Bihar Election: बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए 6 और 11 नवंबर को वोटिंग होगी। उससे पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने अपने कुछ नेताओं पर कार्रवाई की है। पार्टी ने मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों सहित 27 नेताओं को निष्कासित कर दिया है। इस एक्शन की वजह पार्टी विरोधी गतिविधियां हैं।
निष्कासित किए गए नेताओं में परसा विधायक छोटेलाल राय, महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष रितु जायसवाल, विधायक मोहम्मद कामरान और पूर्व विधायक राम प्रकाश महतो जैसे नाम हैं। आरजेडी ने कहा, पार्टी अनुशासन के उल्लंघन और प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों का समर्थन करने के आरोप में छह साल के लिए इन नेताओं को निष्कासित किया गया है।
निष्कासित नेताओं में पार्टी की महिला शाखा की प्रमुख रहीं रितु जायसवाल परिहार से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। यहां से आरजेडी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे की बहू स्मिता पूर्वे को मैदान में उतारा है। इसी तरह नवादा के गोविंदपुर से मौजूदा विधायक मोहम्मद कामरान को भी पार्टी से निकाल दिया गया है, क्योंकि उन्होंने आरजेडी की आधिकारिक उम्मीदवार और पूर्व विधायक कौशल यादव की पत्नी पूर्णिमा यादव के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था।
बता दें कि 40% से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट कटने से आरजेडी के भीतर असंतोष बढ़ गया है, जिसके चलते कई विधायकों ने दलबदल किया है। पार्टी 243 विधानसभा सीटों में से 143 पर चुनाव लड़ रही है और गठबंधन सहयोगियों कांग्रेस और वीआईपी के साथ साझा कई सीटों पर फ्रैंडली फाइट पर लड़ रही है।
तेजप्रताप की साली वाली सीट पर भी एक्शन
तेजप्रताप यादव की साली डॉ. करिश्मा राय परसा से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। यहां से मौजूदा विधायक हैं छोटेलाल राय। वह जेडीयू में शामिल हो चुके हैं। छोटेलाल का ये फैसला आरजेडी को रास नहीं आया और उसने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। बता दें कि करिश्मा राय पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती हैं। दरोगा प्रसाद राय ने सात बार परसा सीट का प्रतिनिधित्व किया, जबकि उनके बेटे चंद्रिका राय ने खुद छह बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।
2020 के विधानसभा चुनाव में चंद्रिका ने जेडीयू के टिकट पर आरजेडी के छोटे लाल राय के खिलाफ यहां से चुनाव लड़ा था। उनके परिवार ने आरजेडी के खिलाफ सक्रिय रूप से प्रचार किया था। हालांकि, चंद्रिका 17,000 से अधिक मतों से हार गए थे।
निष्कासित होने वाले प्रमुख चेहरे
छोटे लाल राय (विधायक, परसा)
छोटे लाल राय सारण जिले की परसा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। ये आरजेडी के अनुभवी नेता रहे हैं, जिन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के दिग्गज नेता चंद्रिका राय (जो लालू यादव के समधी भी हैं) को हराकर बड़ी जीत दर्ज की थी। क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में इनकी अच्छी पहचान रही है।
मो. कामरान (विधायक, गोविंदपुर)
मो. कामरान नवादा जिले के गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र से RJD के वर्तमान विधायक हैं। उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में गोविंदपुर सीट से जीत हासिल की थी। कामरान नवादा जिले के नवादा नगर के निवासी हैं और उनकी शिक्षा इंटरमीडिएट स्तर तक है। वे पटना मुस्लिम साइंस कॉलेज से पढ़े हैं। अपनी क्षेत्रीय लोकप्रियता के लिए जाने जाने वाले कामरान कृषि और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उनकी राजनीति में मजबूत पकड़ है, और शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है।
अनिल यादव (पूर्व विधायक, नरपतगंज)
