायुसेना को मिलेगा स्वदेशी 1000 किलो ‘सुपर बंकर बस्टर’ बम

Siddarth Saurabh

भारत की हवाई ताकत में ऐतिहासिक छलांग

Atmanirbhar Bharat : ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति का नया आधार बनता जा रहा है। केंद्र सरकार ने भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1000 किलोग्राम वर्ग के स्वदेशी एरियल “सुपर बंकर बस्टर” बम विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए औपचारिक रूप से Expression of Interest (EOI) जारी कर दिया है।
यह अत्याधुनिक बम अमेरिका के चर्चित Mk-84 बंकर बस्टर के भारतीय समकक्ष के रूप में विकसित किया जाएगा और दुश्मन के सबसे सुरक्षित सैन्य ढांचों को भी ध्वस्त करने की क्षमता रखेगा।

क्या होगा स्वदेशी ‘सुपर बंकर बस्टर’ की ताकत?

भारी वजन, जबरदस्त विनाश क्षमता

करीब 1000 किलोग्राम वजन वाला यह बम उच्च क्षमता वाले हाई-एक्सप्लोसिव चार्ज से लैस होगा। विस्फोट के दौरान उत्पन्न अत्यधिक दबाव तरंगें कंक्रीट से बने भूमिगत बंकर, एयरबेस शेल्टर और कमांड सेंटर तक को भेदने में सक्षम होंगी।

मल्टी-प्लेटफॉर्म हथियार

इस बम को भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है, ताकि इसे आसानी से

* सुखोई-30 MKI

* राफेल

* मिराज सीरीज

जैसे फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स से तैनात किया जा सके।

रणनीतिक गेम-चेंजर

युद्ध या सीमित सैन्य कार्रवाई की स्थिति में यह हथियार दुश्मन के एयरबेस, अंडरग्राउंड बंकर, हथियार डिपो और कमांड नेटवर्क को शुरुआती चरण में ही निष्क्रिय करने की क्षमता देगा। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इससे भारत की “डीप स्ट्राइक कैपेबिलिटी” कई गुना मजबूत होगी।

विदेशी निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर

अब तक इस श्रेणी के भारी बंकर बस्टर हथियारों के लिए भारत को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता था। स्वदेशी परियोजना सफल होने पर…

* आयात पर होने वाला भारी खर्च बचेगा

* आपातकाल में सप्लाई रुकने का खतरा खत्म होगा

* घरेलू रक्षा उद्योग और निजी सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा

यह परियोजना Make in India और रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

दो साल में वायुसेना के बेड़े में शामिल होने का लक्ष्य

सूत्रों के मुताबिक, EOI जारी होने के बाद विकास, परीक्षण और उत्पादन प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ेगी। अनुमान है कि अगले दो वर्षों के भीतर यह स्वदेशी सुपर बंकर बस्टर भारतीय वायुसेना को सौंप दिया जाएगा।

क्षेत्रीय संतुलन पर बड़ा असर

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक नया बम नहीं, बल्कि भारत की सैन्य सोच में बदलाव का संकेत है—जहां देश अब रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि उन्नत हथियार तकनीक का निर्माता बनने की ओर बढ़ रहा है। संदेश साफ है कि अब भारतीय आसमान में सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि “मेड इन इंडिया” की रणनीतिक पहचान भी गूंजेगी।

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