Big Problem : बेटियों की ‘बोली’ लगाते नेता  समाज पर कलंक

Nishikant Thakur
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Big Problem : नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपनी प्रेमिका एमिली को लिखे एक पत्र में कहा था, ‘भारत एक अजीब देश है। इस देश में सत्ता हासिल करने वालों को नहीं, त्याग करने वालों को सम्मान मिलता है।’ सुभाष बाबू ने ऐसा इसलिए कहा होगा, क्योंकि वह बुद्धिजीवी थे और दूसरों की मानसिकता को पलक झपकते ही भांप लेते थे। लंबे समय तक राजनीतिज्ञों की छल को समझने में माहिर नेताजी ने दूर से ही यह भांप लिया होगा कि सत्ता हासिल करने के बाद राजनीतिज्ञों की मानसिकता किस तरह एकाएक बदल जाती है। जिस नारी सम्मान के लिए उनके चरणों में लेटकर, अपने माथे को टेक कर जीत हासिल करने का वरदान मांगते हैं, उन्हीं नारियों के प्रति किस तरह की घटिया सोच रखते हैं, इसके एकाध दर्जनों उदाहरण आज आपके सामने है। सच तो यह है कि ऐसे लोग नाटकीय ढंग से राजनीतिज्ञ का चोला उतारकर भूखे और रंगे सियार हो जाते हैं। फिर जब उनका ओढ़ा हुआ रंग उतरने लगता है, तब समाज उन्हें पलटकर भागने का अवसर नहीं देता है। सत्य के आचरण  के साथ जो कोई भी समाज को सही मार्ग दिखाता है, समाज भी उन्हें सम्मान देता है, यहां तक कि उसे ‘महात्मा गांधी’ तक बना देता है।

आपको याद होगा कुलदीप सिंह सेंगर, उन्नाव का पूर्व विधायक, जिसे 2019 में दुष्कर्म के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। आजीवन कारावास की सजा पाए पूर्व विधायक को हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा निलंबित किए जाने के बाद इस पर देश भर में खासा विवाद हुआ। दुष्कर्म पीड़िता ने इसके विरोध में अपनी मां के साथ दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। इसी प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग हाथ में तख्ती लेकर सेंगर के समर्थन में सामने आए थे। हालांकि, पिछले वर्ष 29 दिसंबर को उच्चतम न्यायालय ने सेंगर की सजा निलंबित करने से मना कर दिया, जिस वजह से दुष्कर्मी पूर्व विधायक अब भी जेल में ही बंद है। 18 सितम्बर, 2022 में उत्तराखंड  के पौड़ी जिले के गंगा-भोगपुर में वनंतरा रिज़ॉर्ट में अंकिता भंडारी नामक एक रिसेप्शनिस्ट के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म हुआ और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढंग से जांच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर दुष्कर्म व हत्या की इस वारदात को प्रचार मिला। अंकिता की मां के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। हालांकि, पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया गया है। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य के साथ रिज़ॉर्ट के प्रबंधक सौरभ भास्कर के साथ रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक ने अंकिता भंडारी की हत्या की बात कबूल कर ली है। उन पर फिलहाल अपहरण और हत्या के आरोप में मुकदमा चल रहा है।

दुष्कर्म व हत्या के इसी सनसनीखेज मामले के तत्काल बाद उत्तराखंड से ही अब फिर वहां के एक सिरफिरे नेता का ऐसा बयान सामने आया है, जो हर किसी का खून खौलाने वाला है। अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उत्तराखंड सरकार में मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कुछ लड़कों की शादी नहीं होने पर तंज कसते हुए कह रहे हैं— ‘क्या बुढ़ापे में शादी करोगे? अभी तक तो तुम्हारे तीन-चार बच्चे हो जाते। लड़की हम तुम्हारे लिए बिहार से ले आते हैं। बिहार में लड़की 20-25 हजार रुपये में मिल जाती है। चलिए मेरे साथ, तुम्हारी शादी करवाते हैं।’ उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण और बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के इस बयान ने बिहार से लड़कियों की शादी के नाम पर होने वाली खरीद—फरोख्त को चर्चा में ला दिया है।  लड़की को ‘खरीद-फरोख्त की वस्तु’ बताने वाले इस बयान पर बिहार महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए साहू को नोटिस दिया है। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मंत्री पर त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए इसकी जानकारी देने को भी कहा है। इस विवाद पर जब  बिहार की एक सामान्य महिला की प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, तो उनका कहना था कि इस नेता को केवल एक बार बिहार आना चाहिए। उसके बाद निश्चित रूप से गंदे नाले के उस कीड़े के साथ क्या सलूक किया जाएगा, यह तो बिहार की लड़कियां ही बताएंगी। उनका यह भी कहना था यदि वह नेता बिहार में लड़कियों के बीच आ गया, तो हो सकता है उसका मुंह विषधर की तरह कुचल दिया जाए । हालांकि, विवाद बढ़ने और नोटिस मिलने के बाद गिरधारी लाल साहू ने माफी मांग ली है।

