Atmanirbhar Bharat :भारत में थोरियम युग… दूसरा चरण पूरा, तीसरे चरण में प्रवेश, क्या ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा भारत?

Madhukar Srivastava

Atmanirbhar Bharat : 6 अप्रैल 2026 को भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने रात 8:25 बजे ‘क्रिटिकैलिटी’ (सक्रिय श्रृंखला प्रतिक्रिया) हासिल कर ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “परमाणु कार्यक्रम में निर्णायक कदम” बताया। अब भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित कर रहा है। यह उपलब्धि भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण को मजबूत करती है और थोरियम-आधारित स्वच्छ ऊर्जा के युग की शुरुआत करती है।

भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम: डॉ. होमी भाभा का दूरदर्शी विजन

डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने 1950 के दशक में भारत के परमाणु कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की। भारत के पास यूरेनियम कम है, लेकिन थोरियम के विशाल भंडार (दुनिया में सबसे बड़े) हैं। इसी को ध्यान में रखकर तीन-चरणीय कार्यक्रम बनाया गया, जो सीमित संसाधनों से अधिकतम ऊर्जा निकालने और अंततः थोरियम पर आधारित आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था बनाने का रोडमैप है….

1. पहला चरण (PHWR – प्रेसुराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर)

प्राकृतिक यूरेनियम (मुख्यतः U-238) का उपयोग। बिजली उत्पादन के साथ प्लूटोनियम-239 (Pu-239) उप-उत्पाद के रूप में तैयार होता है। भारत में 20 से अधिक PHWR चल रहे हैं।

2. दूसरा चरण (FBR – फास्ट ब्रीडर रिएक्टर)

PFBR इसी का हिस्सा है। यह Pu-239 और U-238 से बने मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करता है। फास्ट न्यूट्रॉन (बिना मॉडरेटर के) से U-238 को Pu-239 में बदला जाता है। रिएक्टर जितना ईंधन खाता है, उससे ज्यादा पैदा करता है – यही ‘ब्रीडर’ का मतलब है। साथ ही, थोरियम-232 ब्लैंकेट का उपयोग कर U-233 तैयार किया जा सकता है, जो तीसरे चरण का ईंधन बनेगा।

3. तीसरा चरण (थोरियम-आधारित रिएक्टर)

U-233 और थोरियम-232 पर आधारित एडवांस्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (AHWR)। भारत के विशाल थोरियम भंडार (लगभग 11.93 मिलियन टन) को पूरी तरह उपयोग में लाकर सैकड़ों वर्षों तक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
PFBR इसी दूसरे चरण का प्रोटोटाइप है। 500 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला यह स्वदेशी रिएक्टर भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा बनाया गया है और इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) ने इसका डिजाइन तैयार किया है।

PFBR कैसे काम करता है?

* ईंधन: प्लूटोनियम-239 आधारित MOX ईंधन (पहले चरण से प्राप्त)।

* कोर: फास्ट न्यूट्रॉन से विखंडन होता है, बिजली पैदा होती है।

* ब्लैंकेट: U-238 की परत। न्यूट्रॉन अवशोषण से Pu-239 बनता है (ब्रीडिंग)।

* कूलेंट: लिक्विड सोडियम (उच्च तापमान पर कुशल गर्मी स्थानांतरण)।

* विशेषता: रिएक्टर जितना ईंधन जलाता है, उससे अधिक ईंधन पैदा करता है। थोरियम ब्लैंकेट का विकल्प भी उपलब्ध है, जो U-233 तैयार करेगा।

यह तकनीक भारत को यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में सक्षम बनाती है। पूर्ण वाणिज्यिक संचालन 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

* ईंधन सुरक्षा: भारत अब सीमित यूरेनियम से अधिक ऊर्जा निकाल सकेगा। थोरियम युग में प्रवेश के साथ आयात की जरूरत लगभग खत्म हो जाएगी।

* स्वच्छ ऊर्जा: कार्बन-मुक्त बिजली। 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में मदद।

* आर्थिक लाभ: स्वदेशी तकनीक से लागत कम, रोजगार बढ़ेगा और वैश्विक परमाणु निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

* रणनीतिक महत्व: रूस के बाद दूसरा देश होने से भारत परमाणु प्रौद्योगिकी में विश्व नेता बन गया है।

यह उपलब्धि सिर्फ एक रिएक्टर की सफलता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) का प्रतीक है। वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और BHAVINI टीम की दशकों की मेहनत रंग लाई है।

PFBR की खासियत यह है कि यह जितना परमाणु ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक नया ईंधन तैयार करने की क्षमता रखता है। इससे भविष्य में भारत अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग कर सकेगा। भारत के पास लगभग 2.25 लाख टन थोरियम मौजूद है, जिसे ऊर्जा उत्पादन के लिए दुनिया की सबसे बड़ी संभावनाओं में माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, थोरियम आधारित तकनीक विकसित होने के बाद भारत अगले 300 से 400 वर्षों तक स्थिर और सस्ती बिजली उत्पादन की क्षमता हासिल कर सकता है।
जहां कई देश यूरेनियम आयात पर निर्भर हैं, वहीं भारत ने स्वदेशी तकनीक विकसित कर ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। PFBR की सफलता भारत को वैश्विक परमाणु ऊर्जा मानचित्र पर अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करती है और भविष्य में स्वच्छ, टिकाऊ तथा आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की मजबूत नींव रखती है।

PFBR की क्रिटिकैलिटी के साथ भारत ने थोरियम युग की नींव रख दी है। दूसरे चरण का पूरा होना तीसरे चरण की राह खोल रहा है। आने वाले दशकों में थोरियम-आधारित रिएक्टरों से देश ऊर्जा के क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भर बन जाएगा। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा, बल्कि विकसित भारत (Viksit Bharat) के सपने को साकार करने वाला ऐतिहासिक मोड़ है। भारत का परमाणु कार्यक्रम अब सिर्फ बिजली पैदा नहीं कर रहा – वह भविष्य की ऊर्जा क्रांति लिख रहा है।

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