Bhrashtachar : मैं बिकाऊ हूँ

Bindash Bol

डॉ प्रशान्त करण

Bhrashtachar :    रिटायरमेंट के बाद रवि बाबू को पैसे की तंगी हो गयी थी।नौकरी के बकाए पैसे के लिए उन्हें गैर-सरकारी से सरकारी अफसरों,वकीलों,डॉक्टरों,नेताओं आदि से पाला पड़ा।लेकिन अपने बुद्धि-कौशल से वे बकाया वसूल करने में सफल रहे।बुद्धि-कौशल भी उन्हीं अफसरों,वकीलों,डॉक्टरों,नेताओं  आदि से सीखा था।अब वे सार्वजनिक रूप से ऐलान करते फिरते हैं कि मैं बिकाऊ हूँ।रवि बाबू का साफ कहना है कि बिकने में कोई हिल-हुज्जत नहीं करता,कोई मोल-तोल नहीं करता,कोई खीच-खीच नहीं,एकदम से झटके भर में ग्राहक देखकर बिक जाता हूँ।बिकने का आनन्द ही कुछ और है।कभी एक समय था कि करोड़ों रुपये में भी नहीं बिका।नतीजा यह हुआ कि बड़ी कठिनाई से परिवार चलता।पैसे के लाले पड़े थे,खर्च मुँह बाए खड़े रहते और हम मजबूर।पर जब से बिकने लगा हूँ, बड़े आराम से ज़िंदगी चल रही है।पैसे खर्च ही नहीं होते।कभी-कभार खर्च करने की नौबत आती भी है तो मुझे खरीदने वाला बिना मुझसे पूछे या बताए वह खर्च कर डालता है।अब ज़िंदगी मजे से कट रही है।लगता है कि खालिस सरकारी महकमे में बड़े पोस्ट पर लगा हूँ या राजनीति में ऊंचे मुकाम पर पँहुच गया हूँ।इसलिए दिन-दहाड़े,सरेआम यह कहता फिरता हूँ कि मैं बिकाऊ हूँ।जो चाहे मुझे खरीद सकता हूँ।अपना तो बिकना और बिकते रहना ही एकमात्र  उसूल है।हाँ-जैसा काम,वैसा दाम।पर दाम खुद नहीं बोलता।यह खरीदने वाले के विवेक पर निर्भर करता है।कीमत कम होती है तो मैं अपने से काम में कटौती कर देता हूँ और आत्मविश्वास से झूठ बोलकर बहाने बना लेता हूँ।पर बिकाऊ हूँ।जो चाहे,जब चाहे मुझे खरीद सकता है।थोक में खरीदे या खुदरे में,एक बार ही खरीद ले या किश्तों में ,मैं हमेशा तैयार बैठा हूँ।रात-दिन बस ग्राहकों के फिराक  में रहता हूँ।अब तो तजुर्बा इतना हो गया है कि ग्राहक को देखकर ही समझ जाता हूँ कि कैसे बिकूँगा और खरीदने वाला कब-कैसे दाम देगा।
     एक दिन अहले सुबह रवि बाबू तैयार होकर घर से निकलने लगे।घरवाली ने पूछा-कुछ खा कर जाओ, पता नहीं कब आओगे।रवि बाबू ने उन्हें मुस्कुराते हुए समझाया-काम ऐसा है कि खरीदने वाला खुशामद कर खिलायेगा और तुम्हारे लिए भी बांधकर देगा।इसलिए अपने घर का आटा गिला मत करो।दोपहर तक लौट आऊंगा।यह कहकर रवि बाबू ने अपने खटारा फटफटिया स्टार्ट की।शहर से निकले ही थे कि देहाती थाने में लगी चेकिंग में रोक लिए गए।रवि बाबू के पास न तो उस कटारे फटफटिया के कोई कागजात थे और न ही ड्राइविंग लाइसेंस।नाके पर पुलिस के जमादारसाहब  मथुरा जी की ड्यूटी थी।मथुरा जी रवि बाबू के देखकर समझ गए कि वे अच्छे दामों में बिकेंगे और रवि बाबू समझ गए कि मथुरा जी उन्हें ऊंची कीमत में जरूर खरीदेंगे।दोनों ने आजमाइश शुरू की।