Big News : UP में वोटर लिस्ट पर सबसे बड़ी सर्जरी! SIR के बाद 2.89 करोड़ नाम होंगे बाहर

Siddarth Saurabh

Big News : उत्तरप्रदेश में SIR से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. यूपी में 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम काटे जाएंगे. 1.11 करोड़ वोटर्स को इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है. जिन्हें अब दस्तावेज देने पड़ेंगे. SIR फॉर्म भरने का समय रात 12 बजे तक है. 31 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी.

बताया जा रहा है कि 11 दिसम्बर तक 2.91 करोड़ वोटर के फॉर्म जमा नहीं थे. 15 दिन के बढ़े समय में करीब 10 लाख वोटर्स ने फॉर्म भरा है. 31 दिसम्बर के बाद 1.11 करोड़ वोटर्स को दस्तावेज के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है. 13 दस्तावेजों में से किसी एक को जमा कर वोटर बना जा सकता है. जिसके बाद फरवरी में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी.

जानकारी के मुताबिक प्रदेश में करीब 84 लाख वोटर लापता हैं. लखनऊ में करीब 40 लाख वोटर थे. अब तक यह करीब 70 फीसदी यानी 28 लाख वोटर ने एसाईआर फॉर्म भरे हैं. यानी लखनऊ में 12 लाख वोटरों के नाम कट गए हैं. इनमे से 5.36 लाख डुप्लीकेट मतदाता हैं.

मतदाताओं का 18.70 प्रतिशत

यह संख्या उत्तर प्रदेश के कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं का लगभग 18.70 प्रतिशत है. आयोग की कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच हलचल तेज हो गई है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार जिन मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, उन्हें मुख्य रूप से पांच श्रेणियों में बांटा गया है.

नाम कटने का श्रेणीवार विवरण

👉स्थानांतरित: 1.26 करोड़ (जो जगह छोड़ चुके हैं)

👉अनुपस्थित: 83.73 लाख (जो पते पर नहीं मिले)

👉मृत: 46 लाख.

👉डुप्लीकेट: 23.70 लाख.

👉फॉर्म जमा न करने वाले: 9.57 लाख.

एक से अधिक जगह उनके वोट

अभियान के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में लोग या तो उस पते पर रहते ही नहीं हैं या एक से अधिक जगह उनके वोट दर्ज हैं. सबसे अधिक प्रभाव लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज, कानपुर, आगरा और बरेली जैसे महानगरों और बड़े जिलों में देखा गया है, जहां शहरी आबादी के पलायन के कारण मतदाता सूची में भारी विसंगतियां मिली हैं.

आगे का महत्वपूर्ण रास्ता

👉31 दिसंबर: मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशन.

👉31 दिसंबर – 30 जनवरी: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय.

👉21 फरवरी तक: गायब रिकॉर्ड वाले मतदाताओं को नोटिस और सत्यापन.

👉28 फरवरी: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन.

इतने मतदाताओं का रिकॉर्ड गायब

सबसे बड़ी चुनौती 1.11 करोड़ मतदाताओं के साथ है, जिनका पिछला रिकॉर्ड (वर्ष 2003 की सूची) नहीं मिल पा रहा है. इनके परिवार का भी कोई विवरण उपलब्ध नहीं है. 31 दिसंबर को ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद ईआरओ (ERO) नोटिस भेजेंगे. इन मतदाताओं को नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित 12 दस्तावेजों में से कोई एक देना होगा.

फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते

सभीको ध्यान रहे कि केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा, इसके साथ एक और पहचान पत्र अनिवार्य है. यदि आपका नाम कट गया है या आप नए मतदाता बनना चाहते हैं (जो 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष के हो रहे हैं), तो आप फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं. जिन्होंने गणना प्रपत्र जमा नहीं किया, वे शपथ पत्र के साथ आवेदन कर सकेंगे.

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