नरपतगंज के पूर्व विधायक अनिल यादव बिहार की राजनीति में एक जाना-माना चेहरा हैं। वे 2015 से 2020 तक नरपतगंज विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी के विधायक रहे। राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1974 में की, और 1978 के आपातकाल में भी सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि, 2020 के विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के जय प्रकाश यादव से हार गए। पार्टी के निर्देशों और लाइन से हटकर काम करने के कारण उन्हें RJD से निष्कासित किया गया है।
राम प्रकाश महतो (पूर्व विधायक, कटिहार)
राम प्रकाश महतो कटिहार विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। वह RJD के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे और एक समय बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री के तौर पर कैबिनेट का हिस्सा भी रहे। उनका निष्कासन कटिहार क्षेत्र में पार्टी के आधार को प्रभावित कर सकता है।
अनिल सहनी (पूर्व विधायक, मुजफ्फरपुर)
अनिल सहनी एक समय मुजफ्फरपुर के कुढ़नी सीट से विधायक बने थे, हालांकि बाद में उन्हें एलटीसी घोटाले के एक मामले में सदस्यता गंवानी पड़ी थी। वह निषाद समुदाय का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं और उनका निष्कासन इस समुदाय के वोटों के समीकरण को बदल सकता है।
सरोज यादव (पूर्व विधायक, बड़हरा)
भोजपुर जिले के बड़हरा से पूर्व विधायक रहे सरोज यादव पिछड़े व यादव समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं। टिकट न मिलने पर उन्होंने पार्टी पर राजनीतिक उपेक्षा का आरोप लगाया और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की, जो उनके निष्कासन का तात्कालिक कारण बना।
गणेश भारती (पूर्व विधान पार्षद, मुजफ्फरपुर)
गणेश भारती बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य रह चुके हैं। संगठन में उनकी अच्छी पकड़ थी और स्थानीय राजनीति में उनकी सक्रियता रही है। उन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों और अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने के आरोप में निष्कासित किया गया है।
रितु जायसवाल (वरिष्ठ नेत्री, परिहार)
हालांकि रितु जायसवाल विधायक या MLC नहीं हैं, पर वह निष्कासित नेताओं में सबसे चर्चित नाम हैं। वह RJD महिला प्रकोष्ठ की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रही हैं। वह पूर्व IAS अधिकारी अरुण कुमार की पत्नी हैं और सामाजिक तथा ग्रामीण विकास कार्यों के लिए प्रसिद्ध हैं। मुखिया के तौर पर अपने पंचायत को मॉडल पंचायत के रूप में विकसित करने के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। पार्टी टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया, जिसके चलते उन्हें निष्कासित किया गया है।
इन 27 नेताओं को राजद ने किया निष्काषित
- छोटे लाल राय, विधायक, परसा
- रितु जायसवाल, परिहार
- राम प्रकाश महतो, पूर्व विधायक, कटिहार
- अनिल सहनी, पूर्व विधायक, मुजफ्फरपुर
- सरोज यादव, पूर्व विधायक, बड़हरा
- गणेश भारती, पूर्व विधान पार्षद, मुजफ्फरपुर
- मो कामरान, विधायक, गोविंदपुर
- अनिल यादव, पूर्व विधायक, नरपतगंज
- अक्षय लाल यादव, पूर्व प्रत्याशी, चिरैया
- राम सखा महतो, जिला प्रधान महासचिव, चेरिया बरियारपुर
- अवनीश कुमार, राज्य परिषद सदस्य, भागलपुर
- भगत यादव, शेरघाटी
- मुकेश यादव, संदेश
- संजय राय, जिला प्रधान महासचिव, वैशाली
- कुमार गौरव, उपाध्यक्ष, अति पिछड़ा प्रकोष्ठ, दरभंगा
- राजीव कुशवाला, जिला महासचिव, दरभंगा
- महेश प्रसाद गुप्ता, जिलाध्यक्ष, व्यावसायिक प्रकोष्ठ, जाले
- वकील प्रसाद यादव, जाले
- पूनम देवी गुप्ता, महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष, मोतिहारी
- सुबोध यादव, पूर्व अध्यक्ष, किसान प्रकोष्ठ, मोतिहारी
- सुरेंद्र प्रसाद यादव, प्रदेश महासचिव, सोनपुर, सारण
- नीरज राय, जगदीशपुर
- अनिल चंद्र कुशवाहा, प्रदेश महासचिव, वैशाली
- अजीत यादव, जिला प्रवक्ता, सुल्तानगंज, भागलपुर
- मोती यादव, गोपालपुर, भागलपुर
- रामनरेश पासवान, चिरैया प्रखंड अध्यक्ष, पूर्वी चंपारण
- अशोक चौहान, पताही प्रखंड अध्यक्ष, पूर्वी चंपारण