उत्तर भारतीयों की लड़कियों के लिए तमिलनाडु के नेता दयानिधि मारन ने कहा कि ‘एमके स्टालिन के नेतृत्व में चल रही सरकार एक द्रविड़ मॉडल की सरकार हैं, जो सबके लिए सब कुछ पर विचार करके काम करती है। तमिलनाडु में हम महिलाओं को पढ़ने के लिए कहते हैं, लेकिन उत्तर भारत में क्या कहा जाता है? वह कहता है कि लड़कियों को काम पर नहीं जाना चाहिए, घर पर रहना चाहिए और बच्चे पैदा करने चाहिए, क्योंकि यही तुम्हारा काम है।’ यहां उल्लेखनीय है कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़ों में बताया गया है कि महिला सशक्तिकरण सूचकांक में उत्तर भारत के प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार का स्कोर क्रमशः 19.06 और 19.18 है, वहीं तेलंगाना 17.4 है। अब ऐसे अज्ञानी नेताओं को किस तरह समझाया जाए कि बिना अध्य्यन अथवा स्कोर का आंकड़ा समझे एकतरफा बयान देने से समाज में जय—जयकार नहीं होती, बल्कि ऐसे घटिया सोच वाले नेता सदैव वरिष्ठ राजनीतिज्ञों की तेल मालिश करके ही अपना गुजारा करते हैं। बता दें कि तमिलनाडु में इसी वर्ष चुनाव है और चुनाव से पहले वोटों के लिए सार्वजनिक मंच से इस प्रकार के विवादित बयान देना केवल सत्ता पर काबिज होने ही लालसा और कूटनीति का ही द्योतक है। ऐसे नेताओं का उद्देश्य वही होता है, जो बम्बई के तकलीन गवर्नर लार्ड एलफिन्स्टन ने 14 मई, 1859 को एक बैठक में कहा था ‘बांटो और राज करो।’ दयानिधि मारन की टिप्पणी पर भाजपा ने कहा कि मारन हिंदी भाषियों से माफी मांगें, उनमें समझ की कमी है।

एक ओर जहां हमारे प्रधानमंत्री ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की बात करते हैं, वहीं समाज की गंदगी से निकले नेता इस प्रकार के अपमानजनक बयान देने से बाज नहीं आते। निश्चित रूप ऐसी मानसिकता वाले राजनीतिज्ञों की मानसिकता की जांच कराई जानी चाहिए। समाज को इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि कोई राजनीतिज्ञ किस परिवेश से राजनीति में आया है? उसका पालन पोषण कैसा होता आया है? बहू—बेटियों के प्रति उसकी सोच, धारणा और इतिहास क्या रहा है? समाज के साथ ही इस बात का निर्णय पार्टियों के शीर्ष पर बैठे नेताओं को भी करना पड़ेगा, अन्यथा इस तरह की गंदी मानसिकता और सोच के नेता समाज को आगे बढ़ाने के स्थान पर उनके मन में घृणा, द्वेष भरते रहेंगे। ऐसे में देश आगे कभी नहीं बढ़ सकेगा। अतः ऐसे घृणित मानसिकता वाले राजनेताओं से समाज को निजात दिलाना ही पड़ेगा, अन्यथा भारत की अपनी संस्कृति को नष्ट होते हम अपनी आंखों से देखते रह जाएंगे, लेकिन कर कुछ भी नहीं पाएंगे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)

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