मथुरा जी ने गाड़ी जप्त और उन्हें चोरी की गाड़ी बताकर उन्हें जेल भिजवाने तक की बात कह डाली।रवि बाबू मुस्कुराते रहे।जब भीड़ थोड़ी कम हुई और मथुरा जी अकेले हुए तब रवि बाबू ने अचूक दांव चल दिया।मथुरा जी की दुखती रग पर हाथ रख दिया।रवि बाबू बोले-अरे मथुरा जी!यहाँ देहाती थाने में क्या रखा है?क्या आमदनी होती है-हम नहीं जानते क्या?आप कहिए तो आपको शहर के राजमार्ग वाले ओपी का इंचार्ज बनवा देंगे।दांव सही लगा।मथुरा जी रवि बाबू को हाथ पकड़कर किनारे ले गए।बोले-आप कैसे मेरा पोस्टिंग कराइयेगा?रवि बाबू बोले-आपका गृह सचिव मेरा सहपाठी है।यह सुनते ही मथुरा जी का मुँह खुला का खुला रह गया।वे रवि बाबू को सलाम करके बोले-हज़ूर गलती हो गयी।आपको पहचान नहीं पाए।कैसे पोस्टिंग होगी सो बताया जाए।जिज़ भक्ति-भाव से ,जिस जिज्ञासा से मथुरा जी पूछ रहे थे जैसे लगा कि विष्णु-पुराण के प्रथम अध्याय के ग्यारहवें श्लोक में सुत जी पराशर जी से कह रहे हों-
ब्राह्मणं प्रसादप्रवणम कुरुष्व मयि मानसम।
एनाहमेतजजानियाँ त्वत्प्रसादानमहामुने ।।
अर्थात हे ब्राह्मण! आप मेरे प्रति अपना चित्त प्रसादोंमुख कीजिये जिससे हे महामुने मैं आपकी कृपा से यह सब जान सकूं।
रवि बाबू ने जब देखा कि बिकने के लिए उपयुक्त ग्राहक है तो वे धीरे से उनके कान में बोले-सरकारी मशीनरी का काम है।आप तो जानते हैं कि मशीन चलने में तेल खर्च होता है।मथुरा जी की आंखों में बड़ी आशावादिता उमड़ पड़ी।उन्होंने खुद कहा-हज़ूर वहाँ की पोस्टिंग के लिए चार लाख लगता है, आप कुछ सस्ते में करवा दीजिए।रवि बाबू ने मथुरा जी को ताड़ लिया।फिर बोले-साढ़े तीन में काम हो जाएगा।लेकिन एडवांस में देना पड़ेगा।मथुरा जी ने कहा-हज़ूर अगले सोमवार तक इंतज़ाम हो जाएगा।कहां मिलिएगा?रवि बाबू फोन चेक कर बोले-अगले रविवार को मुझे इधर ही आना है।देख लीजिए।मथुरा जी ने रवि बाबू को मुस्कुराते हुए सलाम किया और रवि बाबू अपने अगले ग्राहक के यहाँ चल पड़े।
    अगले रविवार  मथुरा जी चेक नाका पर सुबह से ही तैयारी हालत में रवि बाबू के इंतज़ार में खड़े थे।देर शाम रवि बाबू आए और मथुरा जी उन्हें सलाम कर मिल लिए।रवि बाबू चलते-चलते बोले-शुक्रवार तक आपका काम हो जाएगा।रवि बाबू ने एस पी के कानों तक यह बात रामलाल जी से पँहुचवा दी कि मथुरा जी तो काफी लूट-पाट मचा रखे हैं।उन्हें शंट करने के लिए राजमार्ग वाले ओपी में भेज दीजिए।अपने ठीक हो जाएगा।एस पी साहब नए थे।बुधवार को ही मथुरा जी की बदली ओपी में हो गयी।रवि बाबू को रामलाल जी ने खबर दे दी।रवि बाबू ने रामलाल जी को धन्यवाद दिया।और रवि बाबू से अपनी तारीफ सुनकर उन्हें शाम की पार्टी में बुला लिया।
    रवि बाबू अब जोर से कहने लगे हैं कि मैं बिकाऊ हूँ।क्या आप उन्हें खरीदना चाहते हैं?

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